
जमशेदपुर: पटमदा थाना क्षेत्र के बाटालुका गांव में शनिवार की सुबह नक्सल विरोधी अभियान के दौरान पुलिस और ग्रामीणों के बीच तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई. कितापाठ जाहेरथान के पास सर्च अभियान से लौट रही पुलिस की एलआरपी टीम को सैकड़ों ग्रामीणों ने घेर लिया. ग्रामीणों के हाथों में लाठी-डंडे थे. करीब पांच घंटे तक पुलिस टीम मौके पर ही घिरी रही. टीम में पटमदा थाना प्रभारी के अलावा भुईयांसिनान कैंप के एसटीएफ जवान भी शामिल थे. बताया जाता है कि पुलिस एवं सुरक्षा बलों की टीम शुक्रवार शाम दलमा रेंज के अलग-अलग इलाकों में नक्सलियों की तलाश के लिए अभियान पर निकली थी. अभियान के दौरान झुंझका, मेघादह, राजाबासा, अपो और सारी होते हुए बाटालुका गांव में भी तलाशी ली गई..पुलिस की ओर से कई घरों में नक्सलियों और उनके कथित सहयोगियों की तलाश किए जाने की बात सामने आई है. इसी अभियान के दौरान शनिवार तड़के पुलिस टीम बाटालुका निवासी लक्खन सोरेन और उनकी दोनों पत्नियों भारती सोरेन एवं सूमी सोरेन को अपने साथ लेकर लौट रही थी. (नीचे देखे पूरी खबर)
इसी दौरान घर में मौजूद लक्खन सोरेन की 10 वर्षीय बेटी पार्वती के रोने और शोर मचाने के बाद आसपास के लोग मौके पर पहुंचने लगे. कुछ ही देर में बड़ी संख्या में महिला और पुरुष ग्रामीण वहां जमा हो गए और पुलिस टीम को चारों तरफ से घेर लिया. ग्रामीणों ने पुलिस से लक्खन सोरेन और उनकी दोनों पत्नियों को तत्काल छोड़ने की मांग की. इसके साथ ही बुधवार से पटमदा थाना में हिरासत में रखे गए बाटालुका निवासी युधिष्ठिर महतो को भी मुक्त करने की मांग उठाई गई. ग्रामीणों ने पुलिस टीम को स्पष्ट तौर पर कहा कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक सुरक्षा बलों को वहां से जाने नहीं दिया जाएगा. बारिश के बीच कई घंटे तक पुलिस और ग्रामीण आमने-सामने रहे. पुलिस टीम ने स्थिति को बिगड़ने से रोकते हुए वरीय अधिकारियों के निर्देश का इंतजार किया. इस दौरान मौके पर तनाव बना रहा।मामले की जानकारी मिलने के बाद स्थानीय स्तर पर ग्रामीणों और पुलिस के बीच गतिरोध खत्म कराने की कोशिश शुरू हुई. करीब नौ बजे स्थानीय जिला पार्षद प्रदीप बेसरा की पहल पर पटमदा थाना में हिरासत में रखे गए युधिष्ठिर महतो को मौके पर लाया गया. इसके बाद संबंधित लोगों को छोड़े जाने के बाद ग्रामीणों ने पुलिस टीम को रास्ता दिया. करीब पांच घंटे तक चले इस पूरे घटनाक्रम के बाद पुलिस टीम वहां से रवाना हो सकी और स्थिति सामान्य हुई. बताया जा रहा है कि नक्सल विरोधी अभियान के दौरान हुई इस घटना को पुलिस प्रशासन ने गंभीरता से लिया है.




