पोटका / जमशेदपुर : मासिक धर्म स्वच्छता और सतत विकास संबंधी व्यवहारों को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, मणिपाल टाटा मेडिकल कॉलेज (एमटीएमसी), जमशेदपुर के आउटरीच विभाग द्वारा, मणिपाल फाउंडेशन, बेंगलुरु के सहयोग से संचालित सीएसआर पहल के अंतर्गत पोटका केजीबीवी की सभी छात्राओं को पुनः उपयोग योग्य एवं जैव-अवक्रमणीय सैनिटरी नैपकिन वितरित किए गए. इस पहल से केजीबीवी पोटका की कुल 525 छात्राएं लाभान्वित हुईं. इस कार्यक्रम का उद्देश्य किशोरियों को सुरक्षित एवं पर्यावरण-अनुकूल मासिक धर्म स्वच्छता उत्पाद उपलब्ध कराकर उन्हें सशक्त बनाना, साथ ही उनके उचित उपयोग एवं पर्यावरण के अनुकूल निपटान के तरीकों के बारे में जागरूक करना था. कार्यक्रम के अंतर्गत किशोरियों के बीच जैव-अवक्रमणीय सैनिटरी नैपकिन का वितरण किया गया तथा उनके लिए सहभागितापूर्ण प्रशिक्षण सत्र भी आयोजित किए गए. इन सत्रों में सैनिटरी उत्पादों के सही उपयोग एवं सुरक्षित निपटान का प्रदर्शन किया गया, साथ ही मासिक धर्म स्वास्थ्य एवं स्वच्छता से संबंधित जागरूकता व्याख्यान भी आयोजित किए गए. (नीचे भी पढ़ें)

पुनः उपयोग योग्य, जैव-अवक्रमणीय सैनिटरी नैपकिन के बारे में : वितरित किए गए सैनिटरी नैपकिन कपास एवं केले के पेड़ के तने के रेशों से निर्मित हैं तथा इन्हें साधारण धुलाई एवं धूप में उचित रूप से सुखाने के बाद पुनः उपयोग किया जा सकता है. विशेषज्ञों के अनुसार इन नैपकिनों की उपयोग अवधि लगभग 3 वर्ष तक होती है तथा यह वर्तमान में प्रचलित डिस्पोजेबल सैनिटरी नैपकिनों के उपयोग के लिए एक स्थायी एवं पर्यावरण-अनुकूल विकल्प प्रदान करते हैं. यह पहल न केवल किशोर स्वास्थ्य के एक महत्वपूर्ण पहलू को संबोधित करती है, बल्कि पर्यावरण-अनुकूल मासिक धर्म उत्पादों के उपयोग को बढ़ावा देकर सतत विकास लक्ष्यों के अनुरूप भी कार्य करती है. इससे युवा बालिकाओं के बीच जागरूकता, गरिमा एवं पर्यावरणीय उत्तरदायित्व की संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा. यह कार्यक्रम सामुदायिक कल्याण, जनस्वास्थ्य शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाओं में सतत विकास को बढ़ावा देने के प्रति एमटीएमसी की निरंतर प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है.







