गालूडीह : घाटशिला प्रखंड अंतर्गत बनकाटी पंचायत के जगन्नाथपुर गांव में शुक्रवार को सरहुल (बाहा पर्व) मनाया गया. यहां आदिवासी रीति रिवाज के अनुसार पांच साल में एक बार नायके बाबा लखन हांसदा के द्वारा जाहेरगाड़ में बकरी, मुर्गा मुकी बलि दी जाती है. लखन हांसदा ने इस अवसर पर विशेष पूजा अर्चना की. नायके ने बताया कि बाहा पर्व तीन दिन तक मनाया जाता है. प्रथम दिन जाहेर दाप माह कहा जाता है. इस दिन पूजा स्थल जाहेर थान में छावनी बनाई जाती है और स्थल की तैयारी की जाती है. द्वितीय दिन बोंगा माह कहा जाता है. इस दिन ग्रामीण गांव के नायके (पुजारी) को उनके आंगन से नाच-गान के साथ जाहेर थान तक ले आते हैं. वहां पहुंचने पर नायके बोंगा दारी (पूज्य पेड़) सारजोम पेड़ (सखुआ पेड़) के नीचे पूजा स्थल का गोबर और पानी से शुद्धीकरण किया जाता है, जिसे गेह-गुरिह कहा जाता है. (नीचे भी पढ़ें)

वहीं, शाम को समाज की महिलाओं द्वारा आदिवासी नृत्य प्रस्तुत किया जाता है. नृत्य देखने के लिए ग्रामीणों की भीड़ उमड़ पड़ी. मौके पर नायके बाबा लखन हांसदा, माझी बाबा संजय हांसदा, जुगल हांसदा, सकला हांसदा, भादो हांसदा, बिमल मार्डी, पतित हांसदा, सोनिका मुर्मू, रायसेन सोरेन, सोनाराम किस्कू, चंदन सोरेन, दुर्गा हांसदा, सुरेश सोरेन, डॉक्टर हांसदा, चिरकुंडा मुर्मू, श्याम मुर्मू आदि उपस्थित थे.



