
जमशेदपुर : पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास के खिलाफ बिजली निगम में सबसे बड़ा प्रमाणित घोटाला सामने आया है. पूर्व मंत्री और रघुवर दास को चुनाव हराने वाले जमशेदपुर पूर्वी के विधायक सरयू राय ने इसको सामने लाया है. इसको लेकर श्री राय ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को प्रमाणित दस्तावेजों के साथ पत्र लिखा है और कार्रवाई की मांग की है. अपने पत्र में श्री राय ने कहा है कि 7 जून 2019 को टाटा प्रोजेक्ट लिमिटिड के एक अधिकारी अविनाश कुमार ने झारखंड सरकार के मुख्य सचिव को एक औपचारिक शिकायत इ-मेल से भेजा था, जिसकी प्रति भी श्री राय ने संलग्न की है. शिकायत में उन्होंने कहा था कि विद्युत विकास निगम का एक काम करने के एवज में 42 करोड़ रूपए का भुगतान करने की संचिका निगम के प्रबंध निदेशक राहुल पुरवार के पास लंबित है. वे 2.5 प्रतिशत कमीशन चाहते हैं और उनका कहना है कि इस कमीशन में मुख्यमंत्री तक की हिस्सेदारी है. मुख्य सचिव ने इस शिकायत की जांच के लिए तत्कालीन ऊर्जा सचिव वंदना ददेल को भेज दिया. वंदना ददेल ने जांच की और शिकायत को सही पाया. संबंधित संचिका की गतिविधियों के आधार पर भी शिकायत को सही पायी गयी. मुख्य सचिव ने जांच प्रतिवेदन आवश्यक कार्रवाई के लिए भेज दिया. करीब 6 महीना तक संचिका मुख्यमंत्री के पास पड़ी रही. इस पर कोई कार्रवाई नही की गयी. इस बीच वंदना ददेल की जगह पर एल ख्यागते सचिव बन गए. विधानसभा चुनाव पूरा हो जाने के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री ने संचिका को इस आदेश के साथ विभाग में भेज दिया कि जांच प्रतिवेदन पर वर्तमान ऊर्जा सचिव का मंतव्य प्रात किया जाए. मुख्यमंत्री के इस आदेश से स्पष्ट है कि उन्होंने आरोप साबित हो जाने पर भी राहुल पुरवार पर कार्रवाई नही किया. संचिका महीनों अपने पास रखे रहा. मुख्य सचिव के आदेश पर जांच की अनदेखी की यानी इ-मेल से प्राप्त शिकायत में दर्ज राहुल पुरवार का कथन सही प्रतीत होता है कि ऊर्जा विकास निगम में कमीशनखोरी का हिस्सा मुख्यमंत्री तक पहुंचता है. वर्तमान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 25 जुलाई 2019 को संवादाता सम्मेलन आयोजित कर मुख्यमंत्री की संलिप्तता का आरोप लगाया था और कार्रवाई की मांग की थी. विधायक अरूप चटर्जी ने यह विषय झारखंड विधानसभा के पिछले मॉनसून सत्र में उठाया था. हो-हल्ला के कारण दिनभर विधानसभा नही चली अब हेमंत सोरेन झारखंड के मुख्यमंत्री हैं. उनके द्वारा 25 जुलाई 2019 को तत्कालीन मुख्यमंत्री पर लगाया गया आरोप जांच में साबित हो गया है. राहुल पुरवार अभी भी ऊर्जा विकास निगम के प्रबंध निदेशक हैं. मुखमंत्री श्री सोरेन से सरयू राय ने अपेक्षा जतायी है कि वे इस पर कार्रवाई करेंगे और इसके आलोक में ऊर्जा विभाग के अन्य घोटालों की जाँच के लिए विशेष कमिटी बनाएंगे.







