जमशेदपुर : जुगसलाई श्री राजस्थान शिव मंदिर में चल रही श्री शिव महापुराण कथा के पांचवें दिन, गुरुवार की कथा पवन काबरा द्वारा ब्यास पीठ के पूजन के साथ आरंभ हुई. आज कथा प्रसंग को आगे बढाते हुए कथा वाचक आचार्य विनयकांत त्रिपाठी ने कहा कि शिवलिंग का जिस दिन प्राकट्य हुआ वही दिन प्रदोष कहलाया. उन्होंने कहा कि सोमवार का व्रत सिर्फ सौभाग्यवती महिलाओं को ही करना चाहिए, कुमारी कन्याओं को नहीं. उन्होंने बताया कि ब्रह्म मुहूर्त में किया गया पूजन-अर्चन सर्वश्रेष्ठ फलदाई होता है. इसके साथ ही उन्होंने त्रिकाल संध्या का महत्व भी बताया. (नीचे भी पढ़ें)

आचार्य त्रिपाठी ने आगे बताया कि दिवा लग्न में किया गया वैवाहिक संबंध अति उत्तम होता है. वहीं गोधूलि बेला का विवाह भी श्रेष्ठ माना गया है. उन्होंने एकादशी एवं प्रदोष व्रत के संबंध में विस्तार से जानकारी दी. उन्होंने बताया कि श्रावण मास के प्रथम सोमवार से ही सोमवार का व्रत प्रारंभ करना चाहिए. उन्होंने भूतभावन भगवान् शिव के शरीर की विविधताओं के संबंध में अत्यंत महत्वपूर्ण जानकारी दी. आचार्य त्रिपाठी ने बताया कि चिंता चिता के समान होती है, इसलिए चिंता की जगह चिंतन कीजिये, भगवान आशुतोष का भजन कीजिए. उन्होंने बताया कि माता पार्वती के भगवान शिव के साथ विवाह के पश्चात विदाई के समय हिमालय राज की धर्म पत्नी महारानी मैना ने अपनी नव विवाहिता पुत्री को पतिव्रता नारी के रूप में अपने पति के साथ ससुराल में कैसे रहना है, इसकी सीख के बारे में जहां विस्तार से बताया, वहीं माता पार्वती की विदाई के प्रसंग का अत्यंत भावपूर्ण तरीके से वर्णन किया. उन्होंने बताया कि पति-पत्नी को एक दूसरे को नाम से नहीं पुकारना चाहिए, बड़े पुत्र का नाम लेकर नहीं बुलाना चाहिए, इसी तरह शिष्य को भी अपने गुरु का नाम नहीं लेना चाहिए. (नीचे भी पढ़ें)

उन्होंने कहा कि पतिव्रता नारी के क्या लक्षण होने चाहिएं, उसके बारे में में भी महत्वपूर्ण जानकारी दी. उन्होंने कहा कि विद्या तो स्कूलों में मिल जाती है, किंतु संस्कार हमेशा कथाश्रवण से ही प्राप्त होते हैं. आचार्य त्रिपाठी ने पितृवंश को खुश रखने के फायदे भी बताये. वहीं कथा-प्रसंग को आगे बढ़ाते हुए आचार्य त्रिपाठी ने भगवान् शिव के सुपुत्र भगवान् श्री कार्तिकेय के प्राकट्य एवं उनके जीवन चरित की सारगर्भित प्रस्तुति व्यासपीठ से प्रदान की गई. आज के कथा प्रसंग के अन्तर्गत प्रथम पूज्य भगवान् श्री गणेश के जन्म एवं उनके जीवन-वृत्त की जानकारी दी. (नीचे भी पढ़ें)

आज की कथा को सफलता पूर्वक संपन्न कराने में मंदिर कमेटी के अध्यक्ष छीतरमल धूत, महासचिव अरुण अग्रवाल, कोषाध्यक्ष दीपक अग्रवाल रामुका, सांवरलाल शर्मा, पवन काबरा, मनोज केडिया, विश्वनाथ शर्मा, पवन सिंगोदिया, कमल किशोर अग्रवाल, श्यामसुंदर चौधरी आदि सक्रिय रहे. इनके अलावा आज उपस्थित विशिष्ट लोगों में कुमुद अग्रवाल मेंगोतिया, श्रीमती गोविन्द दोदराजका, शकुन बजाज, सुशीला सावा, संतोष धूत, कमलेश अग्रवाल, रतनलाल अग्रवाल, प्रहलाद सारडा, गिरधारीलाल शर्मा, विनोद पारीक, पं पवन शर्मा, सुशील सर्वा, संजय गुप्ता आदि भी उपस्थित रहे.



