जमशेदपुर : पटमदा प्रखंड की ओड़िया पंचायत अंतर्गत कांकू गांव में प्रस्तावित पत्थर खनन पट्टा को लेकर गुरुवार को आयोजित ग्राम सभा हंगामे की भेंट चढ़ गई. खनन के समर्थन और विरोध में ग्रामीण दो गुटों में बंट गए, जिसके कारण ग्राम सभा की कार्यवाही रद्द करनी पड़ी. ग्राम प्रधान मुचीराम मुर्मू की अध्यक्षता में आयोजित बैठक के दौरान माहौल तनावपूर्ण हो गया. स्थिति को देखते हुए प्रखंड विकास पदाधिकारी द्वारा प्रतिनियुक्त कनीय अभियंता अजय मंडल एवं पंचायत सचिव रामजी साव ने हस्तक्षेप कर दोनों पक्षों को समझाया और मामला शांत कराया. (नीचे भी पढ़ें)

ग्राम प्रधान मुचीराम मुर्मू ने बताया कि गांव के लगभग 70 प्रतिशत ग्रामीण कांकू मौजा में किसी भी प्रकार के खनन कार्य के पक्ष में नहीं हैं. उनका कहना है कि जिस भूमि के लिए खनन पट्टा की अनुमति मांगी गई है, वह आंगनबाड़ी केंद्र और आवासीय क्षेत्र से करीब 100 मीटर की दूरी पर स्थित है. ऐसे में खनन शुरू होने पर पर्यावरण एवं जनजीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है. उन्होंने बताया कि कुल 5 एकड़ 90 डिसमिल (करीब 18 बीघा) भूमि के लिए लीज आवेदन किया गया है. इसमें लगभग 12 बीघा भूमि दांदुडीह गांव के रैयतों की है, जबकि शेष भूमि कांकू गांव के करीब डेढ़ दर्जन परिवारों की है. संबंधित सभी रैयतों ने पांच वर्षों के लिए खनन कार्य हेतु अपनी सहमति दी है और वे परियोजना के पक्ष में हैं. (नीचे भी पढ़ें)
खनन का विरोध कर रहे ग्रामीणों में परमेश्वर मुर्मू, निर्मल मुर्मू, सोमनाथ मुर्मू, शिशिर मुर्मू, कमल टुडू एवं श्याम सुंदर बेसरा समेत अन्य लोगों ने कहा कि समीपवर्ती चिरूडीह गांव में संचालित खदानों के कारण क्षेत्र में पहले से कई समस्याएं उत्पन्न हो चुकी हैं. उनका आरोप है कि खदानों के प्रभाव से विद्यालयों में शिक्षकों की नियमित उपस्थिति प्रभावित होती है तथा सड़कों की स्थिति भी खराब हो गई है. उन्होंने कहा कि आजादी के 75 वर्ष बाद भी ग्रामीण कच्ची सड़कों पर आवागमन करने को मजबूर हैं. (नीचे भी पढ़ें)
वहीं खनन समर्थक ग्रामीण हरेसिंधु महतो, अतुल महतो, पुटूलाल महतो, अनिल महतो एवं जगदीश महतो का कहना है कि खनन कार्य शुरू होने से क्षेत्र के विकास को गति मिलेगी और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित होंगे. उनका आरोप है कि कुछ लोग निजी कारणों से परियोजना का विरोध कर रहे हैं, जिससे विकास कार्य बाधित हो रहा है. ग्राम सभा में किसी निष्कर्ष पर सहमति नहीं बन पाने के कारण खनन पट्टा से संबंधित प्रक्रिया फिलहाल अधर में लटक गई है.




