गालूडीह : गालूडीह थाना क्षेत्र अंतर्गत बाघुड़िया पंचायत के पहाड़ों के नीचे बसे गुड़ाझोर गांव के एक दिव्यांग किसान ने मेहनत के बल पर अपने खेतों में सब्जियों की खेती को कमाई का जरिया बनाया है. दिव्यांग किसान इंद्रनाथ सिंह ने बिना किसी सरकारी सहायता के खेती करके मिसाल कायम की है, जो अन्य किसानों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई है. (नीचे भी पढ़ें)

किसान इंद्रनाथ सिंह ने बताया कि उनके परिवार में पत्नी मिथिला सिंह और तीन बेटियां हैं. खेती से ही उनका परिवार चलता है, साथ ही बच्चों की पढ़ाई भी उसी के बल पर होती है. अपने परिवार की स्थिति को पटरी पर लाने के लिए दिव्यांग इंद्रनाथ सिंह ने खेती को ही स्वरोजगार के तौर पर चुना. उन्होंने बताया कि अपनी मेहनत के बल पर उन्होंने चार बीघा जमीन को खेती योग्य बनाया. सिंचाई के लिए कुएं का उपयोग किया. इस काम में पत्नी मिथिला सिंह ने भी सहयोग किया. फिर उक्त जमीन पर खेती शुरू की. अभी उनके खेतों में करेला, नेनुआ, टिंडा, कद्दू आदि लगे हुए हैं. अपने खेत में उगी सब्जियों को बेचने वे हाट व बाजारों में ले जाते हैं. (नीचे भी पढ़ें)

15 साल से दिव्यांग का नहीं बना प्रमाणपत्र
किसान इंद्रनाथ सिंह ने बताया कि वे विगत 15 वर्षों से दिव्यांगता से पीड़ित हैं. उनका एक पैर ठीक से काम नहीं करता. उन्होंने बताया कि विकलांगता प्रमाण पत्र बनवाने के लिए महीनों धक्के खाने पड़ रहे हैं. इंद्रनाथ ने बताया कि विकलांगता प्रमाण पत्र बनवाने के लिए वे घाटशिला अनुमंडल अस्पताल गये थे, लेकिन वहां चिकित्सकों ने उन्हें बताया कि उन्हें जमशेदपुर स्थित एमजीएम अस्पताल जाना पड़ेगा. (नीचे भी पढ़ें)

फिर एमजीएम अस्पताल जाने के बाद वहां सटीक जानकारी नहीं मिलने व दिव्यांगता प्रमाण पत्र कहां बनता है, यह समझ में नहीं आने के कारण उन्हें वापस घर लौट आना पड़ा. उन्होंने बताया कि दिव्यांगता प्रमाण पत्र नहीं रहने के कारण उन जैसे कई दुकानदारों को विभिन्न सरकारी योजनाओं से वंचित होना पड़ रहा है.





