जमशेदपुर : सरायकेला जिले के चांडिल अनुमंडल क्षेत्र के नीमडीह प्रखंड अंतर्गत गुंडा पंचायत स्थित मनमोहन मिनरल प्राइवेट लिमिटेड कंपनी न केवल मजदूरों, बल्कि आसपास के ग्रामीणों को भी मौत बांट रही है. चौंकिए मत, पहले जान लीजिए कि इस कंपनी में क्या काम होता है और उसके खिलाफ ऐसा आरोप लगाने का कारण क्या है. दरअसल उक्त कंपनी की ओर से विगत आठ वर्षों से यहां सोने की खुदाई की जा रही है. लावा सोना खदान में कार्यरत कामगारों को जान हथेली पर रखकर काम करना पड़ता है. बता दें कि उक्त कंपनी द्वारा प्रयोग किए जा रहे हानिकारक रसायनों की वजह से न केवल खदान के मजदूर बल्कि क्षेत्र के ग्रामीणों को भी नुकसान हो रहा है. किसान बीमार हो रहे हैं, खेती प्रभावित हो रही है और उनके मवेशी मर रहे हैं. मजदूर यदि विरोध करते हैं तो उन्हें काम से बाहर कर दिया जाता है. ग्रामीण विरोध करते हैं तो उनकी कोई सुधि नहीं ले रहा. ऐसे में सवाल उठता है कि इनकी सुधि कौन लेगा? (नीचे भी पढ़ें)

बताते चलें कि कंपनी में अंडरग्राउंड माइनिंग एवं प्लांट में लगभग 200 मजदूर कार्यरत हैं. मजदूरों को दैनिक मजदूरी के अलावा अन्य कोई सुविधा नहीं मिलती है. मजदूर दोहरे शोषण के डर से कंपनी के खिलाफ आवाज उठाने से डरते हैं. खदान में कार्यरत बिजली मिस्त्री सुधीर महतो ने जानकारी देते हुए बताया कि कंपनी पिछले 8 साल से सोने के खनन का काम कर रही है. स्वास्थ्य बीमा को लेकर कंपनी से कई बार वार्ता भी हुई, किन्तु कंपनी स्वास्थ्य बीमा नहीं देने की बात कहकर पल्ला झाड़ लेती है. ऐसे में उन्हें दैनिक मजदूरी पर ही आश्रित रहना पड़ता है. परिवार का भरण-पोषण और स्वास्थ्य का खर्च स्वयं ही उठाना पड़ता है. वहीं ग्रामीणों ने भी अपनी विवशता बताते हुए सरकार और विभाग से मदद की गुहार लगाई है. उधर सुरक्षा के दृष्टिकोण से उक्त कंपनी के आसपास किसी को प्रवेश करने नहीं दिया जाता है. वहीं हानिकारक रसायनों का भंडारण भी पहाड़ी पर किया जाता है जो बरसात के दिनों में बहकर खेतो में पहुंच रहे हैं जिससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति कम हो रही है और भूगर्भीय जल के कारण इंसान तो इंसान जानवर भी मर रहे हैं. इसका जवाब कौन देगा, यह गंभीर प्रश्न है.



