जमशेदपुर : जियाडा रेगुलेशंस 2026 के मसौदे को लेकर शनिवार को उद्योग एवं व्यापार संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई, जिसमें जियाडा के एमडी वरुण रंजन अपनी टीम के साथ शामिल हुए. उन्होंने प्रत्येक प्रावधान को क्रमवार सुनने के बाद उन पर विस्तार से चर्चा की. बैठक में क्षेत्रीय निदेशक प्रेम रंजन, एवं क्षेत्रीय उप निदेशक दिनेश रंजन सहित जियाडा के अन्य अधिकारी भी उपस्थित रहे. उधर चैंबर की ओर से अध्यक्ष मानव केडिया, उपाध्यक्ष हर्ष बकरेवाल एवं सचिव विनोद शर्मा तथा एसिया, लघु उद्योग भारती, आइएसआरओ एवं एफजेसीसीआइ के प्रतिनिधि भी शामिल रहे. (नीचे भी पढ़ें)
वर्ष 2016 के नियमों के तहत आवंटित ऐसी इकाइयां, जो उत्पादन में हैं परंतु जिनका डीओपी/आइओपी औपचारिक रूप से दर्ज नहीं हुआ है, अधिसूचना की तिथि से 6 माह के भीतर आइओपी जारी करने हेतु आवेदन कर सकेंगी. बिजली खपत, जीएसटीएन रिटर्न एवं ईपीएफओ रिकॉर्ड के आधार पर डीम्ड आइओपी प्रमाण-पत्र जारी होगा, जिससे इकाइयां परफॉर्मिंग एलॉटी सर्टिफिकेशन, नवीकरण एवं घटित पेनल रेंट जैसे लाभों की पात्र बनेंगी, हालांकि बकाया राशि माफ नहीं होगी. (नीचे भी पढ़ें)
क्षेत्रीय वर्गीकरण पर बताया गया कि प्रत्येक औद्योगिक क्षेत्र को निवेशक मांग के आधार पर सैचुरेटेड, एक्टिव, इमर्जिंग एवं प्रायोरिटी जोन में बांटा जाएगा, जिसका असर भूमि दर पर पड़ेगा. राजमार्ग किनारे के भूखंडों को प्राइम प्लॉट के रूप में ए+, ए, बी+ एवं बी ग्रेड में चिह्नित कर बेस प्राइस पर क्रमशः 20%, 15%, 10% एवं 5% तक प्रीमियम तथा प्रतिस्पर्धी बोली से आवंटन का प्रावधान रखा गया है. भूखंड आरक्षण में 40% सूक्ष्म-लघु उद्यमों हेतु, तथा 10%-10% क्रमशः पीएएफ, एससी/एसटी उद्यमियों एवं महिला-नेतृत्व वाले उद्यमों हेतु आरक्षित रहेगा. आवंटन मूल्य निर्धारण में लैंडलीज प्रीमियम के अतिरिक्त जियाडा चार्जेज के रूप में एलएलपी का 12% — (इंस्टीच्यूशनल चार्जेज 7%, प्रॉसेसिंग चार्ज 3% तथा इन्भेस्टर फैसिलिटेशन चार्ज 2%)— निश्चित एवं गैर-रियायती रूप से लागू होगा. लैंड रेंट एवं मेंटेनेंस चार्ज में प्रतिवर्ष स्वतः 5% वृद्धि तथा भूमि लागत पर अधिकतम 50% तक की संचयी छूट सीमा पर भी चर्चा हुई. भूखंड विज्ञापन से पूर्व सड़क, नाली, सीमांकन जैसी बुनियादी सुविधाएं तथा पोजेशन रेडीनेस सर्टिफिकेट अनिवार्य होंगे, जबकि जल-विद्युत जैसी उन्नत सुविधाएं 24 माह में पूर्ण करनी होंगी. (नीचे भी पढ़ें)
स्वामित्व/संरचना में परिवर्तन के तहत मूल आवंटी की हिस्सेदारी 50% या अधिक बनी रहने पर मात्र Rs.10,000 की प्रोसेसिंग फीस पर सूचना पर्याप्त होगी; 25% से 49% हिस्सेदारी लेने पर प्रचलित एलएलपी का 5% शुल्क तथा एमडी की स्वीकृति आवश्यक होगी, जबकि 50% या अधिक हिस्सेदारी हस्तांतरण को ट्रांसफर माना जाएगा. विलंब से सूचना देने पर 10,000 से 2,00,000 रुपये तक दंड का प्रावधान भी रखा गया है. उद्योग संगठनों को यह विशेष रूप से अवगत कराया गया कि जॉइं वेंचर, सब लीज तथा सिक यूनिट्स रिवील योजनाएं जियाडा के इतिहास में पहली बार इस रेगुलेशन में शामिल की जा रही हैं, जो उद्योगों को पूंजी, साझेदारी एवं पुनरुद्धार के नए अवसर प्रदान करेंगी. (नीचे भी पढ़ें)
संयुक्त उद्यम की नई व्यवस्था के अंतर्गत तीन-स्तरीय संरचना प्रस्तावित है — टीयर ए में 26% तक इक्विटी पर केवल प्रोसेसिंग फीस पर उत्तर-स्वीकृति; टीयर बी में 26% से 49% इक्विटी पर एमडी की पूर्व-स्वीकृति के साथ आइओपी के बाद के वर्षों के आधार पर प्रचलित एलएलपी का 10%, 7%, 5% अथवा 3% जेवी फी, जिसमें टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, एक्सपोर्ट ओरिएंटेड, रोजगार-सघन एवं सिक यूनिट रिवाइवल जेवी पर 15% से पूर्ण छूट तक की अतिरिक्त रियायत का प्रावधान है. टीयर सी में 50% या अधिक इक्विटी को सीधे ट्रांसफर मानते हुए ट्रांसफर फी लागू होगा. (नीचे भी पढ़ें)
