जमशेदपुर : झारखंड में कुड़मी के बाद अब मुखी (घासी) समुदाय खुद को एसटी यानी आदिवासी का दर्जा देने की मांग की है. शनिवार को केंद्रीय मुखी समाज का एक प्रतिनिधिमंडल पूर्वी सिंहभूम जिले के उपायुक्त को राज्यपाल के नाम एक मांगपत्र सौंपते हुए मुखी समाज को एसटी का दर्जा देने की मांग की है. समाज के लोगों ने बताया कि 1913 से 1950 तक मुखी समाज एसटी में शामिल था. 6 दिसंबर 1950 को इस समुदाय को साजिश के तहत एसटी की श्रेणी से बाहर कर दिया गया. उन्होंने पुनः मुखी समुदाय को एसटी में शामिल करने की मांग की. (नीचे भी पढ़ें)
गौरतलब है कि कुछ माह पूर्व कोल्हान से सटे बंगाल, ओडिशा के कुड़मी भी एसटी को दर्जा देने की मांग पर आंदोलन किए थे. उस दौरान कई स्थानों पर रेल रोको कार्यक्रम चला और कुछ हद तक काफी सफल भी रहा. वहीं इस मांग को लेकर आदिवासियों द्वारा लगातार आंदोलन किया जा रहा है. कुड़मी समाज का कहना है कि 1950 में एक साजिश के तहत कुड़मी को एसटी की सूची से निकाला गाय. इसका खामियाजा आज समाज के लोग भुगत रहे है.




