जमशेदपुर : जमशेदपुर में जैसे-जैसे गर्मी अपने तेवर दिखाने लगी है, वैसे-वैसे लोगों की दिनचर्या भी बदलने लगी है. तेज धूप और बढ़ते तापमान के बीच हर कोई ठंडक की तलाश में है. चाहे वह ठंडे कपड़े हों, ठंडी हवा या फिर ठंडा पानी. ऐसे में शहर में एक बार फिर देसी उपायों की ओर लोगों का रुझान तेजी से बढ़ रहा है. खासकर मिट्टी के घड़े, मटका और सुराही की मांग इन दिनों चरम पर पहुंच गयी है. जमशेदपुर के कुम्हारों ने भी इस बढ़ती मांग को देखते हुए अलग-अलग डिजाइन और आकार के घड़े, सुराही और मिट्टी की बोतल बनाना शुरू कर दिया है. यह पारंपरिक बर्तन न सिर्फ पानी को ठंडा रखते हैं, बल्कि सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद माने जाते हैं. स्थानीय लोग इसे ‘देसी कूलर’ के नाम से भी पुकारते हैं, क्योंकि इसमें रखा पानी प्राकृतिक रूप से ठंडा होता है और शरीर को अंदर से ठंडक पहुंचाता है. (नीचे भी पढे़ं)

शार्प भारत से बातचीत में कुम्हार विनय प्रजापति बताते हैं कि ये सभी उत्पाद खास गंगा मिट्टी से तैयार किए जाते हैं, जिससे पानी का स्वाद और भी बेहतर हो जाता है. उन्होंने बताया कि एक साधारण घड़ा मात्र 100 रुपये से शुरू हो जाता है, जिसमें लगभग 5 लीटर पानी आसानी से रखा जा सकता है. इसके अलावा, लोगों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए घड़ों में नल (टोंटी) भी लगाया जा रहा है, जिससे बिना झुकाए आसानी से पानी निकाला जा सके. विनय प्रजापति आगे बताते हैं कि मिट्टी की डिजाइनर बोतलों की भी खूब डिमांड है. इनकी कीमत 100 से 130 रुपये के बीच रखी गयी है. यह बोतलें देखने में आकर्षक होने के साथ-साथ पानी को लंबे समय तक ठंडा बनाए रखती हैं. (नीचे भी पढे़ं)
उनका कहना है कि फ्रिज का पानी भले ही तुरंत ठंडक दे, लेकिन घड़े का पानी पीने से दिल, दिमाग और शरीर को जो सुकून मिलता है, वह अलग ही होता है. शहर के बाजारों में इन दिनों खासकर गोल आकार के घड़ों की मांग सबसे ज्यादा देखी जा रही है. लोग बताते हैं कि गोल घड़े में पानी ज्यादा आता है, यह ज्यादा टिकाऊ होता है और लंबे समय तक पानी को ठंडा बनाए रखता है. यही वजह है कि लोग बड़ी संख्या में इनकी खरीदारी कर रहे हैं. प्रचंड गर्मी के बीच जमशेदपुर में मिट्टी के बर्तनों का यह देसी ट्रेंड न सिर्फ लोगों को राहत दे रहा है, बल्कि कुम्हारों के लिए भी रोजगार का एक अच्छा अवसर बनकर सामने आ रहा है.



