जमशेदपुर : जमशेदपुर व्यवहार न्यायालय के पूर्व जज आरपी रवि पर कातिलाना हमला मामले में 14 साल बाद बुधवार को पूर्व जज आरपी रवि और उनकी पत्नी वीरा भारती का वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से गवाही हुई. लेकिन दोनों की क्रास एग्जामिनेशन नहीं हो पायी. बचाव पक्ष के वकील विद्या सिंह ने अदालत से क्रास एग्जामिनेशन के लिए समय मांगा. अदालत ने 26 अगस्त को क्रास एग्जामिनेशन के लिए तिथि मुकर्रर की हैं. इस मामले की सुनवाई एडीजे-4 राजेंद्र कुमार सिन्हा की अदालत कर रही हैं. पूर्व जज आरपी रवि ने कोर्ट में गवाही के दौरान अखिलेश सिंह पर फायरिंग में शामिल होने का संदेह जताया. हालाकिं उन्होंने पूर्ण रुप से अखिलेश सिंह द्वारा गोली मारने की बात नहीं कही. उन्होंने कहा कि वे 20 मार्च 2008 की सुबह 9 से 10 बजे के बीच बाजार से फल व सब्जी लेकर घर लौट रहे थे. आबकारी विभाग के कार्यालय के पास सड़क पार करने के दौरान दो बाइक से दो युवक पहुंचे और उनके कान और आंख के नीचे गोली मार दी. बदमाशों ने उनके छाती के दाहिने साइड कांख के नीचे और दाहिने हाथ व जांघ में एक-एक गोली मारी, जिसके बाद वे गिरकर बेहोश हो गये. किसी ने पत्नी को सूचना दी. पत्नी पहुंची और टेंपो से टीएमएच अस्पताल पहुंचाया. गोली किसने चलाई उसे मैं देख नहीं सका और ना ही पहचान सका. वर्ष 2006 में उन्होंने अखिलेश सिंह को जेलर हत्याकांड में सजा सुनाया था. हालांकि, उसके बाद कभी भी तीन साल तक ना तो अखिलेश सिंह से मुलाकात हुई और ना ही टेलीफोन पर बातचीत हुई. इसके अलावा किसी व्यक्ति ने अखिलेश सिंह के नाम पर मुझसे मिलने का भी कोशिश नहीं की. दूसरी ओर, पत्नी वीरा भारती ने कहा कि घटना सुबह करीब साढ़े दस से 11 बजे के बीच हुई. एक व्यक्ति ने घर पहुंचकर बताया कि साहब को कुछ हो गया है. जब घटनास्थल पर पहुंचे तो पति बैठे हुए थे, जिसके बाद टेंपो से उन्हें टीएमएच पहुंचाया. बदमाश ने उन्हें कुल पांच गोली मारी थी. इस मामले में बचाव पक्ष के अधिवक्ता विद्या सिंह ने कोर्ट में अर्जी दाखिल कर कहा कि चूंकि इस मामले में अचानक से दोनों की गवाही कोर्ट में करायी गई है इसलिए गवाहों को दस्तावेज के आधार पर जिरह करना है इसलिए दस्तावेज के बिना क्रास एग्जामिनेशन किया जाना संभव नहीं हैं. अदालत ने अर्जी पर सुनवाई के बाद 26 अगस्त को क्रास एग्जामिनेशन के लिए तिथि मुकर्रर की हैं. मामला 20 मार्च 2008 की है. उस दौरान जज आरपी रवि सेवानिवृत्त के बाद स्थायी लोक अदालत के अध्यक्ष के रूप में जमशेदपुर में ही पदस्थापित थे. अभियोजन पक्ष से अपर लोक अभियोजक राजीव कुमार मौजूद थे जबकि बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता प्रकाश झा और विद्या सिंह कोर्ट में पैरवी कर रहे हैं. मालूम हो कि बाइक सवार अपराधियों ने जमशेदपुर के साकची थाना क्षेत्र स्थित पुराना जेल चौक के पास स्थित आबकारी विभाग के कार्यालय के पास पूर्व जज आरपी रवि को गोली मारी थी. वारदात को अंजाम देने के बाद हमलावर फरार हो गये थे. इस मामले में पुलिस की जांच में अखिलेश सिंह, मनोरंजन सिंह लल्लू, बंटी जायसवाल और रितेश राय की संलिप्तता पायी गई थी. इस मामले में मनोरंजन सिंह लल्लू, बंटी जायसवाल और रितेश राय का अलग मामला चल रहा है. हालांकि दोनों मामले में बुधवार को कोर्ट में गवाही हुई है. वैसे आपको बता दें कि जज आरपी रवि केस को ही सबसे महत्वपूर्ण केस माना जाता है, जिसमें अखिलेश सिंह को सजा भी हो सकती है, लेकिन आरपी रवि की गवाही ने एक बार फिर से मामले को चर्चा में डाल दिया है.






