
जमशेदपुर : जमशेदपुर एक ऐसा जिला है, जहां स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता खुद रहते है. इस जिले के एमजीएम अस्पताल को सुधारने के लिए खुद स्वास्थ्य मंत्री ने लगातार बैठकें की है. स्वास्थ्य सचिव आ चुके है. विधायक सरयू राय जा चुके है, लेकिन अस्पताल की हालत है कि सुधरने का नाम नहीं ले रहा है. यह भी जान लें कि अस्पताल में स्वास्थ्य मंत्री का प्रतिनिधि भी बैठते है, लेकिन हालत जस की तस है. सोमवार को ऐसी घटनाएं हुई, जो व्यवस्था की पोल खोलती है और आपको भी दुखी कर देगा. (नीचे पूरी खबर पढ़ें)

केस 1
ऊपरवाला कैसे-कैसे खेल इंसानों को दिखाता है. एक कहावत है न कि राम की माया राम ही जाने. ऊपर वाले का ऐसा ही एक माया जमशेदपुर में देखने को मिला. जहां को कोल्हान के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में प्रसव पीड़ा से ग्रसित एक महिला अपने साथ अपने 5 वर्षीय बेटे को लेकर पहुंची, लेकिन उसे यह नहीं पता कि गायनिक वार्ड या लेबर रूम कहां है. वह दर्द के मारे कराह रही थी. इसी बीच एक पत्रकार की नजर उस पर पड़ गई. पत्रकार ने अस्पताल में मौजूद स्वास्थ्यकर्मियों को महिला की हालत से अवगत कराया, लेकिन तब-तक काफी देर हो चुका था. प्रसव पीड़ा महिला झेल ना सकी, और उसकी मौत हो गई. महिला सिदगोड़ा थाना क्षेत्र के बागुनहातु स्थित भारत सेवाश्रम संघ के आसपास की रहने वाली बताई जा रही है. पत्रकार ने अस्पताल में मौजूद पुलिस शिविर में मौजूद पुलिसकर्मियों को महिला के साथ आए उसके 5 वर्षीय मासूम को सौंप दिया. फिलहाल एमजीएम पुलिस शिविर में मौजूद जवान अपने वरीय पदाधिकारियों को सूचित करते हुए बच्चे को लेकर अपने साथ उसके घर रवाना हो गए हैं. बच्चे को यह नहीं पता, कि उसकी मां अब इस दुनिया में नहीं है. (नीचे पूरी खबर पढ़ें और देखे वीडियो)
केस 2
प्रसव पीड़ा से कराहती रिंकी को एमजीएम अस्पताल की गेट से प्रसूति विभाग तक मजबूरन पत्रकार और छायाकार अमजद को गोद उठाकर पहुंचाना पड़ा. टेंपो वाला महिला को एमजीएम की गेट पर छोड़कर चला गया था और गेट पर कोई स्ट्रेचर नहीं था. कोई उठाने वाला तक नहीं था. पत्रकार अमजद ने इंसानियत को बचाने की कोशिश की और तत्काल महिला को गोद में उठाया और उसको चिकित्सक तक पहुंचाया. इतने बड़े अस्पताल की क्या व्यवस्था थी इसकी पोल खुल गयी और पत्रकार ने उसको मदद पहुंचायी, इसके लिए पत्रकार को सलाम. (नीचे पूरी खबर पढ़े)

केस 3
जमशेदपुर : कोल्हान के सबसे बड़े अस्पताल जमशेदपुर के एमजीएम अस्पताल के गायनिक वार्ड में बड़ी लापरवाही सामने आई है. लापरवाही ने एक माँ और नवजात बच्चे की जान ले ली. परिवारवालों के मुताबिक, भालूबासा हरिजन बस्ती निवासी बिमल मुखी की पत्नी गुड्डी मुखी गर्भवती थी और बच्चा होने वाला था. उसको प्रसव पीड़ा होने पर रविवार को एमजीएम अस्पताल में ले जाया गया जहां उसको गायनिक वार्ड और लेबर रूम में रखा गया. परिवार के लोगों का आरोप है कि जब लड़की प्रसव पीड़ा से गुजर रही थी तब उसका रक्त बहता रहा था लेकिन कोई उसको नही देख रहा था. जब परिजन डॉक्टर और नर्स पर दबाव बनाते कि गुड्डी मुखी को देखा जाए तो उसको देखा तक नही गया और अंततः सोमवार की सुबह महिला की हालत खराब हो गई और सुबह छह बजे बच्चे और कुछ ही अंतराल में माँ की मौत हो गई. इसके बाद परिजनों ने हंगामा किया और ऐसे लापरवाह डॉक्टर और नर्स पर कार्रवाई करने की मांग की. परिजनों का आरोप है कि डॉक्टर और नर्स मोबाइल देखते रहे लेकिन दर्द से तड़प रही महिला को नही देखा, जिसके कारण महिला की मौत हो गयी. (नीचे पढ़े पूरी खबर)

केस 4-एमजीएम अस्पताल में भर्ती महिला का बैग चोरी, नगद समेत जरूरी कागजात भी साथ ले गया चोर
कोल्हान के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल महात्मा गांधी मेमोरियल अस्पताल में भर्ती कदमा निवासी संजू देवी का सोमवार सुबह बैग चोरी हो गया. घटना के समय संजू देवी अपने बेड में सोई हुई थी. जब उनकी नींद खुली तो देखा की उनका बैग गायब है. उन्होंने अस्पताल के नर्स और आस पास के मरीजों से पूछताछ की पर किसी को पर्स के बारे में कुछ नही पता था. संजू देवी ने बताया कि वो कदमा में रहती है और 9 जुलाई से अस्पताल में इलाजरत है. वो अपने साथ एक बैग रखती है. आज सुबह 7 बजे जब वह उठी तो बैग उनके पास नहीं था, किसी ने बैग की चोरी कर ली. बैग में दो हजार रुपए नगद के अलावा इलाज से संबंधित कागजात भी मौजूद थे. (नीचे पूरी खबर पढ़ें)

भाजपा ने उठाये सवाल
भाजपा के नेता और पूर्व जिला अध्यक्ष देवेंद्र सिंह ने कहा कि जमशेदपुर एमजीएम अस्पताल में इलाज के अभाव में हरिजन महिला एवं उसके बच्चे की मौत डॉक्टरों एवं एमजीएम प्रबंधन की घोर लापरवाही से हो गई, जिसकी घोर शब्दों में निंदा करते हैं. ज्ञातव्य है कि भालूबासा की हरिजन गर्भवती महिला एमजीएम अस्पताल में एडमिट थी, रात भर प्रसव एवं पीड़ा से परेशान थी, लेकिन कोई भी डॉक्टर उसे देखने तक नहीं गया, उसका रक्त बहता गया. गार्जियन बिलखते रहे, रोते रहे, बचा लो, लेकिन डॉक्टरों एवं एमजीएम प्रशासन की घोर लापरवाही से हरिजन महिला एवं उसका नवजात शिशु का देहांत हो गया. देवेंद्र सिंह ने मांग की है कि एमजीएम प्रबंधन एवं डॉक्टर और स्वास्थ्य मंत्री पर अपराधिक मुकदमा दर्ज होना चाहिए क्योंकि पीड़ित परिवार के लोग स्वास्थ्य मंत्री से भी मिलने का प्रयास किया. फोन पर बात करने का प्रयास किए लेकिन किसी प्रकार का रिस्पांस नहीं दिया गया.




