
चाकुलिया : जंगल का फूल खिलकर जंगल में ही मुरझा जाता है. इसी तर्ज पर चाकुलिया प्रखंड की बर्डीकानपुर-कालापाथर पंचायत के माछकांदना गांव निवासी कलाकार दुर्गा प्रसाद हांसदा की प्रतिभा सरकारी उपेक्षा के कारण गांव तक ही सिमट कर रह गई है. दुर्गा प्रसाद हांसदा के पास बांसुरी और केंदरी बनाने की प्रतिभा है. वह खुद गांव में तीन चार युवा साथियों के साथ बांसुरी, केंदरी, खड़ाउ समेत लकड़ी की अन्य वस्तुओं का निर्माण करते हैं. दुर्गा प्रसाद हांसदा ने बताया कि वह इन वस्तुओं का निर्माण कर झारखंड के विभिन्न स्थानों पर जाकर और हाट में घूम-घूम कर खुद बेचते हैं. उन्होंने कहा कि अगर सरकार की ओर से ग्रामीण प्रतिभा को मदद मिले, तो झारखंड की प्रतिभाएं और संस्कृति का संरक्षण होगा.
केजीवीपी में बच्चों को देते हैं प्रशिक्षण : दुर्गा प्रसाद हांसदा ने बताया कि उन्होंने टाटा स्टील द्वारा विभिन्न स्थानों पर आयोजित कैम्प में जाकर केंदरी और बांसुरी बजाने की प्रशिक्षण दिया है. कहा कि वह फिलहाल चाकुलिया के कस्तूरबा गांधी बालिका उच्च विधालय में बच्चियों को केंदरी और बांसुरी बजाने के गुर सिखाते है. वहां उन्हें थोड़ा बहुत मेहनताना मिल जाता है, जिससे परिवार के भरण पोषण में सहयोग मिल जाता है.
पार्ट टाइम में करते हैं पेंटिंग का काम : दुर्गा प्रसाद हांसदा ने बताया कि केंदरी और बांसुरी बनाने के साथ ही वह पेंटर भी हैं. उनका मुख्य काम पेंटिंग करना है. वह सरकारी विद्यालयों की दीवार और निजी ग्रामीण के ऑर्डर पर पेंटिंग का काम करते हैं. केंदरी और बांसुरी के ऑर्डर पर वह घर पर इन वस्तुओं का निर्माण करते हैं.







