
घाटशिला: सूर्य मंदिर विकास परिषद कमेटी की और से सारी तैयारियां पूरी कर ली गई है. गुरुवार को सूर्य मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा के लिए राजस्थान से पहुंचे पुजारियों ने मंत्रोच्चारण कर पूजा की. मंदिर की प्राण -प्रतिष्ठा कार्यक्रम के पूर्व कलश यात्रा निकाली गयी. कलश यात्रा बाजार का परिभ्रमण कर मंदिर पहुंचकर कलश स्थापित कर पूजा की शुरूआत की गयी. कलश यात्रा में काफी संख्या में महिला और पुरूष उपस्थित थे. गुरुवार को गणपति आह्वान पंचाग पूजा के साथ कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ हुआ. शुक्रवार 30 अक्टूबर को मंडप पूजा षाड्स मातृका पूजा सुबह व रात्रि 8 से 10 बजे तक की जाएगी. रात्रि 10 बजे शैयाधिवास किया जाएगा. वहीं 31 अक्टूबर को सूर्य नारायण का महाभिषेक व प्राण-प्रतिष्ठा की जाएगी. पूर्णाहुति के बाद दोपहर 11.30 से 12.15 बजे तक प्रसाद वितरण किया जाएगा. प्राण-प्रतिष्ठा के लिए जमशेदपुर से राजस्थान निवासी पंडित पवन त्रिवेदी को आमंत्रित किया गया है.

साथ ही पूरे कार्यक्रम के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का भली-भांति पालन किया जा रहा है.कमेटी द्वारा सुवर्णरेखा तट पर 22 लाख की लागत से सूर्य मंदिर का निर्माण किया गया है, मंदिर की उचांई 70 फीट है. भगवान सूर्य की मूर्ति जयपुर से लाई गई है, 500 किलो के वियतनाम के मार्बल पत्थर को तराश कर बनायी गयी है. मंदिर का सारा कार्य स्थानीय कलाकार और मजदूरों द्वारा किया गया है. वहीं भगवान भास्कर के सात घोड़े बनाने का काम ऊपर बांदा निवासी मूर्तिकार दल गोविंद भगत ने किया है. सुवर्णरेखा के तट पर गोपालपुर छठ घाट के पास स्थित सूर्य मंदिर अपनी भव्यता के लिए जाना जाएगा.
हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल है सूर्य मंदिर

सूर्य मंदिर के लिए जमीन घाटशिला के नवाब अहमद शाह ने दान दी है. 2 नवंबर 2011 को इस मंदिर के निर्माण कार्य का भूमि पूजन विधायक रामदास सोरेन द्वारा किया गया था. 2013 में निर्माण कार्य शुरू हुआ,अप्रैल 2020 में मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा होनी थी लेकिन कोरोना संक्रमण के कारण इसे टाल दिया गया था. आज मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा शुरु की गयी.इस अवसर पर सूर्य मंदिर विकास परिषद के अध्यक्ष योगेन्द्र प्रसाद सिंह, सचिव रंजीत ठाकुर, कोषाध्यक्ष लक्ष्मीकांत प्यारेलाल, सुमन कश्यप, राम सिंहासन सिंह, सत्यनारायण जेन, अजीत पांडेय, किशोर सिंह, गणेश उदा, जनार्दन प्रसाद, सत्यनारायण पुष्टि, यीशु दंडपाठ, रविशंकर सिंह समेत अन्य उपस्थित थे.







