जमशेदपुर / आदित्यपुर : जिले में दो दिन से लगातार हो रही बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है. सुवर्णरेखा और खरकई नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है. जिला प्रशासन की ओर से दी गई जानकारी अनुसार दोनों ही नदियां खतरे के निशान के ऊपर बह रही है, परंतु राहत की खबर यह है कि जलस्तर में गिरावट देखी जा रही है. इसे ध्यान में रखते हुए तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों को अलर्ट कर दिया गया है. प्रशासन की ओर से तटीय इलाके में रहने वाले लोगों को सुरक्षित रहने के लिए व्यवस्था की गई है. खाने पीने की भी व्यवस्था की गई है. साथ ही लोगों से अपील की गई है कि अपने घरों से ना निकले. वहीं बाढ़ वाले इलाकों में लोगों को सुरक्षित स्थान पर ले जाया जा रहा है. बीती रात भर एनडीआरएफ की टीम तैनात रही. इस दौरान स्कूलों में भी पानी घुस गया है. कई स्कूल भी इस दौरान बंद कर दिए गए है.

खतरे के निशान से उपर बह रही दोनों नदियां : जमशेदपुर व शहर के बीचों-बीच बहने वाली खरकई और सुवर्णरेखा नदी का जलस्तर खतरे के निशान से उपर बह रहा है. हालांकि दोनों ही नदियों का जलस्त अभी खतरे के निशान के ऊपर है. परंतु जलस्तर में गिरावट आ रही है. आपको बता दें कि बुधवार सुबह 10 बजे तक आदित्यपुर पुल के पास खरकई नदी खतरे के निशान से 3.60 मीटर और मानगो पुल के पास सुवर्णरेखा नदी 1.16 मीटर ऊपर बह रही है. खरकई नदी का डेंजर लेवर 129.00 मीटर है, जबकि वर्तमान में जलस्तर 132.600 पहुंच चुका है. वहीं सुवर्णरेखा नदी का डेंजर लेवल 121.50 मीटर है, जो अब 122.660 मीटर तक पहुंच चुका है. (नीचे भी पढ़ें)

उपायुक्त ने जलजमाव वाले क्षेत्रों में मोटर पंप से जल निकासी, साफ-सफाई, ब्लीचिंग का छिड़काव एवं फॉगिंग के दिए निर्देश
जमशेदपुर : स्वर्णरेखा एवं खरकई नदी का जलस्तर अभी भी खतरे के निशान से ऊपर होने के कारण स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन द्वारा लगातार निगरानी रखी जा रही है तथा नदी के तटीय एवं डूब क्षेत्र में रहने वाले नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है. उपायुक्त राजीव रंजन द्वारा जलजमाव वाले क्षेत्रों में तत्काल जल निकासी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए है. टाटा स्टील यूआइएसएल के सहयोग से शास्त्रीनगर, रामजनमनगर, बागबेड़ा सहित अन्य प्रभावित क्षेत्रों में मोटर पंप के माध्यम से जल निकासी का कार्य कराने हेतु निर्देशित किया गया है. संबंधित नगर निकाय पदाधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि जलजमाव वाले क्षेत्रों की स्थिति का लगातार आकलन करते हुए आवश्यकतानुसार अतिरिक्त संसाधन एवं मशीनरी की व्यवस्था सुनिश्चित करें, ताकि लोगों को जलजमाव से जल्द से जल्द राहत मिल सके. साथ ही, जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति, जुगसलाई नगर परिषद एवं मानगो नगर निगम के पदाधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि संभावित प्रभावित नागरिकों के लिए चिन्हित आश्रय स्थलों में आवश्यक व्यवस्थाएं दुरुस्त रखें. आश्रय स्थलों पर खाने-पीने, भोजन, फर्स्ट एड, प्रकाश, स्वच्छता एवं अन्य आवश्यक सुविधाओं की उपलब्धता पूरी रहे, ताकि आवश्यकता पड़ने पर लोगों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़े. जिन क्षेत्रों में जलजमाव कम हो गया है या पानी निकल चुका है, वहां युद्धस्तर पर साफ-सफाई अभियान चलाने का निर्देश दिया गया है. जल निकासी के बाद सड़कों, गलियों एवं सार्वजनिक स्थलों की सफाई कराने, ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव तथा फॉगिंग कराने को कहा गया है. (नीचे भी पढ़ें)
जलजमाव के कारण उत्पन्न गंदगी एवं मच्छरों के प्रजनन की संभावना को देखते हुए संबंधित क्षेत्रों में नियमित रूप से स्वच्छता एवं मच्छररोधी गतिविधियां संचालित करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि मौसम जनित एवं जलजनित बीमारियों के प्रसार की संभावना को न्यूनतम किया जा सके. स्वास्थ्य विभाग को भी प्रभावित एवं संभावित प्रभावित क्षेत्रों में आवश्यक निगरानी रखने तथा जरूरत के अनुसार स्वास्थ्य कर्मियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया है. नागरिकों से अपील की गई है कि जलजमाव के बाद आसपास की स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें, दूषित पानी के सेवन से बचें तथा किसी भी प्रकार की स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होने पर तत्काल निकटतम स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें. जिला प्रशासन द्वारा स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है. नागरिकों से अपील है कि अफवाहों पर ध्यान न दें, केवल प्रशासन द्वारा जारी आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करें तथा अपनी एवं अपने परिवार की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए सतर्क रहें. उपायुक्त राजीव रंजन ने डूब क्षेत्र एवं नदी के तटीय इलाकों में रहने वाले नागरिकों से अपील की है कि वे पूरी तरह सतर्क रहें और जलस्तर में उतार-चढ़ाव को देखते हुए किसी भी प्रकार का जोखिम न लें. आवश्यकता होने पर प्रशासन द्वारा चिन्हित आश्रय स्थलों अथवा सुरक्षित ऊंचे स्थानों पर शरण लें. नदी, नाला एवं जलजमाव वाले क्षेत्रों के समीप अनावश्यक रूप से जाने से बचें तथा प्रशासन एवं स्थानीय निकायों द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें.







