रामगोपाल जेना / चक्रधरपुर : गिरिराज सेना संरक्षक कमलदेव गिरि हत्याकांड का एक महीना पूर्ण हो चुका है। अब भी परिवार और समर्थक सीबीआई जांच और गिरफ्तार आरोपियों का नार्को टेस्ट की मांग को लेकर कार्मिक भूख हड़ताल जारी है। दसवें दिन कुली संघ के पांच लोग भूख हड़ताल पर बैठे। इधर, पश्चिम सिंहभूम जिला पुलिस हत्याकांड पर एसआईटी गठन करते हुए हत्या की साजिशकर्ता सतीश प्रधान समेत मामले में संलिप्त नौ लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। इसके बावजूद परिवार और समर्थकों में पुलिसिया कार्रवाई पर भरोसा नहीं है। सोमवार की शाम को स्वर्गीय कमलदेव गिरि के परिवार और समर्थकों ने कैंडल मार्च निकाला। वहीं सीबीआई जांच और गिरफ्तार आरोपियों का नार्को टेस्ट की मांग को लेकर 13 दिसंबर को चक्रधरपुर बाजार को बंद रखने का आह्वान किया। स्वर्गीय कमलदेव गिरि के बड़े भाई उमाशंकर गिरि, फूलनदेव गिरि और बहन पूजा गिरि ने बंद का आह्वान किया है। (नीचे भी पढ़ें)

सोमवार को श्याम नारायण शौण्डिक धर्मशाला में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए फूलनदेव गिरि ने कहा कि हत्या हुए एक महीना हो गया। सही मायने में असली अपराधी अब भी पकड़ से दूर हैं। जो भी दोषी गिरफ्तार हुए हैं परिवार और समर्थक उनकी नार्को टेस्ट की मांग कर रही है। संविधान की शक्तियों के अनुसार यह जिला प्रशासन के अधिकार में है। उनका नार्को टेस्ट कराया जाना चाहिए था, परंतु अब तक नहीं होना सोचनी वाला विषय है। मामले को फास्ट ट्रैक कोर्ट में लेकर दोषियों को अविलंब सजा दिया जाना चाहिए। इसे लेकर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। ऐसा कुछ भी नहीं हो रहा है। हत्या हुए एक महीना बीत गया तथा अनशन का दसवां दिन है, इसके बावजूद प्रशासनिक अधिकारियों की जो निष्क्रियता है वह स्पष्ट नजर आ रही है। हम शांति पूर्वक आंदोलन कर रहे हैं, ताकि यहां कि जनमानस को किसी तरह की कोई कठिनाई न हो। न्याय की मांग को लेकर रुपरेखा में बदलाव कर रहे हैं। न्याय के लिए कैंडल मार्च निकाल कर शहरवासियों से आह्वान कर रहे हैं कि एक दिन 13 दिसंबर मंगलवार को स्वेच्छा से चक्रधरपुर बाजार बंद रखें। (नीचे भी पढ़ें)

कैंडल मार्च को प्रशासन ने रोकना चाहा, रोक नहीं पाया
कैंडल मार्च श्याम नारायण शौण्डिक धर्मशाला से संध्या के समय निकाली गई। पवन चौक पहुंचने पर प्रशासन कैंडल मार्च को स्टेशन की तरफ जाने से रोकने का प्रयास किया, लेकिन रोक नहीं पाया। भीड़ आगे बढ़ती गयी। कैंडल मार्च ओवरब्रिज होते हुए भारत भवन चौक पहुंचा। जहां कमलदेव गिरि की हत्या हुई थी, वहां कैंडल जलाया गया। फिर सरस्वती शिशु विद्या मंदिर तुलसी भवन पहुंचे। जहां कैंडल को जलाया गया। कैंडल मार्च में अनेक समर्थक शामिल थे। हाथों में पट्टा और कैंडल लिए हुए। वहीं हत्याकांड की सीबीआई जांच और दोषियों का नार्को टेस्ट की नारेबाजी कर रहे थे। साथ ही 13 दिसंबर को चक्रधरपुर बाजार बंद का आह्वान किया। उसके बाद कैंडल मार्च लौट कर शौण्डिक धर्मशाला पहुंचा।





