जमशेदपुर: जमशेदपुर के एमजीएम अस्पताल के जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र विभाग में लंबे समय से लंबित पड़े प्रमाणपत्रों को लेकर मंगलवार को जमकर हंगामा हुआ. सुरक्षा कर्मियों के हस्तक्षेप और अस्पताल के उपाधीक्षक के समझाने के बाद मामला शांत हुआ. सोनारी निवासी सुरबाला देवी ने बताया कि वह पिछले दो वर्षों से अपने बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के लिए अस्पताल के चक्कर लगा रही हैं. कई बार आने के बावजूद हर बार उन्हें कुछ दिनों बाद आने की बात कहकर लौटा दिया जाता है. वहीं, लीलावती कुंभकार ने बताया कि उन्होंने जनवरी में आवेदन किया था, लेकिन अब तक प्रमाण पत्र जारी नहीं किया गया. इसी तरह माजबीन आफरीन ने भी जनवरी में आवेदन करने के बावजूद जन्म प्रमाण पत्र नहीं मिलने की शिकायत की. सिर्फ जन्म प्रमाण पत्र ही नहीं, बल्कि मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने में भी लापरवाही के आरोप सामने आए. मुटुक महतो के परिजनों ने बताया कि 15 जनवरी को उनकी मृत्यु हुई थी, लेकिन अब तक मृत्यु प्रमाण पत्र जारी नहीं किया गया. उनका कहना है कि उन्हें भी बार-बार अस्पताल के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं. (नीचे भी पढ़ें)
अस्पताल पहुंचे कई अन्य लोगों ने भी इसी तरह की परेशानियां बताईं. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब एक आवेदक आवेदन पत्र भरने में मदद मांगने कर्मचारी के पास पहुंचा. सहयोग नहीं मिलने पर दोनों के बीच बहस हो गई. इसके बाद लंबे समय से प्रमाण पत्र के लिए भटक रहे अन्य आवेदक भी विरोध में शामिल हो गए और विभाग में हंगामा शुरू हो गया. स्थिति बिगड़ने पर सभी आवेदक अस्पताल के उपाधीक्षक के पास पहुंचे. उपाधीक्षक ने शिकायतें सुनने के बाद संबंधित कर्मचारी को तलब कर पूरे मामले की जानकारी ली. उन्होंने निर्देश दिया कि सभी लंबित जन्म एवं मृत्यु प्रमाण पत्रों का समय पर निष्पादन सुनिश्चित किया जाए और किसी भी आवेदक को अनावश्यक रूप से परेशान न किया जाए. आश्वासन के बाद मामला शांत हो गया. सूत्रों के अनुसार, अप्रैल महीने से प्राप्त आवेदनों का निपटारा एक सप्ताह के भीतर किया जा रहा है. यह व्यवस्था उपायुक्त के निर्देश पर अस्पताल के पूर्व उपाधीक्षक डॉ जुझार माझी के कार्यकाल में शुरू की गई थी. हालांकि, छह माह या उससे अधिक समय से लंबित आवेदनों के मामलों में अब भी लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.




