
जमशेदपुर : झारखंड में नई सरकार हेमन्त सोरेन के नेतृत्व में जैसे ही बनी वैसे ही पथलगढ़ी के खूंटी में पुलिस की ओर से दर्ज मामले को वापस ले लिया था. इसको लेकर नतीजा अब तक भले कुछ भी हो लेकिन हकीकत है कि पथलगढ़ी को लेकर गांव-गांव में एक बार फिर से समानांतर सरकार बनाने की प्रक्रिया तेज हो गई है. हालात का अंदाजा पश्चिम सिंहभूम ज़िले में पथलगढ़ी को लेकर हुई सात लोगों के नरसंहार से ही लगाया जा सकता है.

सारंडा जंगल के बीचोबीच बसे गुदड़ी के गांव में इस नरसंहार कों सिर्फ इसलिए अंजाम दिया गया क्योंकि उपमुखिया पथलगढ़ी का विरोध कर रहे थे. उपमुखिया के साथ कुल सात लोगों की हत्या की गई. जब www.sharpbharat.com की टीम ने सारंडा के इन गांव का जायजा लिया तो पाया कि सब जगह पथलगढ़ी लगा दिया गया है.

अपने गांव में अपना शासन व्यवस्था यहाँ खड़ी कर दी गई है. यहां बाहरी को इंट्री नही है जबकि पुलिस नही गांव के लोग ही खुद फैसला लेंगे. इस हालात के बाद माहौल काफी खराब हो चुका है और टकराव की स्थिति उत्पन्न हो चुकी है.







