जमशेदपुर : 28 फरवरी को मां तापसी चौधरी ट्रेनी एयर होस्टेस मौसमी चौधरी की 31वीं जयंती मनायी गयी है. मौसमी जीवित होती तो कितनी धूम होती लेकिन मात्र 17 वर्ष की उम्र में ही वह असमय ही इस दुनिया से चली गई और आज भी मां का कलेजा फट जाता है. अपने खराब तबीयत की वजह से मां तापसी चौधरी ने सार्वजनिक जगह पर कई कार्यक्रम करने की बजाय इंडिया अंगेस्ट करप्शन के संयोजक राधाकांत ओझा के घर पर ही मौसमी के चित्र की पूजा कर, दीये जलाकर और शंख बजाकर श्रद्धांजलि दी. उन्होंने मरते दम तक न्याय की लड़ाई जारी रखने का संकल्प लिया. सामाजिक कार्यकर्ता राधाकांत ओझा ने भी मौसमी के चित्र पर फूल चढ़ाकर श्रद्धांजलि दी. (नीचे भी पढ़ें)

मौसमी कांड क्या है? – आहा संस्थान की ट्रेनी एयर होस्टेस मौसमी चौधरी को जमशेदपुर के मशहूर होटल सोनेट से 9 मई 2009 को संदिग्ध परिस्थितियों में टीएमएच लाया गया था जहां पहले आईसीयू फिर सीसीयू में इलाजरत रहने के बाद 20 मई को उसे मृत घोषित किया गया था. मां तापसी चौधरी ने बेटी के साथ होटल में दुष्कर्म कर हत्या का आरोप लगाया था. मां का कहना था कि मौसमी की हत्या 9 मई 2009 को होटल सोनेट में ही कर दी गई थी और टीएमएच में तत्कालीन टाटा स्टील के वीपी पार्थो सेन गुप्ता के दबाव पर जबरन मौसमी के शव को रखा गया था. बाद में 20 मई को टीएमएच प्रबंधन ने उसे मृत घोषित कर दिया था. मां का आरोप है कि होटल मालिक की पहुंच टाटा के अधिकारियों और पुलिस तक होने की वजह से पुलिस ने मामले की लीपापोती कर दी. बाद में हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर दो-दो बार सीबीआई जांच हुई लेकिन न्याय नहीं मिला. मां ने आरोप लगाया है कि रसूखदार आरोपियों की वजह से सीबीआई भी बिक गई. मां को न्यायालय पर भरोसा है. मां का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में प्राईवेट पार्टस पर चोट के निशान के जिक्र हैं जिसे देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को धारा 302 के तहत मां के बयान के आधार पर मामला दर्ज कर अनुसंधान के निर्देश दिए थे लेकिन सीबीआई ने लीपापोती की. उससे पहले पुलिस ने भी संदिग्ध हालत में भर्ती बताई गई मौसमी का न तो बयान लिया और न ही मेडिकल और अन्य जांच की. (नीचे भी पढ़ें)
डॉ प्रभात हत्याकांड से तार जुड़े
मां तापसी चौधरी का कहना है कि मौसमी कांड के तार टीएमएच की इमरजेंसी के तत्कालिक हेड डॉ प्रभात की हत्या से जुड़े हैं. मौसमी चौधरी की कथित तौर पर हत्या के छह महीने के भीतर टीएमएच की इमरजेंसी के हेड डॉ प्रभात की भी हत्या हो गई थी. मां का कहना है कि मौसमी को सबसे पहले टीएमएच के इमरजेंसी में लाया गया था जहां शव के दाखिले को डॉ प्रभात ने दाखिला लेने से इंकार कर दिया था. उसके बाद घटना को छुपाने के लिए तत्कालीन टाटा स्टील के वीपी पार्थो सेनगुप्ता के दबाव पर मौसमी को पहले आईसीयू और फिर सीसीयू में दाखिल कराया गया. तापसी चौधरी ने आरोप लगाया कि मौसमी किस हालत में टीएमएच लाई गई थी इसके अहम गवाह डॉ प्रभात थे जिस वजह से उनकी भी हत्या कर दी गई.
नहीं मिली सरकारी मदद : मां तापसी चौधरी को इस बात से तकलीफ हुई कि सरकारें आईं और गईं लेकिन किसी ने उनकी बेटी को न्याय दिलाने में कोई मदद नहीं की. तापसी चौधरी ने सरयू राय और रघुवर दास के उन बयानों की कटिंग आज भी सहेजकर रखी है जिसमें उनलोगों ने कहा था कि मौसमी हत्याकांड के तार डॉ प्रभात हत्याकांड से जुड़े हैं. उसके अलावा तमाम अन्य सबूतों को लिए वह 14 सालों से न्याय की लड़ाई लड़ रही है. (नीचे भी पढ़ें)
सीबीआई का दबाव- दुर्घटना मान लिया जाए : मां तापसी चौधरी ने आरोप लगाया कि सीबीआई लगातार दबाव बना रही है कि वह अपनी बेटी के साथ हुई घटना को दुर्घटना मान ले और वैसा ही गवाही दे. लेकिन मां तापसी चौधरी ने मरते दम तक न्याय के लिए लड़ने के संकल्प को दोहराया है.
20 मई को मृत घोषित लेकिन मां तापसी 9 मई को ही मनाती है पुण्यतिथि : भले ही टीएमएच प्रबंधन ने 20 मई 2009 को मौसमी को मृत घोषित किया लेकिन मां तापसी 9 मई को ही पुण्यतिथि मनाती है. तापसी कहती हैं कि वे मरते दम तक इस बयान पर कायम रहेंगी कि 09 मई को ही मौसमी के साथ होटल में दुष्कर्म कर हत्या कर दी गई थी और आईवाश करने के लिए होटल मालिक रवि पारिख और प्रबंधन के अन्य सदस्यों ने टाटा स्टील के तत्कालीन वीपी पार्थो सेनगुप्ता की मदद से मौसमी के शव को 11 दिनों तक टीएमएच में रखा गया था. वहीं बिष्टुपुर थाने में होटल प्रबंधन ने दुर्घटना का मामला दर्ज किया. जबकि तत्कालीन बिष्टुपुर थाना प्रभारी नीरज मिश्रा ने मौसमी कांड को लेकर कई दिनों तक न तो घटनास्थल का दौरा किया और न ही मौसमी की मां का बयान लेकर मामला दर्ज किया. तत्कालीन झारखंड हाई कोर्ट की चीफ जस्टिस ज्ञान सुधा मिश्र ने कर्तव्य में लापरवाही को लेकर नीरज मिश्रा को निलंबित करने के आदेश दिए थे.



