रांची: झारखंड हाइकोर्ट ने जेपीएससी व जेएसएससी से जुड़े भर्ती रद्दीकरण मामलों की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की धीमी कार्रवाई पर नाराजगी जतायी है. जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने स्पष्ट किया कि लंबे समय से लंबित इन मामलों में बार बार समय मांगा जाना उचित नहीं है. अदालत ने सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए दो दिन का समय दिया है और अगले आदेश तक 11वीं व13वीं जेपीएससी संयुक्त सिविल सेवा, जेएसएससी सीजीएल-2023, सीडीपीओ और एफएसओ( फुड सेफ्टी आफिसर) भर्ती विज्ञापनों को रद्द करने संबंधी अधिसूचना पर लगी रोक को बरकरार रखा. मामले की अगली सुनवाई 18 सितंबर को होगी.सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि उसके समक्ष आए मामले मुख्य रूप से दो श्रेणियों में हैं. पहली श्रेणी में वे मामले हैं, जिनमें सरकार ने भर्ती विज्ञापन रद्द कर दिए हैं. दूसरी श्रेणी में ऐसे मामले हैं, जिनमें चयन प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद अभ्यर्थियों को नियुक्ति नहीं दी गई है. अदालत ने संकेत दिया कि दोनों तरह के मामलों का प्रभाव हजारों अभ्यर्थियों के भविष्य पर पड़ रहा है, इसलिए इनमें अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए.(नीचे भी पढ़े)
राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता रोहितश्व रॉय ने अदालत को बताया कि मामले में सीआइडी की जांच जारी है और जवाब दाखिल करने के लिए अधिक समय दिया जाए. हालांकि, अदालत इस दलील से पूरी तरह संतुष्ट नहीं दिखी. कोर्ट ने पहले ही जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया था, लेकिन तय समय तक सरकार अपना जवाब प्रस्तुत नहीं कर सकी. सरकार की ओर से करीब एक महीने का अतिरिक्त समय मांगा गया, लेकिन अदालत ने इसे स्वीकार नहीं किया. कोर्ट ने अधिकतम दो दिन की मोहलत देते हुए स्पष्ट किया कि मामले में अनावश्यक देरी स्वीकार नहीं की जाएगी. याचिकाकर्ताओं की ओर से पूर्व महाधिवक्ता और हाईकोर्ट-सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव रंजन, अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा, अमृतांश वत्स समेत अन्य अधिवक्ताओं ने जोरदार विरोध दर्ज कराया. उन्होंने कहा कि सरकार ने अचानक अधिसूचना जारी कर भर्ती विज्ञापन रद्द कर दिए, जबकि इन्हीं विज्ञापनों के आधार पर चयन प्रक्रिया पूरी हुई थी और कई अभ्यर्थियों को नियुक्तियां भी मिल चुकी थीं. याचिकाकर्ताओं का कहना था कि पूरी भर्ती प्रक्रिया रद्द कर चयनित उम्मीदवारों की सेवाएं समाप्त कर दी गईं, जबकि सरकार अब तक अपने फैसले के समर्थन में ठोस साक्ष्य पेश नहीं कर सकी है. उन्होंने अदालत से कहा कि यदि सरकार के पास पर्याप्त आधार हैं तो उन्हें रिकॉर्ड पर लाया जाए, केवल समय मांगना उचित नहीं है.




