
रांची : झारखंड राज्य में किराया संबंधित विवादों, शिकायतों एवं अपराधों के निपटारे और न्याय लेने का पावर जिले के उपायुक्तों से वापस ली जाएगी. गृहस्वामी व किरायेदारों के बीच उत्पन्न विवादों के निपटारे का अधिकार न्यायाधिकरण को दिया जाएगा. इसके लिए राज्य सरकार भाडा नियंत्रण अधिकरण गठन करने का निर्णय लिया है. हाई कोर्ट की सलाह पर जिला न्यायाधीश को अधिकरण का अध्यक्ष नियुक्त किया जाएगा. नगर विकास विभाग ने झारखंड भवन पट्टा, किराया एवं निष्कासन, नियंत्रण संशोधन विधेयक 2021 गठन की स्वीकृति का प्रस्ताव तैयार किया है. कैबिनेट की मंजूरी के बाद इसे विधानसभा में पारित कराने के बाद लागु किया जाएगा. 2011 के अधिनिय़म मे यह शक्ति राज्य जिला उपायुक्तों को दी गयी थी,लेकिन लंबित मामलों को देखते हुए सरकार ने अलग से न्यायाधिकरण के गठन की आवश्यकता महसूस की है. न्यायाधिकरण के माध्यम से सभी भाड़े व किराया संबंधित विवादों, शिकायतों का निपटारा किया जा सकेगा. इसके अलावा गृहस्वामी व किरायेदार के हित, अधिकार एवं दायित्व का भी निर्धारण किया जा सकेगा. प्राधिकार के निर्णय की अपील आयुक्त से की जा सकेगी. प्राधिकार, गृहस्वामी या किरायेदारों के आवेदन पर त्वरित सुनवाई करते हुए अपना निर्णय़ देगा. प्राधिकार में सरकार के सदस्य व उपसचिव सहित अन्य कर्मियों को पदस्थापित करेगी. राज्य सरकार ने किराया संबंधित विवादों के त्वरित निपटारे के लिए दूसरे राज्यों के प्रावधान का भी अध्ययन कराया है.इन राज्यों में लागू प्रावधानों की भांति अपीलीय प्राधिकार के रुप में झारखंड भवन पट्टा, किराया एंव निष्कासन नियंत्रण अधिनियम 2011 को संशोधित किया जाएगा और नया अधिनियम 2021 का लाने निर्णय लिया गया है. इसके लिए झारखंड महाधिवक्ता ने भी इस संबंध में राज्य को मशविरा दिया है





