
रांची/जमशेदपुर : जमशेदपुर पूर्वी के विधायक सरयू राय द्वारा स्वास्थ्य मंत्री द्वारा गलत तरीके से राजकोष से कोरोना की राशि का दुरुपयोग करने का उठाया गया मुद्दा गर्मा गया है. इस मसले को लेकर सरयू राय ने एक मीडिया से बातचीत करते हुए अपने आरोप को सही बताया और साफ तौर पर कहा कि इस मसले पर मुख्यमंत्री को तत्काल कैबिनेट से मंत्री बन्ना गुप्ता को बाहर का दरवाजा दिखा देना चाहिए क्योंकि इससे सरकार की छवि खराब हो रही है. वहीं, दूसरी ओर इस मसले पर भाजपा ने भी सरयू राय का साथ देते हुए मंत्री पर लगे गंभीर आरोप को देखते हुए तत्काल कार्रवाई करने की मांग कर दी है. सबसे बड़ी बात है कि राज्य की सत्ताधारी पार्टी झामुमो के केंद्रीय प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने भी सरयू राय की मांग का समर्थन कर दिया है और मंत्री बन्ना गुप्ता द्वारा जांच कराये जाने का खुला न्योता देने का भी स्वागत किया है. इस मामले में मंत्री बन्ना गुप्ता का भी बयान आया है और कहा है कि वे जांच कराने को तैयार है. फिलहाल इस मसले पर राज्य की राजनीति गर्मा चुकी है.
सरयू राय ने फिर से दोहराया अपना आरोप
राज्य के पूर्व मंत्री और विधायक सरयू राय ने गुरुवार को भी अपने आरोपो को सही ठहराया और कहा कि अवैध तरीके से राजकोष का दुरुपयोग किया गया है. राज्य के मंत्री बन्ना गुप्ता ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के हस्ताक्षरयुक्त पत्र पर एक नाम को जोड़ दिया है. सरयू राय ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को देखना चाहिए कि सरकार की छवि को वे ठीक रखना चाहते है या खराब करना चाहते है. श्री राय ने कहा कि मंत्री कोषांग में 60 लोगों रख लिया गया है, जो गलत है जबकि राज्य सरकार का यह अप्रुवल है कि 20 लोगों से अधिक मंत्री कोषांग में नहीं हो सकता है, ऐसे में एक और सरकारी राजस्व का दुरुपयोग करने का मामला सामने आया है. इसकी भी जांच होनी चाहिए. उन्होंने मंत्री बन्ना गुप्ता के उस बयान पर भी पलटवार किया, जिसमें बन्ना गुप्ता ने कहा था कि सरयू राय का कोई काम नहीं है, जांच के लिए प्रधानमंत्री को भी लिख दें. इस पर सरयू राय ने कहा कि मंत्री बन्ना गुप्ता को शौक है कि उनका मामला प्रधानमंत्री तक किया जाये तो वे लिखकर दे देंगे कि मंत्री खुद प्रधानमंत्री के स्तर पर जांच कराना चाहते है. लेकिन चूंकि, मंत्री मुख्यमंत्री के अधीन आते है, इस कारण उनके इस मामले को हमने मुख्यमंत्री के पास ही भेजा है. अब सरकार को देखना है कि आस्तीन के सांप को सरकार में पालते है या उनको निकालते है.
मंत्री बन्ना गुप्ता ने कहा-वे सारी जांच को लेकर तैयार है
मंत्री बन्ना गुप्ता ने इस मसले पर रांची में पत्रकारों से बातचीत की है. मंत्री बन्ना गुप्ता ने कहा कि वे बैकवर्ड क्लास से आते है. वे किसी भी जांच के लिए तैयार है. वे सारी जांच को लेकर तैयार है. सरयू राय काफी बड़े लोग है, बड़ी बड़ी जांच करा चुके है, इस कारण वे उन पर कोई टिप्पणी करना नहीं चाहते है, लेकिन उन पर जो आरोप लगाया गया है, वह दूध का दूध पानी का पानी हो जाना चाहिए. इसमें कहां डरने की बात है.
भाजपा ने सरयू राय का किया समर्थन, जांच कराने की उठायी मांग
भाजपा ने सरयू राय के आरोपों का समर्थन किया है. भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश ने कहा है कि मंत्री बन्ना गुप्ता के खिलाफ संगीन दस्तावेजी प्रमाण प्रस्तुत किये गये है. मंत्री के खिलाफ मामले की जांच होनी ही चाहिए. भाजपा के प्रवक्ता प्रतुल साहदेव ने कहा है कि सरयू राय के आरोप काफी गंभीर है. दस्तावेजी प्रमाण है, इस कारण इसको लेकर तत्काल कार्रवाई की जानी चाहिए. सरयू राय के आरोपों का भाजपा ने खुलकर समर्थन किया है.
झामुमो ने भी किया सरयू राय का समर्थन, मंत्री बन्ना की भी तारीफ की
इस मसले पर झामुमो के केंद्रीय प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है. झामुमो के केंद्रीय प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा है कि सरयू राय गंभीर व्यक्ति है. उनकी बातों को यूं ही खारिज नहीं किया जा सकता है. उनके दस्तावेजों और आरोपों की जांच करा लेना चाहिए. इसमें कहा कोई दिक्कत है. उन्होंने कहा कि मंत्री बन्ना गुप्ता ने भी जांच के लिए खुद से पहल की है, वह स्वागत योग्य कदम है. सरयू राय के आरोपों की जांच होनी ही चाहिए और मुख्यमंत्री जरूर इस पर कदम उठायेंगे.
