रांची : झारखंड के सदन में एक ओर जहां नई नियोजन नीति को लेकर बवाल मचा हुआ है. सदन में 60-40 नाय चलतौ, 1932 की भेलो का नारा गूंज रहा है. वहीं मंगलवार को जेपीएससी व झारखंड कर्मचारी चयन आयोग से संबंधित विभिन्न प्रतियोगिता परीक्षाओं में अभ्यर्थियों के जाति प्रमाण पत्र रद्द करने के मामले में अब झारखंड हाईकोर्ट की वृहद पीठ को सुनवाई सौंप दी गई है. जस्टिस एस चंद्रशेखर व जस्टिस रत्नाकर भेंगरा की खंडपीठ ने इस मामले को वृहद पीठ को रेफर कर दिया. विदित है कि डॉ नुतन इंदवर व अन्य की ओर से दायर अपील याचिकाओं पर सुनवाई के बाद यह फैसला लिया गया है. (नीचे भी पढ़ें)
बताते चले कि यह मामला सब इंस्पेक्टर, टीजीटी, पीजीटी, दंत चिकित्सक, वायरलेस इंस्पेक्टर, रेडियो इंस्पेक्टर की नियुक्ति परीक्षा से संबंधित है. याचिकाकर्ताओं का कहना है कि जेपीएससी और जेएसएससी ने उनके जाति प्रमाण पत्र पर विचार नहीं किया और उन्हें सामान्य कैटेगरी में डाल दिया. जिसके कारण कट ऑफ मार्क्स से ज्यादा अंक होने के बावजूद भी उनका चयन ना हो सका. उनके मार्क्स आरक्षित श्रेणी के अनुकूल ही थे. फिर भी विभाग की गलती के कारण उनका चयन न हो सका. जिससे उनका भविष्य अधर में लटक गया. अभ्यर्थियों की ओर से अधिवक्ता मनोज टंडन, श्रेष्ठ गौतम, अम़ृतांश ने पैरवी की और बचाव के लिए जेपीएससी की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वरीय अधिवक्ता सुनील कुमार, संजय पिपरवाल और प्रिंस कुमार ने अपना पक्ष कोर्ट के सामने रखा.


