
जमशेदपुर : जमशेदपुर पूर्वी के विधायक सरयू राय ने अनूठी पहल की है. बसंत पंचमी के मौके पर सरयू राय ने जमशेदपुर पूर्वी के अपने विधानसभा के मुख्य कार्यालय बारीडीह में पूजा अर्चना की. इस मौके पर जमशेदपुर पूर्वी के विधायक सरयू राय ने भी पूरे निष्ठा भाव से विद्या की देवी सरस्वती की आराधना की और शांति सुख और संतुष्टि की कामना की. विधायक सरयू राय ने क्षेत्र के लोगों को दो सौगात दिए हैं. इसके तहत 5 रुपए में भरपेट भोजन और गरीब एवं निर्धन तबके के छात्र-छात्राओं के लिए मुफ्त ट्यूशन का प्रबंध किया है. (नीचे देखे पूरी खबर और वीडियो)
इसकी जानकारी देते हुए विधायक सरयू राय ने सबसे पहले अपने क्षेत्र के लोगों को बसंत पंचमी और सरस्वती पूजा की शुभकामनाएं दी. साथ ही उन्होंने दोनों योजनाओं की सौगात क्षेत्र के लोगों को देते हुए कहा इससे गरीब और जरूरतमंद लोगों को लाभ मिलेगा. सरयू राय ने बताया कि जमशेदपुर पूर्वी के कार्यालय में 5 रुपये में दाल, भात और सब्जी प्रत्येक दिन मिलेगा. सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक लोगों को खाना मिलेगा जबकि रविवार को सिर्फ दोपहर तक यह सेंटर चलेगा. इसके अलावा कार्यालय परिसर में शाम 4 बजे से शाम 7 बजे तक बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा दी जायेगी. 20 से 25 बच्चों को मुफ्त में वहां पढ़ाई होगी. श्री राय ने बताया कि अगले चरण में कार्यालय परिसर में एक चिकित्सक की सेवा दी जाएगी, जो लोगों को मुफ्त चिकित्सीय सलाह और इलाज दोनों करेंगे. (नीचे देखे पूरी खबर)

रघुवर दास के क्लीन चिट वाले बयान का सरयू राय ने किया विरोध
झारखंड के स्थापना दिवस समारोह 2016 में तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास की सरकार द्वारा किये गये भ्रष्टाचार की जांच के दिये गये आदेश की सराहना विधायक सरयू राय ने की है. श्री राय ने कहा कि एसीबी मामले की जांच करेगी. उन्होंने रघुवर दास द्वारा यह कहे जाने कि पहले विधानसभा में मुख्यमंत्री द्वारा क्लिन चिट दी जा चुकी है, इस पर कड़ी प्रतिक्रिया जाहिर की. उन्होंने कहा कि 2016 में राज्य स्थापना दिवस पर 5 लाख टॉफ़ी और टी शर्ट ख़रीदने तथा जमशेदपुर और रांची में सुनिधि चौहान का कार्यक्रम आयोजित करने में सरकारी ख़ज़ाना की लूट करने के आरोपों की जांच भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) से कराने की राज्य सरकार के निर्णय पर तत्कालीन मुख्य मंत्री रघुवर दास ग़लत बयान दे रहे हैं और भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं. (नीचे देखे पूरी खबर और वीडियो)
श्री राय ने कहा कि वे (रघुवर दास) कहते हैं कि इस मामले में उन्हें क्लीन चिट मिल चुकी है. वे खुद आधा सच बता रहे हैं और इसके लिये मुख्यमंत्री को ज़िम्मेदार ठहरा रहे हैं और जांच को राजनीतिक रंग दे रहे हैं. सरयू राय ने कहा कि वस्तुत: इस टॉफ़ी और टी शर्ट घोटाला की उच्चस्तरीय जांच कराने की अनुशंसा गत वर्ष मार्च 2021 में विधानसभा के बजट सत्र में सभा की अनागत प्रश्न क्रियान्वयन समिति ने सदन में प्रस्तुत अपने प्रथम अंतरिम जांच प्रतिवेदन में किया था. दिसंबर 2021 के शीत सत्र में सदन में प्रस्तुत दूसरे अंतरिम प्रतिवेदन में अनागत प्रश्न क्रियान्वयन समिति ने कहा था कि सरकार ने टॉफी, टी शर्ट की जाँच के दौरान, जो दस्तावेज समिति को उपलब्ध कराया है, वे फेंक यानी फ़र्ज़ी हैं. श्री राय ने यह भी बताया कि समिति की इस अनुशंसा के अतिरिक्त झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र 2021 में एक प्रश्न के उत्तर में सरकार ने सदन को सूचित किया कि 2016 में राज्य स्थापना दिवस समारोह के दौरान सुनिधि चौहान के कार्यक्रम आयोजन में अनियमितता पाई गई है. सरकार जांच के लिये तैयार है. सरयू राय ने कहा कि सदन निर्णय कर दे कि जांच एसीबी करे या सदन की समिति करे. सभा अध्यक्ष ने संसदीय प्रक्रिया के अनुरूप सरकार को सूचित किया कि इसकी जांच एसीबी से हो. इस नियमन के क़रीब एक माह बाद मुख्यमंत्री ने टॉफ़ी, टी शर्ट और सुनिधि चौहान के कार्यक्रम में हुई अनियमितता की जांच एसीबी से कराने का आदेश दिया है. विधायक सरयू राय ने कहा कि अब रघुवर दास को पता नहीं किसने भ्रम में डाल दिया है कि इस मामले में उन्हें क्लीन चिट मिल गई है. विधानसभा की जिस अनागत प्रश्न क्रियान्वयन समिति ने जांचोपरांत सदन में स्पष्ट प्रतिवेदन दिया है कि इस मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और कहा है कि सरकार ने इस मामले में जो दस्तावेज समिति के सामने दिया है वे फेक हैं, उस पांच सदस्यीय समिति में तीन सदस्य भाजपा के हैं और दो सदस्य झामुमो के हैं. समिति के सभापति भाजपा के हैं. समिति के तीन भाजपा सदस्यों में दो रघुवर दास के मंत्रिपरिषद में मंत्री रह चुके हैं. समिति में सभापति रामचंद्र चंद्रवंशी (भाजपा विधायक सह पूर्व मंत्री), सदस्य नीरा यादव (भाजपा विधायक सह पूर्व मंत्री), सदस्य मनीष जायसवाल (भाजपा विधायक) है जबकि इसमें दो और सदस्य झामुमो के विधायक मथुरा महतो और झामुमो के बहरागोड़ा के विधायक समीर मोहंती है. श्री राय ने सवाल किया कि क्या अब भी रघुवर जी कहेंगे कि उन्हें क्लीन चिट मिल गई है. इसके लिये मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर आरोप लगाने के बदले इन्हें अपने गिरेबान में झांकना चाहिये.






