धालभूमगढ़: सोशल एक्टिविस्ट वेलफेयर एसोसिएशन ऑफ भारत के बैनर तले सम्पूर्ण देश के रक्तदान शिविर एवं रक्त उपलब्धता से जुड़े कार्यों में 21 राज्य एवं केन्द्र शासित प्रदेश का पहला अधिवेशन राज्य बिहार अन्तर्गत मिथिला के धरती जिला दरभंगा के तारामंडल में सम्पन्न हुआ.राज्य झारखंड के संयोजक स्वपन कुमार महतो एवं समन्वयक ललिता चौहान धनबाद से बनाए गए.राज्य संयोजक का स्मार पत्र एवं स्मारक देश का सर्वाधिक रक्तदानी कैप्टन डाक्टर सुरेश कुमार सैनी एवं पंजाब के नेतृत्व कर्ता द्वारा एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष डाक्टर दीपक कुमार महथा द्वारा मिथिला के प्रचलित गुलाबी पाग एवं पीला अंग वस्त्र भेंट कर सम्मानित किया.राज्य कार्यकारिणी सदस्य जिला पूर्वी सिंहभूम से अमिताभ महतो, बोकारो से मोहम्मद सब्बीर, जिला चतरा से विवेक कुमार आदि ऐसे आठ सदस्य वर्तमान विभिन्न जिलों से बनाए गए. ऐसे करके सम्पूर्ण देश में रक्तदान एवं समाज सेवा से जुड़े व्यक्तियों को प्रत्येक राज्य की एक कमेटी पहले चरण में बनाए गए.(नीचे भी पढ़े)
स्वपन कुमार महतो ने राष्ट्रीय अधिवेशन में अपने संबोधन में कहा कि युवा पीढ़ी नशा से दूर रहे एवं स्वस्थ युवा रक्तदान कार्य में बढ़-चढ़कर भाग ले और प्रत्येक स्वस्थ व्यक्ति मरणोपरांत अंग दान कर समाज हित में अपना योगदान निभाएं. उन्होंने कहा की किसी मरीज एवं एनिमिक थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों के लिए जितना जरूरी अस्पताल में चिकित्सा और दवाइयां होती है उतना ही आवश्यकता जरुरतमंदों को रक्त का है. समय पर रक्त तथा रक्त के घटक मिल जाए तो ज़िन्दगी बच जाती है, अगर यही नहीं मिल पाए तो सब कुछ समाप्त हो सकता है.रक्त की आवश्यकता को समझते हुए जिला पूर्वी सिंहभूम के धालभुमगढ के स्वपन कुमार महतो ने रक्तदान, प्लेटलेट दान तथा प्लाज्मा दान एवं मरणोपरांत अंग दान को अपने जीवन का मिशन बनाया है. वे अपने सहयोगियों के साथ मिलकर एक संगठन कुड़मी संस्कृति विकास समिति बना कर मुख्यतः झारखण्ड राज्य के जिला पूर्वी सिंहभूम, पश्चिम सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां, रांची, पश्चिम बंगाल के पुरूलिया, बांकुड़ा, झाड़ग्राम और ओडिशा के मयुरभंज एवं क्योंझर समेत अन्य स्थानों पर प्रतिवर्ष लगभग 100 के आसपास रक्तदान शिविर आयोजित करते हुए लगभग 10,000 इकाई तक रक्त संकलन करवा कर रक्तदान शिविर स्थल के निकटतम ब्लड बैंक में संग्रहित करवाते हैं.ताकि क्षेत्र में जरूरतमंद रोगियों और थैलेसीमिया तथा एनिमिक बच्चों को आवश्यकतानुसार रक्त उपलब्धता में मदद हो सके. श्री महतो के यह मुहिम केवल मात्र रक्तदान शिविर स्थल तक सीमित नहीं है,बल्कि जरूरतमंद रोगियों को सम्पूर्ण झारखंड में किसी भी अस्पताल एवं इसके अलावा बिहार, छत्तीसगढ़, उत्तरप्रदेश, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, कर्नाटक, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, हरियाणा, दिल्ली के कुछ कुछ अस्पतालों में उन्होंने आवश्यकता अनुसार रोगियों को रक्त उपलब्ध करवाते रहे हैं. (नीचे भी पढ़े)
उन्होंने जहां जहां रक्तदान शिविर आयोजन करते हैं वहां के रक्तदाताओं व समाजसेवियों तथा रक्तदान शिविर आयोजकों को जोड़ कर एक व्हाट्सएप ग्रुप तैयार कर उस व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से रक्त मांग पत्र आते हैं एवं व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से ही जरूरतमंद रोगी को चिकित्साधीन अस्पताल से निकटतम ब्लड सेन्टर से रक्त उपलब्ध करवाते हैं. अभी वर्तमान में ऐसे 62 व्हाट्सएप ग्रुप वे संचालित करते हुए वे स्वयं अपने तत्वावधान में क्षेत्र के जरूरतमंद रोगियों को समय पर उनके जरूरत के अनुसार निरंतर रक्त उपलब्ध करवा रहे हैं. झारखण्ड के मुख्यमंत्री से लेकर अभी तक कई जिलों में तथा कई अन्य राज्यों में अपने इस निस्वार्थ सेवाभाव के लिए प्रशस्ति पत्र, मोमेंट्स से सम्मानित किए जा चुके हैं. जनमानस को उनके इस निस्वार्थ सेवा सत्कर्म भाव से प्रेरणा लेकर उनके इस मुहिम में यथासंभव सहयोग करना चाहिए. ताकि समाज के अन्तिम वर्ग तक यह रक्तक्रांति पहुंचे और कोई भी चिकित्सधीन व्यक्ति एवं सिकल सेल थैलेसीमिया बच्चें कम से कम रक्त के अभाव में अपने प्राणों से हाथ न धोए.क्षेत्र में श्री महतो को ब्लड मैन तो कोई कोई ब्लड बैंक के नाम से जानते हैं. श्री महतो ने बताया की यह सम्मान उनका नहीं बल्कि संगठन से जुड़े सभी सदस्य और सभी रक्तदाताओं का सम्मान है और ये सभी सम्मान एवं प्रशस्ति पत्र उनके सहयोगियों एवं रक्तदानियों को समर्पित है.




