
रांची : झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) में छठी निकाली गयी बहाली को लेकर झारखंड हाईकोर्ट के डबल बेंच में सुनवाई तेज हो चुकी है. हाईकोर्ट ने मंगलवार को अगली सुनवाई होने तक यथास्थिति बहाल रखने का आदेश दिया है. हाईकोर्ट के इस फैसले से वैसे लोगों को राहत मिली है, जो इस परीक्षा में पास हो गये थे. झारखंड हाईकोर्ट में छठी जेपीएससी मामले में दायर अपील याचिका पर सुनवाई करते हुए मंगलवार को इस पर यथास्थिति बहाल रखने का आदेश दिया. इस मामले को लेकर शिशिर तिग्ग समेत अन्य लोगों ने पूर्व में झारखंड हाईकोर्ट के फैसले को डबल बेंच में चुनौती दी है और एक रिट याचिका दायर की है. मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता राजीव रंजन और पीयूष चित्रेश ने कोर्ट को जानकारी दी कि राज्य सरकार ने सिंगल बेंच में रिट का विरोध किया था, लेकिन अब सरकार सिंगल बेंच के आदेश का अनुपालन करना चाहती है, जिस पर कोर्ट ने कहा कि यह काफी महत्वपूर्ण मामला है, इससे कई लोगों की नौकरी पर असर पड़ ससता है. इस कारण इस पर सुनवाई जारी रहेगी. छह सप्ताह के बाद इसकी फिर से सुनवाई होगी. इस डबल बेंच में खुद झारखंड के मुख्य न्यायाधीश डॉ रविरंजन और जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद मौजूद थे और सुनवाई की. आपको बता दें कि जेपीएससी द्वारा ली गयी छठी परीक्षा के रिजल्ट को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने अपना फैसला सुनाया था, जिसमें कोर्ट ने आदेश पारित किया था कि जेपीएससी की मेरिट लिस्ट रद्द कर दी जायेगी और 326 अभ्यर्थियों की नियुक्ति अवैध थी. इसके बाद इस परीक्षा में सफल और असफल हुए अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में लटक गया. हालांकि, सफल अभ्यर्थियों ने इसको डबल बेंच में चुनौती दी और अपील दायर की है. डबल बेंच में अधिवक्ता सुमित गड़ोदिया, अर्पण मिश्रा, इंद्रजीत सिन्हा जैसे कई वकीलों ने इस मामले में अभ्यर्थियों की ओर से बहस की. इस मामले में दायर याचिका में कहा गया है कि छठी जेपीएससी की मुख्य परीक्षा में पेपर वन हिंदी और इंग्लिश का अंक कुल प्राप्तांक में जोड़ा जाना सहीहै. इसी आधार पर मेरिट लिस्ट जेपीएससी ने जारी की थी. अब तक इस मामले में राज्य सरकार की ओर रसे किसी तरह की कोई चुनौती हाईकोर्ट में नहीं दी गयी है.




