
जमशेदपुर : देश को सोने की चिड़िया बनाने का अफवाह जरूर देश के सोनभद्र में दिखाया गया था, लेकिन वह फ्लॉप खबर साबित हुई, लेकिन जमशेदपुर में सोना ही सोना है. पहले से पोटका के केंदरुकोचा में सोने का खान वर्षों से चल रहा है जबकि उससे कुछ दूरी पर यानी जमशेदपुर से करीब 16 किलोमीटर दूर पर पोटका के ही भितरदाड़ी इलाके में सोना का नया खदान मिला है, जिसमें भितरदाढ़ी इलाके में सोने का खान मिला है, जिसमें करीब 3.50 लाख टन सोने का डिपोजिट पाया गया है. जियोलॉजिकल सर्वे की टीम द्वारा कराये गये अनवेषण में इसका खुलासा हुआ है कि भितरदाड़ी इलाके में करीब 200 मीटर की गहराई में सोने (गोल्ड) का खदान है. इसकी पुष्टि जीआइएस की टीम ने की है, जिसकी मैपिंग, सैंपलिंग और ड्रिलिंग वर्ष 2014 से लेकर वर्ष 2018 तक के बीच होता रहा है. पोटका का भितरदाड़ी गांव जमशेदपुर से करीब 16 किलोमीटर दूर है. जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के डिप्टी जीएम जनार्दन प्रसाद ने नागपुर स्थित भूतत्व एवं खनिजकर्म निदेशालय को इसकी विस्तृत रिपोर्ट भेज दी है, जिसका नया ब्लॉक तैयार कर फिर से इसकी नीलामी शुरू की जायेगी. इंडियन ब्यूरो ऑफ माइंस की देखरेख में इसका संचालन होगा. जिस गांव में यह सोना मिला है, वह काफी पिछड़ा हुआ है. गांव के लोग अशिक्षित है. गांव के लोगों का कहना है कि वहां एक स्कूल तो है, लेकिन उस स्कूल में बच्चे कम ही पढ़ते है. पहले से ही गांव में लक्ष्मी का वास है, जिस कारण लक्ष्मी और सरस्वती एक साथ नहीं रह सकती है, जिस कारण अधिकांश लोग अशिक्षित ही होते है. वैसे गांव के लोग खुश है कि अब गांव की स्थिति सुधरेगी. वैसे पुलिस का बंदोबस्त इलाके में किया जा चुका है ताकि कोई अवैध उत्खनन कार्य नहीं हो सके.
जमशेदपुर और आसपास में पहले से है सोना, झारखंड में है स्वर्ण खदानें
जमशेदपुर और आसपास के इलाके में पहले से ही सोना का खदान है. जमशेदपुर के केंदरुकोचा इलाके में करीब 20 साल से अधिक समय से उत्खनन का कार्य चल रहा है. वर्तमान में यह खदान मनमोहन मिरल्स को दिया गया है, जहां से सोना का खनन होता है. इसके अलावा सरायकेला-खरसावां जिले के लावा मायसरा गांव में भी सोने का खदान है, जिसको मनमोहन मिरल्स ने बीडिंग के माध्यम से खदान संचालन का जिम्मा लिया है. इसके अलावा पश्चिम सिंहभूम जिले के पहारडीहा में भी बड़े पैमाने पर सोने का खदान है. रांची के तमाड़ के पास परासी गांव के पास करीब 10 लाख टन सोने का भंडार है, जिसका संचालन रुंगटा माइंस द्वारा किया जाता है जबकि पश्चिम सिंहभूम जिले के पाहरडीहा में करीब 2.5 लाख टन सोने का भंडार है.







