गालूडीह : अल नीनो के प्रभाव से इस वर्ष सामान्य से कम वर्षा होने की आशंका के बीच क्षेत्र के किसान धान के साथ-साथ वैकल्पिक फसल के रूप में मकई की खेती पर भी जोर दे रहे हैं. कम पानी में बेहतर उत्पादन और अपेक्षाकृत कम जोखिम होने के कारण मकई की खेती किसानों की पसंद बनती जा रही है. गालूडीह क्षेत्र के बड़ाखुर्शी, गिधिबिल, काशिया, कुलियाना, अमचुड़िया आदि गांवों के कई किसानों ने मकई की खेती की है. (नीचे भी पढ़ें)
किसानों का कहना है कि यदि समय पर पर्याप्त बारिश नहीं हुई तो केवल धान पर निर्भर रहना नुकसानदायक हो सकता है. ऐसे में कई किसानों ने अपने खेतों के एक हिस्से में मकई की बुआई शुरू कर दी है, ताकि मौसम की अनिश्चितता के बावजूद आय का एक विकल्प बना रहे. कृषि विशेषज्ञों का भी मानना है कि अल नीनो की स्थिति में कम पानी की आवश्यकता वाली फसलों को प्राथमिकता देना बेहतर रणनीति है. मकई के अलावा मोटे अनाज और दलहनी फसलों की खेती भी किसानों के लिए लाभकारी हो सकती है. वहीं, किसानों का कहना है कि बदलते मौसम को देखते हुए अब पारंपरिक खेती के साथ वैकल्पिक खेती अपनाना समय की जरूरत है. इससे फसल नुकसान का खतरा कम होगा और किसानों की आय भी अधिक सुरक्षित हो सकेगी.







