जादूगोड़ा : यूसिल की ओर से वर्ष 2009 में पिता की जगह पर पुत्र के नियोजन को लेकर कंपनी के तत्कालीन अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक रमेश गुप्ता ने कंपनी बोर्ड से वालंटियरी रिटायरमेंट स्कीम लागू की थी. यह स्कीम मजदूरों के पुत्रों के लिए किसी वरदान के कम नहीं थी. बाद में नौ साल बाद कंपनी प्रबंधन ने चालाकी करते हुए वर्ष 2017 के अगस्त माह में इस स्कीम को बंद कर दिया, जिससे इसके पूर्व से स्कीम के तहत लाइन में लगे 138 यूसिल कर्मियों के पुत्रों के यूसिल में नियोजन का मामला अटक गया. (नीचे भी पढ़ें)
उधर कंपनी प्रबंधन की इस मनमानी के खिलाफ झारखंड पीपुल्स पार्टी के संस्थापक सूर्य सिंह बेसरा व श्रवण कुमार ने पहले चाइबासा लेबर कोर्ट, फिर धनबाद कोर्ट में अपने वैधानिक अधिकार को लेकर लड़ाई जारी रखी. जिसका अंतिम फैसला आगामी 29 अक्टूबर को होना है. यदि फैसला मजदूरों के पक्ष में आता है तो 138 यूसिल कर्मचारी पुत्रों की कंपनी में नौकरी का मार्ग प्रशस्त हो जाएगा. इसके मद्देनजर कर्मचारी पुत्रों की निगाहें आगामी 29 अक्टूबर को होनेवाले कोर्ट के फैसले पर टिकी हुई हैं.




