जादूगोड़ा : यूरेनियम नगरी जादूगोड़ा की बेटी मेघा महापात्र ने एनआइटी जमशेदपुर में शोध कर पेटेंट प्राप्त किया है. शोध क्षेत्र में पेटेंट को अत्यंत विरल उपलब्धि माना जाता है. यहां बताते चलें कि गालूडीह कॉलेज में प्रोफेसर के पद पर सेवा देते हुए हर दिन अपना रूटीन वर्क करने के पश्चात एनआइटी जमशेदपुर जाकर शोध करती थी. उनका पेटेंट राष्ट्रीय स्तर पर भारत सरकार द्वारा प्रकाशित किया गया है जिसमें राजमार्ग पर द्रुत गति से जानेवाले वाहन में भी निरंतर कम्युनिकेशन के लिए सहायक होगा. मेघा महापात्र ने अपनी एनआइटी प्रोफेसर व शोधकर्ता के साथ मिलकर एक ऐसे एंटिना का निर्माण किया है, जो आनेवाले दिनों में स्वचालित कार क़ो चलाने के लिए उपयोगी सिद्ध होगा. बतौर गृहिणी अपने सारे काम निपटाने एवं परिवार के झंझटों से समय निकालकर अध्ययन करना और इस तरह सफलता प्राप्त कर मेघा ने जादूगोड़ा में नारी सशक्तीकरण का अनुकरणीय उदहारण प्रस्तुत किया है. (नीचे भी पढ़ें)
क्या है खासियत शोध की
बहुत तेजी के साथ-साथ अत्यंत भरोसेमंद संचार की जरूरत वाले स्वचालित वाहन के लिए 20 GHz से 60 GHz की mmWave आवृत्ति पर काम करने वाला एंटिना हैं. एनआइटी जमशेदपुर में मेघा महापात्र के द्वारा विकसित यह नया एंटिना किसी भी वाहन की सतह पर लगाया जा सकता है, क्योंकि यह “सब्सट्रेट-स्वतंत्र” है. इसमें “सूरज के आकार” की एक विशेष संरचना दी गई है जो सिग्नल के बीच होने वाले गाड़ी के पूर्जे में इस्तेमाल होनेवाली ग्लास, फाइबर, एबीएस इत्यादि का इस्तेमाल कर इस प्रकार का एंटीना पहली बार तैयार हुआ है. इसमें गाइड़ प्रोफेसर डॉक्टर सुरजीत कुण्डू के निर्देशन में एनआइटी जमशेदपुर ने सफलता प्राप्त की है. इस सफलता पर एनआइटी जमशेदपुर के निदेशक डॉ गौतम सूत्रधर ने खुशी जाहिर करते हुए पूरी टीम को बधाई दी है. इस शोध में जादूगोड़ा की बेटी सह प्रोफेसर मेघा महापात्र के साथ प्रो अरविंद कुमार, धीरज पांडे और सुरजित कुंडू की टीम ने अहम भागीदारी निभाई है. मेघा महापात्र की मानें तो इस नये एंटेना में “सूरज के आकार” की एक विशेष संरचना दी गई है जो सिग्नल के बीच होने वाले व्यवधान को कम करती है. यह तकनीक वाहन-से-वाहन, वाहन-से-इन्फ्रास्ट्रक्चर और 5G संचार में बहुत उपयोगी साबित होगी. संस्थान के निदेशक ने इस उपलब्धि पर शोधकर्ताओं को बधाई दी है. जादूगोड़ा की मेघा महापात्र यूसिल में कार्यरत मनोज क़र की पत्नी हैं.







