जमशेदपुर : प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना के तहत रविवार को स्थानीय गोपाल मैदान में दो दिवसीय प्रमंडल स्तरीय पीएम एफएमई महोत्सव का उद्घाटन हुआ. प्रदेश उद्योग, श्रम, नियोजन, प्रशिक्षण एवं कौशल विकास विभाग के मंत्री संदय प्रसाद यादव ने मुख्य अतिथि के रूप में महोत्सव का उद्घाटन किया. इस अवसर पर जिला परिषद अध्यक्ष बारी मुर्मू, राज्य के उद्योग सचिव अरवा राजकमल, सरायकेला के उपायुक्त रविशंकर शुक्ला, उद्योग निदेशक सुशांत गौरव, पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त अनन्य मित्तल, उप विकास आयुक्त अनिकेत सचान, धालभूम एसडीएम शताब्दी मजुमदार, डीएम डीआइसी रविशंकर प्रसाद भी उपस्थित रहे. (नीचे भी पढ़ें)

इस प्रमंडल स्तरीय समारोह में कोल्हान के तीनों जिलों के पीएमएफ़एमई की विभिन्न प्रकार की 50 से अधिक वित्त पोषित इकाइयों ने अपने उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई, जिनमें डेयरी प्रसंस्करण, मिलेट्स (रागी), मशरुम, अनाज प्रसंस्करण, खाद्य प्रसंस्करण एवं सीड कैपिटल से संबंधित इकाइयां शामिल हैं. इसमें उद्यमियों कीसुविधा के लिए आपूर्तिकर्ताओं ने खाद्य प्रसंस्करण मशीनरी उपकरणों का प्रदर्शन भी किया. मंत्री श्री यादव ने विभिन्न स्टॉलों का निरीक्षण कर उत्पादों की जानकारी लेने के साथ ही प्रदर्शों की सराहना भी की. (नीचे भी पढ़ें)

उद्घाटन समारोह में मंत्री संजय प्रसाद यादव ने उपस्थित जनसमुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि इस योजना का उद्देश्य खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में असंगठित रूप से कार्य कर रहे छोटे उद्यमियों को बढ़ावा देना एवं इस क्षेत्र में एक स्वस्थ प्रतिस्पर्धा का माहौल तैयार करना है. इसके के तहत राज्य के ऐसे उद्यमी, व्यक्ति अथवा समूह, जो छोटे स्तर पर अथवा बड़े स्तर पर खाद्य पदार्थों का उत्पादन करते हैं, अथवा खाद्य पदार्थों की पैकेजिंग करते हैं, उन्हें परियोजना लागत के 35% की दर से 10 लाख रु प्रति यूनिट की अधिकतम पूंजीगत अनुदान का प्रावधान किया गया है. (नीचे भी पढ़ें)

उन्होंने कहा कि इस के तहत किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ), किसान उत्पादक कंपनियों (पीएफसी), सहकारिता, स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) को परियोजना लागत के 35% की दर से तीन करोड रु (अधिकतम दस करोड रु) तक के पूंजीगत अनुदान का प्रावधान किया गया है. उन्होंने कहा कि राज्य के ऐसे एसएचजी, जो खाद्य पदार्थों का प्रसंस्करण करते हैं और उन्हें वर्किंग कैपिटल व छोटे-छोटे औजार खरीदने की जरूरत है, तो उन्हें इसके लिए आरंम्भिक तौर पर उनके फेडरेशन के स्तर पर प्रत्येक सदस्य को चालीस हजार रुपये की दर से पूंजी दिये जाने का प्रावधान किया गया है, जो व्यक्ति अथवा संस्था खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता के लिए उसका मानकीकरण और सुरक्षा मानकों का पालन करने के साथ पैकेजिंग और ब्रांडिंग भी करते हों, उन्हें भी इस योजना के तहत सहायता प्रदान करने का प्रावधान है.(नीचे भी पढ़ें)
श्री यादव ने बताया कि इस योजना के तहत अनुदान का प्रावधान टर्म लोन की राशि पर किया गया है. उन्होंने बताया कि वर्ष 2024-25 में राज्य में कुल 1638 पीएमएफएमई लोन स्वीकृत किये गए हैं, जिससे तीनों जिलों की 500 से अधिक इकाइयों की स्थापना हुई है. ऐसे सूक्ष्म उद्यमों के एक्सपोजर एवं सतत प्रोत्साहन के लिए ऐसे प्रमण्डल स्तरीय महोत्सव आयोजित किये जा रहे हैं. उन्होंने राज्य के निवासियों से राज्य में खाद्य पदार्थों का उत्पादन, पैकेजिंग, ब्रांडिंग करने का कार्य छोटे स्तर पर अधिक से अधिक संख्या में करने को कहा ताकि राज्य आत्म निर्भर हो सके. माननीय मंत्री ने कहा कि इस योजना का लाभ लेने के लिए आम जनता बैंकों के चक्कर न लगाए, इसके लिए जिले के डीआरपी के माध्यम से आवेदन करने एवं बैंक से ऋण मंजूर कराने में मदद की जा रही है. उन्होने बैंकों से भी आवेदनों की जांच में देर न करने एवं अच्छे आवेदनों को जल्द से जल्द स्वीकार कर भुगतान करने को कहा. उन्होने भरोसा जताया कि आनेवाले दिनों में झारखण्ड में फूड प्रोसेसिंग उद्योग से और भी बहुत सारे लोग जुड़ेंगे, और झारखण्ड छोटे-छोटे खाद्य प्रसंकरण उद्योगों के केंद्र के रूप में पूरे देश में जाना जायेगा.



