
रांची : वेस्ट अफ्रीका के माली में फंसे झारखंड के 33 मजदूरों में से 7 मजदूरों को शनिवार को राज्य में वापसी करा दिया गया. सारे सात मजदूर झारखंड के रांची एयरपोर्ट पर शनिवार को उतरे. रांची के रहने वाले माली में भारत के राजदूत अंजनी कुमार और झारखंड सरकार की पहल पर छेदीलाल महतो, संतोष कुमार, लोकनाथ महतो, इंद्रदेव प्रसाद, इंद्रदेव ठाकुर, लालमणि महतो, दिलीप कुमार समेत अन्य को वहां से मुक्त कराया गया. तीन फरवीर को वे लोग नयी दिल्ली के लिए फ्लाइट से रवाना हुए थे. जहां से पांच फरवरी को वे लोग रांची पहुंचे. उनका यहां पहुंचने पर श्रम विभाग की ओर से अलग से इंतजाम कराया गया था. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश के आलोक में श्रम मंत्री सत्यानंद भोक्ता और श्रम विभाग ने इस दिशा में कोशिश तब शुरू की थी, जब सोशल मीडिया में मजदूरों ने खुद के फंसे होने की जानकारी दी थी. झारखंड राज्य से लगभग 33 मजदूर कांट्रैक्टर के माध्यम से अफ्रीकी देश माली स्थित शिकासो से बमाको के बीच इलेक्ट्रिफिकेशन के कार्य में काम कराने के लिए ले जाये गये थे. लेकिन मजदूरी नहीं मिलने से वे लोग परेशान हो गये थे. उन लोगों ने वीडियो जारी कर वतन वापसी और मजदूरी दिलाने का आग्रह किया था. उनको तीन माह से पैसे नहीं मिल रहा था. पैसे नहीं मिलने के कारण इन मजदूरों की परेशानी बढ़ी हुई थी. 16 जनवरी को इन लोगो ने पहली बार वतन वापसी के लिए गुहार लगायी थी. तब से भारत सरकार और झारखंड सरकार ने अलग-अलग प्रयास किये, जिसके बाद सबकी वापसी हो पायी. बताया जाता है कि उनको त्रिमाही वेतन 29725 रुपये दने की बात कहकर ले जाया गया था. उनको फिटर का काम दिया गया था. लेकिन उनको वेतन नही दिया गया. उनके पास दो दिन का खाना ही बचा था. काफी जद्दोजहद के बाद माली सरकार ने पहल की और तत्काल सबको वापसी कराया गया. राज्य प्रवासी नियंत्रण कक्ष द्वारा कंपनी के कंट्री हेड एवं मेनेजर से संपर्क कर उन्हें श्रमिकों की समस्या से अवगत कराते हुए उनके खाने की उचित व्यवस्था और वेतन का भुगतान करने को कहा गया. मामले की गंभीरता को देखते हुए माली स्थित भारतीय दूतावास से संपर्क कर घटना से अवगत कराया गया. दूतावास द्वारा कंपनी, ठेकेदार एवं श्रमिकों के प्रतिनिधियों को दूतावास कार्यालय बातचीत के लिए बुलाया गया. इसके बाद तीनों पक्ष के प्रतिनिधि द्वारा दूतावास कार्यालय में समझौता पत्र में हस्ताक्षर किया गया और श्रमिकों की वापसी सुनिश्चित हुई.




