जमशेदपुर : बिष्टुपुर स्थित आंध्र भक्त श्री राम मंदिर में आयोजित 57वें श्री वेंकटेश्वर स्वामी ब्रह्मोत्सव के दसवें दिन शुक्रवार को दक्षिण भारतीय श्रीवैष्णव आगम परंपरा एवं तिरुमला-तिरुपति की वैदिक रीति के अनुसार विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए. पूरे दिन मंदिर परिसर नादस्वरम, तविल एवं अन्य पारंपरिक दक्षिण भारतीय वाद्य यंत्रों की मंगलध्वनि से गुंजायमान रहा. बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भगवान श्री वेंकटेश्वर स्वामी के दर्शन कर पुण्य लाभ किया. (नीचे भी पढ़ें)

प्रातःकाल भगवान श्री वेंकटेश्वर स्वामी की नित्यकट्ला पूजा संपन्न हुई. वैदिक आचार्यों ने संकल्प, विष्वक्सेन आराधना, वेदपाठ एवं श्रीवैष्णव आगम शास्त्रों के अनुसार विशेष पूजा-अर्चना संपन्न कराई, जिसके पश्चात अभिषेकम् में भगवान को पवित्र जल, पंचामृत, दुग्ध, दधि, घृत, मधु, नारियल जल, चंदन एवं सुगंधित द्रव्यों से दिव्य स्नान कराया गया. अभिषेक के उपरांत भगवान का भव्य शृंगार कर विशेष आरती एवं नैवेद्य अर्पित किया गया. इसके बाद भगवान श्री वेंकटेश्वर स्वामी का ब्रह्मणम् संपन्न हुआ, जिसमें उत्सव विग्रह की वैदिक मंत्रोच्चार एवं मंगल वाद्यों के बीच परिक्रमा कराई गई. इसके उपरांत लक्ष्मी संवाद में भगवान श्री वेंकटेश्वर स्वामी एवं माता महालक्ष्मी के दिव्य मिलन एवं आध्यात्मिक संवाद का भावपूर्ण आयोजन हुआ. (नीचे भी पढ़ें)
इसके पश्चात वसंतोत्सव अत्यंत श्रद्धा एवं उल्लास के साथ संपन्न हुआ. भगवान श्री वेंकटेश्वर स्वामी को सुगंधित पुष्पों, चंदन, इत्र एवं हरित पत्रों से भव्य रूप से अलंकृत किया गया. वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान पर सुगंधित जल एवं पुष्प अर्पित किए गए तथा विशेष आराधना संपन्न हुई. दक्षिण भारतीय श्रीवैष्णव परंपरा में वसंतोत्सव भगवान को शीतलता अर्पित करने, प्रकृति के नवजीवन, सुख-समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य एवं आध्यात्मिक आनंद का प्रतीक माना जाता है. मान्यता है कि इस उत्सव के माध्यम से भगवान संपूर्ण सृष्टि पर अपनी कृपा बरसाते हैं तथा भक्तों के जीवन में सुख, शांति एवं समृद्धि का संचार होता है. (नीचे भी पढ़ें)
प्रातः लगभग 9:00 बजे ब्रह्मोत्सव का अत्यंत महत्वपूर्ण एवं पुण्यदायी अनुष्ठान चक्र स्नानम् वैदिक विधि-विधान के साथ संपन्न हुआ. दक्षिण भारत, विशेषकर तिरुमला तिरुपति की परंपरा में चक्र स्नानम् ब्रह्मोत्सव का सबसे महत्वपूर्ण समापन अनुष्ठानों में से एक माना जाता है. इस अवसर पर भगवान श्री वेंकटेश्वर स्वामी के उत्सव विग्रह तथा उनके दिव्य आयुध सुदर्शन चक्र का वैदिक मंत्रोच्चार के मध्य पवित्र जल में विधिवत स्नान कराया गया. इसके पश्चात भगवान के उत्सव विग्रह एवं सुदर्शन चक्र को श्रद्धालुओं के हाथों के ऊपर विराजमान कर पवित्र जल में स्नान कराया गया. श्रद्धालुओं ने भगवान के विग्रह का स्पर्श एवं पवित्र स्नान का सौभाग्य प्राप्त कर स्वयं को धन्य महसूस किया. (नीचे भी पढ़ें)
सायंकाल भगवान श्री वेंकटेश्वर स्वामी चंद्रप्रभा वाहन पर दिव्य रूप में विराजमान होकर जुगसलाई के मुख्य बाजार मार्ग से नगर भ्रमण पर निकले. भगवान के आगमन पर संपूर्ण जुगसलाई क्षेत्र भक्तिमय वातावरण में डूब गया. मार्ग के दोनों ओर बड़ी संख्या में श्रद्धालु, स्थानीय नागरिक एवं व्यवसायी भगवान के दर्शन के लिए एकत्र हुए. जुगसलाई के समस्त व्यवसायियों एवं स्थानीय लोगों ने भगवान बालाजी का मंगल आरती, पुष्पवर्षा एवं पुष्प अर्पित कर भव्य स्वागत किया तथा भगवान से सुख, शांति एवं समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त किया. पूरे मार्ग में पारंपरिक दक्षिण भारतीय वाद्ययंत्र नादस्वरम एवं तविल की मंगलध्वनि निरंतर गूंजती रही, जिससे वातावरण पूर्णतः आध्यात्मिक एवं भक्तिमय बना रहा. (नीचे भी पढ़ें)
भगवान के स्वागत में भव्य आतिशबाजी की गई. पूरे नगर भ्रमण के दौरान “गोविंदा, गोविंदा”, “ॐ नमो वेंकटेशाय नमः” के गगनभेदी जयघोष लगातार गूंजते रहे. श्रद्धालु भक्ति संगीत एवं जयकारों के साथ भगवान की झांकी के पीछे-पीछे चलते रहे. भगवान बालाजी के चंद्रप्रभा वाहन के दर्शन के लिए मार्ग में जगह-जगह श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी और लोगों ने परिवार सहित भगवान के दिव्य दर्शन कर अपने जीवन को धन्य माना.







