
जमशेदपुर : जमशेदपुर के सीतारामडेरा थाना क्षेत्र में 9 नवंबर 2019 की सुबह टाटा लाइन गोलमुरी निवासी गुरचरण सिंह बिल्ला पर हुई फायरिंग मामले में बुधवार को पीड़ित गुरूचरण सिंह बिल्ला की क्रास एग्जामिनेशन पूरी हो गई. मामले की सुनवाई कर रहे जमशेदपुर कोर्ट के एडीजे -4 राजेंद्र कुमार सिन्हा की अदालत में बताया कि घटना के दिन प्रतिदिन की भांति पति – पत्नी मॉर्निंग वॉक के लिए सवा चार बजे घर से निकाल कर सीतारामडेरा जाने वाली रास्ते से गुरूद्वरा की ओर जाने लगे, जब दोनों कुछ दूरी पर पहुंचे कि एक सफेद रंग की बोलेरो कार करीब आया जिसमें गुरमुख सिंह मुखे बाये तरफ सीट पर बैठा था और अमरजीत सिंह अम्बे गाड़ी चला रहा था. देखकर गाड़ी मुड़ा कर चल दिया. उन्हे संदेह हुआ पर दोनों गुरूद्वरा की ओर चलने लगे, जब आदिवासी स्कूल के पास पहुंचे कि तीन मोटरसाइकिल पर दो -दो व्यक्ति आए दोनों को घेर लिए. जिनमे से एक ने पिस्तौल निकालकर सर में सटा दिया. हाथ से झटका मारने पर पिस्तौल गिर गया दोनों भागने लगे, उनकी पत्नी जान बयान के लिए आदिवासी स्कूल के गली होते हुए भागी. वह भी भागते हुए एक घर में घूसना चाहा लेकिन घर बंद था। अपराधियों ने पीछे से उन पर फायरिंग करने लगा तीन -चार राउंड फायरिंग किया, गोली उनकी सिर के बायी ओर लगी, दूसरी गोली हाथ के बीच अंगुली में लगी जो गोली अभी भी अंगुली मे फंसी हैं. तीसरी गोली कमर के पास रीढ़ की हड्डी के पास लगी और वही घर के बरामदे पर गिर गया. तबतक उनकी पत्नी भी रोती हुई पहुंच गई उनकी मोबाइल से फोन किया तो फोन भाई परमजीत सिंह ने उठाया उसे घटना की जानकारी देते हुए गाड़ी लेकर आदिवासी स्कूल के पास जल्दी से पहुंचने के लिए बोला. भाई परमजीत गाड़ी लेकर पहुंचा और उन्हें इलाज के लिए टीएमएच लेकर गया. जहां 6-7 दिनों तक इलाज चला. उन्होंने अदालत को बताया कि वर्ष 2011 से 2014 तक वह झारखंड सिंख प्रतिनिधि अध्यक्ष और टिनपलेट गुरूद्वारा का प्रधान भी था. सामाजिक कार्य को लेकर दोनों अमरजीत और गुरमुख सिंह मुखे खुन्नस थे. गुरमुख सिंह मुखे केन्द्रीय गुरूद्वारा समिति का प्रधान था. किसी न किसी बात को लेकर दोनों उनसे झगड़ा करते थे. अमरजीत सिंह ने घटना के एक वर्ष पूर्व देवगन बगान में उनके साथ हाथापाई किया था. अमरजीत का पगड़ी गिर गया था. (नीचे भी पढ़ें)
उसका पगड़ी और चाभी घर लेकर चला गया था. मामले में समझौता भी कर लिया था। तब से अंबे बस्ती में बोलते फिरते थे कि पगड़ी लेकर गया. उसे जब तक बदला नहीं ले लेता तब तक चैन से नहीं रहेगा. सुनने के बाद गुरूचरण ने हत्या कि आशंका से अपने वकील से मिला. विचार विमर्श के बाद एक इनफारमेटरी कोर्ट में दायर किया था. उन्होंने अदालत को बताया कि फायरिंग करने वालों की पहचान जेल में किया था. इसमें उत्तम पंडा और राजकिशोर महतो थे. क्रास एग्जामिनेशन के दौरान गुरूचरण सिंह बिल्ला से 80 से अधिक सबाल जबाव पूछा गया. यह भी पूछा गया कि वे कब – कब जेल गए थे. कितना मामले उन पर हुए थे. इस बात का उन्होंने स्वीकार किया कि पंजाब के नबा जेल में करीब साढ़े चार साल जेल में थे, लेकिन पहली बार कब जेल गए थे याद नहीं हैं. आर्म्स एक्ट के एक मामले में पांच साल का सजा भी हुआ था. नागालैंड से लिए गए आर्म्स के बारे में भी पूछताछ किया गया हैं. उल्लेखनीय है कि 9 नवंबर 2019 की सुबह सीतारामडेरा थाना क्षेत्र में गुरुचरण सिंह बिल्ला पर फायरिंग किया गया था. फायरिंग से गुरुचरण गंभीर रूप से जख्मी हो गया था. उस समय वह पत्नी गुरप्रीत कौर के साथ प्रतिदिन की भांति गुरूद्वरा के लिए निकला था. घर लौटने के क्रम में सीतारामडेरा आदिवासी स्कूल के पास अपराधियों ने गोली मारकर घायल कर दिया था. इस संबंध में पत्नी गुरप्रीत कौर के बयान पर गुरुमुख सिंह मुखे व अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था. पुलिस ने मामले में मानगो गुरुद्वारा के प्रधान गुरमुख सिंह मुखे, अमरजीत सिंह अंबे,उत्तम पंडा और राज किशोर महतो को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था.



