जादूगोड़ा: यूसिल में दवा आपूर्ति करने वाली आउट सोर्सिंग कंपनी केके फार्मा को बदलने की मांग उठने लगी है. तीन दिन गुज़र जाने के बाद भी मरीज बिना दवा के ही लौटने को विवश है. भूतपूर्व कर्मचारियों का कहना है कि एक दो महीने बाद यूसिल में दवा की आपूर्ति शुरू हुई, इसके बावजूद जुगसलाई के संवेदक केके फार्मा द्वारा दवा आपूर्ति ढंग से नहीं कर रही हैं. एक दवा मिलती है तो दूसरी का ठिकाना नहीं कब मिलेगा. ऐसे में गंभीर मरीजों की कभी भी मौत हो सकती है. ज्यादातर दवाइयां काउंटर से नदारत है. कर्मचारियों की मांग है कि केके फार्मा को बदलकर सेकंड लोअर को दवा आपूर्ति का ठेका दिया जाए ताकि मरीजों को नियमित रूप से दवा मिल सकें.(नीचे भी पढ़े)
विदित हो कि यूसिल में दवा आपूर्ति करने वाली आउट सोर्सिंग कंपनी केके फार्मा पहले दिन ही मरीजों को जीवनरक्षक दवा मुहैया कराने में असफल रही. जबकि टेंडर का ऑर्डर एक महीने पहले ही बीते 16 जून को यूसिल कंपनी प्रबंधन ने जुगसलाई निवासी केके फार्मा को ब्रांडेड दवा का आपूर्ति का ठेका सौंपा था. इस बाबत पूर्व यूसिल कर्मी अनिल चंद्र सिंह ने कहा कि दो महीने बाद यूसिल में दवा की आपूर्ति शुरू की गई. पहले दिन ही शुगर, खासी समेत कई जीवन रक्षक मामूली दवाइयां नहीं मिली. सिर्फ दवा की इंट्री की गई व 48 घंटे बाद मरीजों को दवा मुहैया कराने का आश्वासन देकर लौटा दिया गया. जबकि कई भूतपूर्व कंपनी कर्मी विभिन्न बीमारियों से ग्रसित है. उन्हें दवा की सख्त जरूरत है. पहले ही दिन अस्पताल में दवा की किल्लत से मरीजों को जूझना पड़ा. जबकि जादूगोड़ा यूसिल अस्पताल की दूरी मात्र जमशेदपुर से 40 मिनट का है. फिर भी दवा मुहैया कराने में 48 घंटे का वक्त ने मरीजों की परेशानी बढ़ा दी है.



