जमशेदपुर : कला, रंगमंच एवं साहित्य को समर्पित अखिल भारतीय संस्था संस्कार भारती की जमशेदपुर महानगर इकाई के तत्वाधान में आयोजित तीन दिवसीय सोहराई पेंटिंग कार्यशाला गुरुवार को संपन्न हो गई. बिष्टुपुर तुलसी भवन के चित्रकूट कक्ष में झारखंड की लुप्त होती पौराणिक ‘सोहराई’ पेंटिंग कला के संवर्धन के उद्देश्य से आयोजित इस कार्यशाला के समापन समारोह में मुख्य अतिथि सह संस्था के संरक्षक संदीप मुरारका ने प्रतिभागियों एवं प्रशिक्षकों को प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया. (नीचे भी पढ़ें)

संस्कार भारती की ओर से तुलसी भवन में आयोजित तीन दिवसीय सोहराई पेंटिंग कार्यशाला के आज तीसरे एवं अंतिम दिन समापन समारोह का आयोजन किया गया. इसमें मुख्य अतिथि संदीप मुरारका ने प्रतिभागियों को बताया कि कैसे सोहाराई पेंटिंग को अपनाकर वे अपनी कला को निखारने के साथ ही आर्थिक रूप से भी विकास कर सकते हैं. उन्होंने आगे दीपावली से पूर्व एक और कार्यशाला आयोजित कर मिट्टी के घड़े, गमले, दीये और कलश जैसे मिट्टी के सजावटी सामानों पर सोहराई पेंटिंग के माध्यम से सोहराई पेंटिंग को घर-घर पहुंचाने के बात कही. उन्होंने इसमें हर संभव सहयोग देने की बात भी कही.(नीचे भी पढ़ें)

संस्था की अध्यक्ष डॉ रागिनी भूषण ने ध्येय गीत की प्रस्तुति के पश्चात अपने स्वागत वक्तव्य में कार्यशाला की सफलता पर सभी प्रतिभागियों और संस्कार भारती के सदस्यों, प्रशिक्षकों का आभार जताया एवं उन्हें शुभकामनाए दीं. उन्होंने कहा कि सोहराई पेंटिंग मात्र एक चित्रकला नहीं है, इसमें झारखंड की माटी, पर्यावरण, वन्यप्राणी, फूल पत्तियाँ, जीव-जंतु की रक्षा-सुरक्षा का एक दर्शन भी शामिल है. इस लुप्त हो रही कला को जन मानस तक पहुंचाने एवं उसे बचाये रखने का दायित्व आज की युवा पीढ़ी के कलाकारों और संस्कार भारती के सदस्यों का है.(नीचे भी पढ़ें)

इस अवसर पर प्रतिभागियों द्वारा तैयार चित्रों की प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिससे अतिथि एवं अभिभावक झारखंड की लुप्त होती सोहराई पेंटिंग कला की विशेषताओं से अवगत हुए. उन्होंने इन कलाकारों द्वारा उकेरे गए चित्रों की प्रशंसा भी की. कार्याशाल में प्रतिभागियों को सोहराई पेंटिंग में प्रयोग किये जानेवाले प्राकृतिक प्राकृतिक उपादानों से तैयार रंगों की जानकारी भी दी गयी.(नीचे भी पढ़ें)
संस्था के मंत्री विजय भूषण के संचालन में आयोजित समापन समारोह में चित्रकला विधा की सह प्रमुख चंदन जायसवाल ने कार्यशाला की बारीकियों की जानकारी दी, जबकि विधा प्रमुख शुभश्री सेन राय ने धन्यवाद ज्ञापन किया. कार्यशाला में मुख्य प्रशिक्षक के रूप में सोहराई पेंटिंग के विशेषज्ञ सुनाराम सोरेन एवं प्रशिक्षक सहयोगी के रूप में सुचिता बसु, टीकम दास, सोमा बेउरा, शशि सिंह एवं सुनीता तिवारी रहीं. कार्यशाला के सफल आयोजन में अनुज कुमार, अरुणा भूषण, डोरिस दास, शृंगारिका शंकर एवं स्मारिका मिश्रा ने भी अहम योगदान किया.



