
जमशेदपुर : जमशेदपुर के होटल अलकोर के मामले में पुलिस द्वारा की गयी कार्रवाई के बाद एयर होस्टेस की ट्रेनिंग लेने गयी लड़की मौसमी चौधरी की मौत पर से परदा उठने की आस एक बार फिर से जग गयी है. 9 मई 2009 को ही मौसमी की मौत संदेहास्पद तरीके से हो गयी थी. यह रहस्य अब तक अनसुलझा है. शनिवार को मौसमी की मौत के 11 साल के बाद मौसमी की मां ने उसकी बरसी पर फिर से अपनी बेटी को श्रद्धांजलि अर्पित की और फिर से यह मांग की कि उनकी बेटी को जरूर न्याय मिलेगा. उसकी मां ने मांग की है कि झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन खुद इस मामले को देखें और इस मामले में कार्रवाई कराये. मां का आरोप है कि मौसमी जमशेदपुर के बिष्टुपुर स्थित होटल सोनेट के भीतर चल रहे जिशमफरोशी के धंधे के बारे में सबकुछ जान चुकी थी इसलिए 9 मई को दुष्कर्म कर हत्या कर दी गई थी. लेकिन सीबीआइ ने इस मामले में दो-दो बार जांच की, जिसमें हत्या की बात को नकार दिया गया है. मां तापसी चौधरी पिछले 11 सालों से अपनी बेटी दिवंगत ट्रेनी एय़र होस्टेस मौसमी चौधरी को न्याय दिलाने के लिए 11 सालों से कोर्ट के चक्कर काट रही है. कभी सड़कों पर धरना देती है कभी कहीं गुहार लगाती है. कोरोना के इस दौर में सोशल डिस्टेंसिंग का ख्याल रखते हुए शनिवार को मां ने अपनी बेटी की पुण्यतिथि घर पर ही अकेले मनाई. उसकी तस्वीर को दीपक दिखाया और संकल्प लिया कि अंतिम सांस तक लड़ती रहेगी. वहीं जमशेदपुर के समाजसेवी राधाकांत ओझा ने भी अपने घर पर मौसमी को श्र्द्धांजलि दी. वे तापसी की इस लड़ाई में हमेशा साथ देते हैं. मां तापसी चौधरी ने इस बात पर अफसोस प्रकट किया कि 9 मई 2009 को जब मौसमी चौधरी होटल सोनेट से संद्गिध हालत में टीएमएच लाई गई तब गिरफ्तारी तो दूर की बात है, न तो मेडिकल जांच हुई और न ही प्राथमिकी दर्ज की गई. घटना के पांच दिनों तक तत्कालीन बिष्टुपुर थाना प्रभारी नीरज मिश्रा घटनास्थल को झांकने तक नहीं गए. 20 मई 2009 को टीएमएच प्रबंधन ने मौसमी को मृत घोषित कर दिया. लेकिन मां 9 मई को ही पुण्यतिथि मनाती है क्योंकि उसका आरोप है कि उसी दिन मौसमी की दुष्कर्म कर हत्या कर दी गई थी.

सीबीआइ ने कोर्ट के आदेश पर दो-दो बार की थी जांच
पुलिस की लीपापोती के बाद मां तापसी तौधरी ने तत्कालीन चीफ जस्टिस ज्ञानसुधा मिश्र को एक पत्र लिखा था जिसका संज्ञान लेते हुए चीफ जस्टिस ने सीबीआइ जांच के आदेश दिए. तब से लेकर आज तक दो-दो बार सीबीआइ जांच हो चुकी है लेकिन न्याय नहीं मिला. फिलहाल मामला सीबीआइ कोर्ट में लंबित है. मां का आरोप है कि सीबीआइ दबाव बना रही है कि इसे मां महज दुर्घटना मान ले जबकि मां ने पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का हवाला देकर न्याय की गुहार लगाई है. वहीं मां तापसी तौधरी ये भी बताती हैं कि मौसमी हत्याकांड के तार डॉ प्रभात हत्याकांड से जुड़े हैं. डॉ प्रभात टीएमएच की इमरजेंसी के हेड थे औऱ संदिग्ध हालत में लाई गई मौसमी के दाखिले से इंकार किया था. वे सबसे पहले शख्स थे जिसने मौसमी को देखा था कि वो जिंदा है या मृत. वे अहम गवाह साबित होते लेकिन सीबीआइ जांच शुरू होते ही उसी साल 17 दिसंबर 2009 को उनके आवास पर उनकी हत्या कर दी गई थी.
पूरा घटनाक्रम और क्यों उठ रहे इस कांड में सवाल एक नजर में :
9 मई 2009-मौसमी चौधरी संदिग्ध हालत में टीएमएच की इमरजेंसी में लाई जाती है जहां डॉ प्रभात उसका दाखिला लेने से इंकार करते हैं. मां का आरोप है कि टाटा स्टील के तत्कालीन वाइस प्रेसीडेंट औऱ अन्य के दबाव में मौसमी को जबरन पहले आइसीयू औऱ फिर सीसीयू में दाखिल किया जाता है जहां स्त्री रोग विशेषज्ञ उसके शरीर पर मौजूर रेप के साक्ष्य मिटाते हैं. टीएमएच में कुछ मीडियाकर्मी पहुंचते हैं और मामला उजागर होता है. पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठते हैं क्योंकि न तो मेडिकल जांच होती है औऱ न ही तत्कालीन बिष्टुपुर थाना प्रभारी नीरज मिश्रा घटनास्थल पर जाते हैं. पांच दिनों तक होटल सोनेट की जांच नहीं की जाती है, यानि सबूत मिटा देने के पूरे मौके दिए जाते हैं.
