जमशेदपुर : जमशेदपुर अनुसूचित जाति समन्वय समिति की ओर से शुक्रवार को साकची आमबगान से उपायुक्त कार्यालय तक मार्च निकाल कर अनुसूचित जाति वर्ग के लोगों को जाति प्रमाण पत्र शीघ्र जारी करने की मांग की गई. पद्मश्री मुकुंद नायक के नेतृत्व में आयोजित मार्च में शामिल नेताओं ने उपायुक्त को जाति प्रमाण पत्र बनाने में पेश आ रही परेशानियों की जानकारी देते हुए उन्हें इस संबंध में उत्तराखंड हाईकोर्ट एवं मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की ग्वालियर बेंच की ओर से जारी आदेशों का हवाला देते हुए अनुसूचित जातियों को शीघ्र जाति प्रमाण पत्र जारी किये जाने की मांग की गई. (नीचे भी पढ़ें)

जमशेदपुर अनुसूचित जाति समन्वय समिति की ओर से जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि अनुसूचित जाति वर्ग, जिसमें अनुसूचित जाति वर्ग के अंतर्गत आनेवाले धोबी, घासी, पासी, दुसाध, डोम, बाउरी, तुरी, चमार, भुइयां आदि समाज के सैकड़ों की संख्या में महिला एवं पुरुष आमबगान से पद्मश्री मुकुंद नायक के नेतृत्व में मार्च निकाल कर उपायुक्त कार्यालय पहुंचे. समिति का कहना है कि अनुसूचित जाति वर्ग की कुल 22 उपजातियों के छात्र-छात्राओँ, युवाओँ द्वारा जाति प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किये जाने पर उनसे झारखंड कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग के पत्र (संख्या 1754/25.02.2019) के आलोक में 10.08.1950 से पूर्व से आवेदक या उनके पूर्वजों के निवासित होने का प्रमाण मांगा जा रहा है.जबकि समिति का कहना है कि जमशेदपुर एक औद्योगिक शहर है जहां टाटा कंपनी के द्वारा कंपनी हित में दलित समाज के लोगों को बसाया गया है. (नीचे भी पढ़ें)

कहा गया है कि कम शिक्षित होने के कारण इस वर्ग की आर्थिक स्थिति हमेशा खराब रही है. उधर जमशेदपुर में अधिकांश जमीन टाटा स्टील, रेलवे या झारखंड सरकार की रही है जिन पर ही दलित समाज के लोग बस्ती बनाकर बसते गए. इसलिए उनके पास भूमि से संबंधित कोई कागजात नहीं हैं. मतदाता सूची भी 1952 के बाद ही बनी है और अन्य कोई दस्तावेज भी 1950 से पूर्व सरकार की ओर से जारी नहीं होते थे. इस कारण इस वर्ग के लोगों के पास कोई दस्तावेज नहीं हैं, जिसके कारण अभी उनका जाति प्रमाण पत्र नहीं बन पा रहा है और इसी के कारण इस वर्ग के छात्र-छात्राओं, युवाओँ एवं वृद्ध नागरिकों को शिक्षा, सरकारी-गैर सरकारी नौकरियों, केंद्र एवं राजय सरकार की योजनाओं आदि का लाभ नहीं मिल पा रहा है. इसको लेकर इस वर्ग के लोगों में भारी रोष है. (नीचे भी पढ़ें)

समिति ने इस आलोक में उपायुक्त से भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के द्वारा जारी पत्र (पत्रांक -आरएल-12017/3/2024-आरएल, सेल दिनांक16.06.25) के आलोक में देश के सभी नवगठित राज्य/संघ शासित प्रदेशों के मुख्य सचिव को उत्तराखंड उच्च न्यायालय एवं मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की ग्वालियर बेंच के द्वारा जारी फैसले के आधार पर नवगठित राज्य/संघ में पूर्ववर्ती राज्य के नागरिक जो उस राज्य से बनने वाले नवगठित राज्य की स्थापना के समय से निवासित अनुसूचित जाति के लोगों को जाति प्रमाण पत्र निर्गत कर उसे अनुसूचित जाति का लाभ दिये जाने के निर्देश से संदर्भित ज्ञापन सौंपते हुए उपायुक्त से उक्त आदेश का पालन करने एवं अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों एवं युवाओं के भविष्य के मद्देनजर उन्हें शीघ्र जाति प्रमाण पत्र जारी किये जाने की मांग की गई है. ज्ञापन में ऐसा नहीं होने पर जमशेदपुर से लेकर रांची तक संवैधानिक तरीके से आंदोलन शुरू करने की चेतावनी भी दी गई है.



