जमशेदपुर: झारखंड की स्वास्थ्य शिक्षा व्यवस्था को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है. एमजीएम मेडिकल कॉलेज जमशेदपुर द्वारा एमबीबीएस की सीटों की संख्या 100 से बढ़ाकर 150 करने के लिए नेशनल मेडिकल कमीशन के समक्ष प्रस्तुत प्रस्ताव को लेकर बुधवार को दिल्ली से आई दो सदस्यीय निरीक्षण टीम ने कॉलेज एवं अस्पताल का गहन निरीक्षण किया. यह निरीक्षण राज्य के सबसे पुराने सरकारी मेडिकल कॉलेज की सुविधाओं, मानव संसाधन, मरीजों की संख्या, संचालन व्यवस्था और अकादमिक आधारभूत संरचना को परखने के उद्देश्य से किया गया. निरीक्षण टीम ने सबसे पहले कॉलेज परिसर और अस्पताल की भौतिक एवं चिकित्सा सुविधाओं का अवलोकन किया. नवनिर्मित सुपर स्पेशलिटी अस्पताल भवन, आईसीयू, ओपीडी, ओटी (ऑपरेशन थिएटर), रेडियोलॉजी, पैथोलॉजी और अन्य विभागों की अत्याधुनिक चिकित्सा व्यवस्थाओं की बारीकी से जांच की गई. इसके साथ ही मरीजों की संख्या, बिस्तर की उपलब्धता, दैनिक ओपीडी रजिस्ट्रेशन और इमरजेंसी सेवा के संचालन का आंकलन किया गया. (नीचे भी पढ़ें)

निरीक्षण का सबसे महत्वपूर्ण चरण देर रात तक चला, जब एनएमसी टीम ने कॉलेज के शैक्षणिक ढांचे की बारीकी से जांच की. एक-एक प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर, रेजिडेंट डॉक्टर, पैरा मेडिकल स्टाफ और नर्सिंग स्टाफ की शैक्षणिक योग्यता, नियुक्ति पत्र, वेतन भुगतान प्रमाण और अन्य आवश्यक दस्तावेजों की समीक्षा की गई. कॉलेज प्रशासन द्वारा सभी दस्तावेज और विवरण प्रस्तुत किए गए.
झारखंड के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह मंजूरी? राज्य के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में मेडिकल शिक्षा की सीटें अब भी सीमित हैं. रांची (रिम्स), धनबाद, पलामू, हजारीबाग, दुमका और एमजीएम जमशेदपुर जैसे संस्थानों में सीमित सीटों के चलते हर वर्ष सैकड़ों योग्य विद्यार्थियों को राज्य से बाहर जाना पड़ता है. यदि एमजीएम को 50 अतिरिक्त सीटों की मंजूरी मिलती है, तो यह झारखंड के हजारों छात्रों के लिए वरदान साबित होगा. यह सिर्फ सीटों की बढ़ोतरी नहीं, बल्कि झारखंड में गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा, अधिक प्रशिक्षित डॉक्टरों की उपलब्धता, और ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करने की दिशा में एक दीर्घकालिक निवेश है.




