
रांची : भाजपा विधायक दल के नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी के खिलाफ झारखंड विकास मोर्चा (जेवीएम) के विलय के मामले में दलबदल के तहत कार्रवाई की मांग पर स्पीकर न्यायाधिकरण में सोमवार को सुनवाई हुई. इस याचिका में बाबूलाल मरांडी की सदस्यता समाप्त करने की मांग शिकायतकतार्ओं की ओर से की गई. स्पीकर रवींद्रनाथ महतो ने न्यायाधिकरण ने सुनवाई के दौरान प्रारंभिक आपत्ति (प्रिलिमनरी आब्जेक्शन) को अस्वीकार कर दिया. दूसरी ओर, विधानसभा अध्यक्ष ने मामले में कार्रवाई करते हुए फैसला को सुरक्षित रख लिया. श्री मरांडी के अधिवक्ता की ओर से आपत्ति दर्ज किया गया था कि यह शिकायत सुनवाई लायक ही नहीं है क्योंकि दस माह बाद शिकायत की गयी है. विधानसभा अध्यक्ष ने इस सुनवाई को नकार दिया. अब इस आधार पर अगली सुनवाई आरंभ होगी कि बाबूलाल मरांडी की सदस्यता बरकरार रहेगी या वे विधानसभा की सदस्यता से अयोग्य ठहराए जाएंगे. बाबूलाल मरांडी पिछला विधानसभा चुनाव में झाविमो के सिंबल पर चुनाव जीते थे. बाद में उन्होंने झाविमो का विलय भाजपा में कर दिया. इसे चुनाव आयोग की स्वीकृति मिल गई, लेकिन विधानसभा ने विलय को मान्यता देने से इंकार कर दिया. श्री मरांडी के निर्णय के खिलाफ पूर्व विधायक राजकुमार यादव, जेएमएम विधायक भूषण तिर्की, कांग्रेस विधायक दीपिका पांडेय सिंह और विधायक प्रदीप यादव एवं बंधु तिर्की ने याचिका दायर की थी. बाबूलाल मरांडी पर दलबदल के तहत कार्रवाई करते हुए अयोग्य घोषित करने की मांग करते हुए स्पीकर न्यायाधिकरण में शिकायत दर्ज कराई है. विवाद के कारण भाजपा विधायक दल का नेता चुने जाने के बावजूद मरांडी नेता प्रतिपक्ष घोषित नहीं किए गए. यह पद दिसंबर, 2019 में हेमंत सोरेन के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद से खाली है. सोमवार को सुनवाई के दौरान स्पीकर रविंद्र नाथ महतो ने इसकी सुनवाई की. अब सिर्फ इस मामले में केवल संवैधानिक बिंदुओं पर बहस होगी. इससे पहले 6 मई को भी स्पीकर ने इस मामले में सुनवाई की थी. राजकुमार यादव और भूषण तिर्की की ओर से दायर याचिका पर बहस के दौरान बाबूलाल मरांडी की ओर से दलील दी गई कि संबंधित मामला हाइकोर्ट में चल रहा है. ऐसे में स्पीकर के न्यायाधिकरण में सुनवाई नहीं की जाये. यह दो संस्थाओं के टकराव का मामला न बन जाये़ इसलिए याचिका स्पीकर के कोर्ट में खारिज कर दिया जाए. दूसरी दलील यह दी गई कि यह केस विधानसभा की नियमावली के प्रतिकूल है. 11 फरवरी 2020 को जेवीएम का भाजपा में विलय हुआ था. 6 मार्च 2020 को चुनाव आयोग ने विलय को सही करार दिया. विलय के 10 महीने बाद बाबूलाल मरांडी के खिलाफ 16 दिसंबर 2020 को पहला केस फाइल किया गया था. बाबूलाल मरांडी की दलील है कि दसवीं अनुसूची के प्रावधान 6 के तहत दलबदल के मामले में देर से किया किया गया आपत्ति खारिज हो जाएगा. वैसे जानकार मान रहे है कि बाबूलाल मरांडी की विधायकी पर खतरा मंडरा रहा है. इसको लेकर प्रतिकूल फैसला कभी भी आ सकता है.




