
रांची : झारखंड में किस तरह से लोगों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ किया जा हा है और किस तरह सरकारी पैसों का बंदरबांट होता है, इसका जीता जागता उदाहरण रांची के इटकी में मंगलवार को देखने को मिला. मंगलवार को मांडर के कांग्रेस विधायक बंधु तिर्की अपने दल बल के साथ रांची के इटकी स्थित यक्षमा केंद्र यानी आरोग्यशाला पहुंचे. वहां एक कमरे में खाली एक्सपायरी दवाओं को उन्होंने पकड़ा. इसकी तत्काल जानकारी स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को दी गयी, जिसके बाद आनन-फानन में सारी दवाओं को जब्त किया गया. बताया जाता है कि ये सारी दवाएं करोड़ों की है, जो वर्ष 2005 में झारखंड में लोगों को कालाजार और मलेरिया से बचाने के लिए लाया गया था, लेकिन इसका इस्तेमाल नहीं किया गया. इसके बाद वर्ष 2010 में ही अधिकांश दवाएं इस्तेमाल नहीं हुई, जिसके बाद वह सारी दवाएं एक्सपायरी हो गयी. यह जनता के साथ कैसा अन्याय है, यह सहज समझा जा सकता है कि लोग कालाजार और मलेरिया के रोग से ग्रसित थे और वहां दवाओं को जिम्मेदार अधिकारियों ने रखकर ही खराब कर दिया. हालात यह है कि दस साल पहले ये दवाएं एक्सपायरी हो गयी और वहां रख दिया गया. वहां अलग से एडवांस टेस्ट किट और अन्य तरह के सारे किट भी थे, जो काफी महंगे थे, उसको फेंका गया था और एक कमरे में रखा गया था. विधायक बंधु तिर्की ने जब वहां इटकी आरोग्यशाला के प्रभारी डॉ रंजीत प्रसाद से पूछा तो उन्होंने कहा कि वहां पहले मलेरिया और कालाजार के लिए बनाये गये मलेरिया सेल को संचालित किया जाता था. पूरे राज्य का वहीं केंद्र था, जिसको बाद में नामकुम में भेज दिया गया, लेकिन दवाएं वहीं रह गयी और वहां पड़े पड़े रहकर खराब हो गयी. उन्होंने यह माना कि ये महंगी दवाईयां थी, जो जनता को देने के लिए लाया जाना था. वहीं कांग्रेस विधायक बंधु तिर्की ने कहा कि इस तरह की जीवन रक्षक दवाओं का मिलना बताता है कि किस तरह से अधिकारी और स्वास्थ्य विभाग के लोग खेल कर रहे है. इस तरह की गड़बड़ी कई जगह हो रही होगी. इसको जांच कर दोषियों पर कार्रवाई होना चाहिए. ऐसे लोग तो जान से खेल रहे है और जनता के पैसे का दुरुपयोग कर रहे है. जब ये दवाएं आ गयी थी तो क्यों नहीं बांटा गया और अगर इसकी जरूरत ही नहीं थी तो क्यों खरीदा गया. इसकी तह तक जांच होनी चाहिए.