उप-पट्टा (सब लीज) की नई व्यवस्था के तहत निर्मित क्षेत्र के 10% तक बिना किसी शुल्क के केवल सूचना देना पर्याप्त होगा; 30% तक क्षेत्र के लिए स्वीकृति के साथ वार्षिक भाड़े का 5% शुल्क तथा मैनेज्ड इंडस्ट्रियल एस्टेट के लिए बोर्ड की स्वीकृति के साथ 5% शुल्क देय होगा. न्यूनतम 60% उत्पादन क्षमता की शर्त पूरी करनी होगी तथा प्रतिबंधित गतिविधियों में सब-लेटिंग पर तत्काल निरस्तीकरण एवं दंड का प्रावधान है. (नीचे भी पढ़ें)
आवंटन हस्तांतरण के तहत मानक ट्रांसफर पर ट्रांसफर प्राइस का 15% शुल्क देय होगा, जिसमें 3 वर्ष तक कोई छूट नहीं, 3 से 10 वर्ष तक 85% तथा 10 वर्ष से अधिक पर 70% की छूट रहेगी. गैर-कार्यरत इकाई पर 50% शुल्क, परफॉर्मिंग एलॉटी को अतिरिक्त 5% छूट तथा समूह के भीतर हस्तांतरण पर मात्र 5% शुल्क निर्धारित है. विलय एवं विभाजन में समान प्रोमोटर समूह पर 1% मर्जर फी तथा नियंत्रण परिवर्तन पर पूर्ण ट्रांसफर फी लागू होगा. पट्टाधृत अधिकारों के बंधक पर बताया गया कि आवंटी केवल अनुसूचित बैंकों अथवा आरबीआइ मान्यता प्राप्त संस्थानों के पास ही अधिकार बंधक रख सकेंगे, जिसके लिए एनओसी 15 कार्य दिवसों में जारी होगी. जियाडा का बकाया सदैव प्रथम प्रभार रहेगा तथा ऋण चूक पर जियाडा को 30 दिनों के भीतर राइट ऑफ फर्स्ट रिफ्यूजल का अधिकार रहेगा. गतिविधि परिवर्तन में छोटे बदलाव पर 5,000, बड़े बदलाव पर 25,000 तथा पूर्ण रूपांतरण पर 2,00,000 रुपये का शुल्क प्रस्तावित है. (नीचे भी पढ़ें)
बीमार इकाइयों के पुनरुद्धार (सिक यूनिट रिवाइवल) की नई योजना के तहत बीमार घोषित इकाइयों को 12 माह की अवधि, जिसे संतोषजनक प्रगति पर 24 माह तक बढ़ाया जा सकेगा, प्रदान की जाएगी. इस अवधि में पेनल रेंट की पूर्ण माफी, विलय पर 5% रियायती शुल्क, हस्तांतरण पर ट्रांसफर फी में 25% छूट, तथा मूल बकाया के 80% पर वन टाइम सेटलमेंटके साथ विलंब ब्याज की पूर्ण माफी का प्रस्ताव है, ताकि बंद इकाइयां पुनः चालू हो सकें. भूमि आवश्यकता एवं नियोजन के तहत औद्योगिक क्षेत्रों में न्यूनतम 55% भूमि औद्योगिक भूखंडों हेतु, न्यूनतम 10% ग्रीन जोन हेतु आरक्षित रखने तथा विज्ञापन से पूर्व बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की अनिवार्यता का प्रावधान है. भविष्य की भूमि आवश्यकताओं के लिए लैंड एक्सपैंशन कॉर्पस फंड के गठन का भी प्रस्ताव है, जिसे आवंटन शुल्कों से वित्त पोषित किया जाएगा. (नीचे भी पढ़ें)
उद्योग संगठनों ने एकमत से कहा कि जियाडा रेगुलेशंस 2026 उद्योगों के लिए सरल, स्पष्ट, पारदर्शी एवं ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के अनुरूप होने चाहिएं, विशेष रूप से नई शुरू की गई योजनाओं तथा हस्तांतरण, विलय एवं बंधक से जुड़े शुल्कों में व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता बताई गई. चैंबर ने कहा कि जियाडा के नियम उद्योगों के विकास को सुगम बनाने वाले तथा जटिलताओं से मुक्त होने चाहिएं.जियाडा एमडी वरुण रंजन ने अपनी टीम के साथ प्रत्येक प्रावधान पर धैर्य पूर्वक सुझाव सुने और आश्वस्त किया कि सभी सुझावों को रेगुलेशंस अंतिम रूप देते समय गंभीरता से शामिल किया जाएगा. बैठक सकारात्मक एवं रचनात्मक वातावरण में संपन्न हुई तथा निरंतर संवाद के माध्यम से औद्योगिक विकास को गति देने पर सहमति बनी.




