रांची : अधिवक्ता संशोधन विधेयक 2025 के खिलाफ झारखंड के वकील गोलबंद हो गये है. रांची सिविल कोर्ट के वकीलों ने इसके खिलाफ आंदोलन किया और सड़क पर उतरकर नारेबाजी की. रांची जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष शंभू अग्रवाल और महासचिव संजय विद्रोही के नेतृत्व में अधिवक्ताओं का दल रांची के अलर्ट एक्का चौक पर पहुंचा और शांतिपूर्वक तरीके से विरोध प्रदर्शन किया. इन लोगों ने अपना विरोध दर्ज कराया है. वकीलों का कहना है कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआइ) और राज्य बार काउंसिल का पुनर्गठन किया जाये. (नीचे भी पढ़ें)

राज्य बार काउंसिल की चुनाव प्रक्रिया में बदलाव, हड़ताल और न्यायालय बहिष्कार पर पूर्ण प्रतिबंध (नियम तोड़ने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रावधान), अधिवक्ता द्वारा किसी भी लापरवाही या कदाचार के कारण मुवक्किल को हुए नुकसान की भरपाई का प्रावधान, अधिवक्ताओं के लिए पेशेवर विकास शुल्क अनिवार्य किया गया, गलत कानूनी सलाह या वकालत के दुरुपयोग पर होगा मुवक्किल को हर्जाने का अधिकार, प्रत्येक 5 साल में अधिवक्ताओं के सत्यापन की प्रक्रिया लागू होगी, विदेशी कानून फर्मों के लिए पंजीकरण और विनियमन का प्रावधान, आपराधिक मामलों में दोषी अधिवक्ताओं को चुनाव लड़ने से रोकने का प्रावधान, जो अधिवक्ता सक्रिय रूप से वकालत नहीं कर रहे हैं, उनके मतदान अधिकार समाप्त किए जा सकते हैं. (नीचे भी पढ़ें)

केंद्र सरकार को बीसीआई को निर्देश देने का अधिकार जैसे प्रावधान उनको मान्य नहीं है. वे लोग इसको लेकर किसी भी हद तक जाकर विरोध करेंगे. नये विधेयक को पारित नहीं होने देने की बात कहीं गयी है. इस दौरान अधिवक्ताओं ने रांची के अलबर्ट एक्का चौक पर विधेयक का पुतला भी फूंका.



