चाईबासा : झारखंड में मानव तस्करी को लेकर कई सारे कदम उठाये जा रहे है. इस कड़ी में पश्चिम सिंहभूम जिले के चक्रधरपुर में बड़े मानव तस्करी के नेटवर्क का पता चलने में पुलिस को कामयाबी मिली है. पुलिस ने 9 बच्चों को मानव तस्करों के चंगुल से छुड़ाने में कामयाबी हासिल की है. इनको गुजरात, तमिलनाड़ू, नयी दिल्ली समेत देश के विभिन्न हिस्सों में ले जाकर काम कराने और बेचने की तैयारी की गयी थी. चक्रधरपुर रेलवे स्टेशन पर चली सघन चेकिंग के दौरान जिस तरह से इन बच्चों को बरामद किया गया. यह ऑपरेशन किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं था, जहां एक तरफ मासूमों के सपनों का सौदा हो रहा था और दूसरी तरफ पुलिस साये की तरह तस्करों का पीछा कर रही थी. जांच में पता चला कि तस्करों ने 4 नाबालिग लड़कों को गुजरात और 5 नाबालिग लड़कियों को तमिलनाडु की एक कंपनी में काम दिलाने का झांसा दिया था. (नीचे भी पढ़े)
इस रेस्क्यू टीम में केवल पुलिस ही नहीं, बल्कि ‘कर्रा सोसायटी फॉर रूरल एक्शन रांची’, जिला बाल संरक्षण इकाई की पदाधिकारी पुनीता तिवारी के निर्देश पर चाइल्ड हेल्पलाइन, आरपीएफ, जीआरपी, महिला थाना और सीडब्ल्यूसी की संयुक्त टीम ने मोर्चा संभाला था. कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद बच्चों को फिलहाल बाल कुंज और छाया बालिका गृह भेज दिया गया है, जहां उनकी काउंसलिंग की जा रही है. अब तक वहां से 30 दिनों में 26 से ज्यादा बच्चे बचाए गए है. चक्रधरपुर में बढ़ते रेस्क्यू ऑपरेशन्स एक तरफ पुलिस की जीत हैं, तो दूसरी तरफ एक कड़वी सच्चाई को भी उजागर कर रहे हैं. पिछले एक महीने में यह तीसरा ऑपरेशन है. इससे पहले भी 17 नाबालिग बच्चियों को बचाया जा चुका है यानी कुल मिलाकर करीब 26 जिंदगियां बचाई गई हैं. अब तस्कर सीधे बड़े शहरों की ‘कंपनियों’ के नाम का इस्तेमाल कर रहे हैं ताकि माता-पिता को झांसे में लिया जा सके. लगातार बढ़ती घटनाओं के बाद चक्रधरपुर स्टेशन और आसपास के बस स्टैंड्स पर सादी वर्दी में पुलिसकर्मियों की तैनाती बढ़ा दी गई है.