20 मई 2009-टीएमएच प्रबंधन की ओर से मौसमी को मृत घोषित कर दिया जाता है. घटना के पांच दिनों बाद होटल सोनेट प्रबंधन की ओऱ से दुर्घटना का केस किया जाता है जिसे थाना तुरंत ले लेता है और मां तापसी चौधरी जब बेटी के साथ दुष्कर्म कर हत्या करने की बात कहकर मामला दर्ज कराने जाती है तो उसे भगा दिया जाता है. पुलिस की तरफ से मामले की लापापोती करने औऱ घटना को दुर्घटना कहकर फाइल बंद करने की तैयारी हो रही होती है कि मां तापसी तौधरी तत्कालीन चीफ जस्टिस ज्ञानसुधा मिश्र को पत्र लिखकर न्याय की गुहार लगाती है. चीफ जस्टिस संज्ञान लेते हुए मामले की सीबीआइ जांच के आदेश देती है. साथ ही कर्तव्य में लापरवाही को लेकर तत्कालीन बिष्टुपुर थाना प्रभारी नीरज मिश्रा को निलंबित करने के आदेश देती हैं. पहले तो सीबीआइ की टीम बड़े तेवर दिखाती है लेकिन धीरे धीरे उसकी कार्यशैली भी सवालों के घेरे में आने लगती है.
अक्टूबर-नवंबर 2009-सीबाआइ का जमशेदपुर दौरा होता है. टीएमएच में भी टीम जाती है. दिसंबर 2009 को मामले के अहम गवाह टीएमएच की इमरजेंसी के हेड डॉ प्रभात की भी हत्या हो जाती है. सीबीआइ मौसमी मामले में हाईकोर्ट के इस आदेश का पालन नहीं करती कि मां के बयान के आधार पर प्राथमिकी दर्ज हो बल्कि वो भी इसे दुर्घटना करार देती है. इस रिपोर्ट को तत्कालीन चीफ जस्टिस ज्ञान सुधा मिश्र खारिज कर देती हैं जिसके खिलाफ आरोपी पक्ष सुप्रीम कोर्ट चला जाता है. सुप्रीम कोर्ट में सीबीआइ की बड़ी फजीहत होती है और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का हवाला देकर सुप्रीम कोर्ट पूछती है कि कैसे इसे दुर्घटना मान लिया. सुप्रीम कोर्ट के आदेश से सीबीआइ की नई टीम का गठन होता है जो जांच शुरू करती है. टीम की एक ईमानदार अफसर नीरजा गोत्रू का महज कुछ ही दिनों मे ट्रांसफर कर दिया जाता है. उसके बाद ये टीम भी दुर्घटना मानते हुए ही जांच करती है.
मां तापसी चौधरी के 10 बड़े सवाल
- संदिग्ध परिस्थितियों में मौसमी को होटल सोनेट से टीएमएच लाए जाने के बावजूद स्थानीय प्रशासन ने मेडिकल जांच क्यों नहीं करवाई.
- मौसमी की ट्रेनिंग सोमवार से शुक्रवार होटल सोनेट में अपने साथियों के साथ सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक होती थी. फिर उस दिन शनिवार9 मई को सुबह सात बजे अकले ही क्यों बुलाया गया और साथी ट्रेनी को छुट्टी क्यों दी गई.
- घटना के बाद मां के बयान पर पुलिस ने प्राथमिकी क्यों नहीं दर्ज की.
- घटना के पांच दिनों बाद होटल प्रबंधन की ओर से दुर्घटना की प्राथमिकी पर पुलिस ने सवाल क्यों नहीं खड़े किए, क्यों होटल सोनेट को सबूत मिटाने के लिए पांच दिन दिए.
- सीबीआई ने भी मां के बयान के आधार पर प्राथमिकी दर्ज नहीं की जबकि हाई कोर्ट का आदेश था.
- पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में किसी भोथड़े हथियार से मौसमी के शरीर के कई भागों में चोटों का जिक्र है, प्राइवेट पार्टस पर भी चोट का जिक्र है, फिर भी सीबीआई ने कैसे मान लिया कि महज दुर्घटना है
- होटल की रोलिंग मशीन में किसी भी चीज के फंसने पर मशीन के रूक जाने की बात सामने आने पर भी कैसे सीबीआई ने मान लिया कि उस मशीन में दुर्घटनाग्रस्त होकर मौसमी मर गई.
- मौसमी के दाखिले का तत्कालीन टीएमएच की इमरजेंसी के हेड डॉ प्रभात कुमार ने विरोध किया था. उच्चाधिकारियों के दबाव में मौसमी को जबरन पहले आईसीयू और फिर सीसीयू में दाखिल कराया गया. आखिर सीबीआई के दौरे के एक महीने बाद ही क्यों डॉ. प्रभात की हत्या हो गई? क्या किसी को डर था कि डॉ. प्रभात कोई सच बता देंगे.
- टीएमएच की इमरजेंसी के ही अन्य डॉक्टरों पर भी हमले हुए. एक डॉक्टर तो वापस गुवाहाटी चले गए. उधर डॉ. प्रभात के करीबी डॉ. आशीष राय परिवार समेत शहर छोड़कर चले गए. सीबीआई ने इसकी अनदेखी क्यों की?
- मौसमी की मां को सीबीआइ समेत तमाम एजेंसी क्यों नकारती रही और उनकी बातों को क्यों नहीं सुना गया.






