रांची : झारखंड कांग्रेस ने अपने मंत्रियों पर लगाम कसा है. इसको लेकर कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी के राजू ने मंत्रियों के सार्वजनिक बयान देने पर रोक लगा दी है. हर दिनों में सभी मंत्रियों के कामकाज की समीक्षा की जायेगी. श्री राजू रांची स्थित कांग्रेस मुख्यालय में संवाददाताओं से खास बातचीत कर रहे थे. उन्होंने बताया कि यह शिकायत मिल रही थी कि मंत्रियों द्वारा जिलों में जाकर आम जनता और कार्यकर्ताओं से संवाद करने का कार्यक्रम धरातल पर नहीं उतर पाया है. इस पर चिंता जताते हुए निर्देश दिया गया है कि अगले 2 महीनों के भीतर सभी मंत्री अनिवार्य रूप से विभिन्न जिलों का दौरा करेंगे और कार्यकर्ताओं व आम लोगों की समस्याएं सुनेंगे. उन्होंने स्पष्ट किया कि राजनीतिक बदलाव रातों-रात संभव नहीं है, इसके लिए पार्टी एकजुटता, अनुशासन और जन सरोकार के मुद्दों के साथ जनता के बीच उतरेगी. अक्सर यह देखा गया है कि एक ही मुद्दे पर कांग्रेस मंत्रियों के बयान अलग-अलग आते हैं. इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए प्रभारी ने निर्देश दिया है कि अब बिना पार्टी प्लेटफॉर्म पर चर्चा किए कोई भी मंत्री सार्वजनिक बयानबाजी नहीं करेगा. (नीचे भी पढ़ें)
सभी मंत्री केवल पार्टी लाइन पर बात रखेंगे. इसके लिए एक विशेष ‘फोरम’ बनाया जाएगा, और हर 15 दिनों पर सभी मंत्री एक साथ बैठक कर जनमुद्दों पर एक राय बनाएंगे. कैंपेन कमेटी की बैठक में रणनीति तय करते हुए प्रमंडलवार वरीय नेताओं को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है. एसआईआर की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अगले 6 महीनों तक हर प्रमंडल में दो कमेटियां जनमुद्दों को लेकर कैंपेन चलाएंगी. इसके तहत सेमिनार, वर्कशॉप और पब्लिक मीटिंग के जरिए आम जनता से संवाद स्थापित कर उनके जमीनी मुद्दों को जाना जाएगा. दलितों के मानवीय और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए अन्य राज्यों की तरह झारखंड में भी अनुसूचित जाति आयोग के गठन की आवश्यकता है. प्रभारी ने बताया कि इसके लिए मुख्यमंत्री से पहले भी अनुरोध किया गया है और आयोग के गठन तक पार्टी का प्रयास निरंतर जारी रहेगा.