ये है सरयू राय का आरोप, जिसको लेकर मचा है सियासी भूचाल
सरयू राय ने एक पत्र मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नाम जारी किया है. उन्होंने कहा है कि वित्तीय वर्ष 2021-22 के अंत में स्वास्थ्य मंत्री के अवैध आदेश से राजकोष से कोविड महामारी के बहाने के करोड़ों रूपये की राशि निकासी की गयी है. इसमें कहा गया है कि वैश्विक महामारी से संबंधित कोविड अस्पताल, कोविड वार्ड में कार्यरत, कार्यालय तथा कंट्रोल रूम में कोविड से संबंधित कार्यों हेतु प्रतिनियुक्त चिकित्सा कर्मियों तथा चिकित्सकों को एक माह के मूल वेतन व मानदेय के समतुल्य प्रोत्साहन राशि प्रदान करने की जानी थी.प्रोत्साहन राशि पाने के योग्य नियमित एवं संविदा कर्मी विभाग द्वारा चिन्हित किये जाने थे.संकल्प की कंडिका 4 में प्रोत्साहन राशि पाने के योग्य कर्मियों के बारे में स्पष्ट उल्लेख किया हुआ है. इसमें यह उल्लेख भी है कि वैसे चिकित्सक, स्वास्थ्य कर्मी एवं स्वास्थ्य विभागीय अन्य कर्मी, जिनके द्वारा कोविड-19 में अपने कर्तव्यों का निर्वहन नहीं किया गया है,उन्हें यह प्रोत्साहन राशि अनुमानित नहीं होगा. प्रोत्साहन राशि प्राप्त करने हेतु कर्मी की पात्रता सुनिश्चित करने की पूर्ण ज़िम्मेवारी संबंधित कार्यालय प्रधान की होगी. स्वास्थ्य विभाग द्वारा इस बारे में गठित समिति ने पात्रता श्रेणी में आने वाले 94 स्वास्थ्य कर्मियों की सूची तैयार की, जो प्रोत्साहन राशि पाने के योग्य थे.परंतु स्वास्थ्य मंत्री के कोषांग से 60 अतिरिक्त नामों की सूची विभाग को भेजी गई. इस सूची में मंत्री का नाम सबसे ऊपर अंकित है. इस सूची में स्वास्थ्य मंत्री के दो आप्त सचिवों, निजी सहायकों, चर्या लिपिकों, कम्प्यूटर ऑपरेटरों, सहायकों, आदेश पालकों, 8 वाहन चालकों, 4 सफ़ाई कर्मियों और मंत्री की सुरक्षा में नियुक्त-प्रतिनियुक्त कुल 34 अंगरक्षकों एवं अन्य पुलिसकर्मियों का नाम भी प्रोत्साहन राशि पाने वालों में शामिल है.विभागीय अधिकारियों ने संबंधित संचिका के पृष्ठ 29 और 30 पर अंकित टिप्पणी में इस बारे में नियमों से स्वास्थ्य मंत्री को अवगत करा दिया है. विभागीय समिति की कार्यवाही संचिका के पत्राचार पृष्ठ 84-85 पर रखते हुए मंत्री को वस्तुस्थिति से अवगत कराते हुए और संचिका के टिप्पणी पृष्ठ 38 पर इसका उल्लेख करते हुये संचिका मंत्री के पास सहमति देने के लिये दिनांक 4.3.2022 को भेज दिया. स्वास्थ्य मंत्री के पास संचिका गई तो उन्होंने इसमें एक और नाम जोड़ने का आदेश दिया कि झारखंड विधानसभा के एक टंकक,जिसकी प्रतिनियुक्ति उनके गोपनीय शाखा में है, का नाम भी प्रोत्साहन राशि पाने वालों की सूची में जोड़ दिया जाऐ.स्पष्ट है कि स्वास्थ्य मंत्री के अनधिकृत दबाव में विभाग द्वारा वित्तीय वर्ष के अंत में सूची में शामिल मंत्री सहित कुल 60 को प्रोत्साहन राशि का अवैध और अनधिकृत भुगतान हुआ.मंत्री ने स्वयं संबंधित संचिका के पृष्ठ 40 पर हस्ताक्षर किया है.विभागीय संकल्प की प्रति,अनुचित प्रोत्साहन राशि पाने वाले स्वास्थ्य मंत्री सहित मंत्री कोषांग के अन्य कर्मियों की सूची,संचिका के टिप्पणी पृष्ठ पर 40 और 42 पर स्वास्थ्य मंत्री के आदेश है. सरयू राय ने अपने आरोप में कहा है कि प्रासंगिक संकल्प के अनुसार प्रोत्साहन राशि प्राप्त करने के लिये अयोग्य कर्मियों का चयन करने के लिये अपने कोषांग के प्रधान के नाते आपकी सरकार के स्वास्थ्य मंत्री स्वयं ज़िम्मेदार है.वे घोर वित्तीय कदाचार और अनियमितता के दोषी हैं.यह उनके भ्रष्ट आचरण का द्योतक है.श्री राय ने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया है कि उपर्युक्त विवरण के आलोक में स्वास्थ्य विभाग की प्रासंगिक संचिका मंगाकर कर घोर वित्तीय अनियमितता के लिये स्वास्थ्य मंत्री पर कार्रवाई करना चाहेंगे तथा स्वास्थ्य मंत्री सहित उनके कोषांग के अन्य कर्मियों द्वारा ली गई अनुचित एवं अवैध प्रोत्साहन राशि वापस करने का आदेश देने और इसके लिये दोषियों के विरूद्ध कार्रवाई करना चाहेंगे.




