रांची/नई दिल्ली : राजधानी नई दिल्ली स्थित सुषमा स्वराज भवन में आज “कॉन्फ्रेंस ऑफ स्टेट माइनॉरिटी कमिशन्स” शीर्षक से एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया. इस सम्मेलन में देशभर के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री, विभिन्न धर्मों के धार्मिक नेता, राज्य अल्पसंख्यक आयोगों के अध्यक्ष तथा केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया. सम्मेलन में राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के सदस्यों, विभिन्न राज्यों के मंत्रियों, सामाजिक प्रतिनिधियों और धार्मिक हस्तियों ने अल्पसंख्यकों के विकास, अधिकारों, शिक्षा, धार्मिक स्वतंत्रता और कल्याण से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तृत चर्चा की. कार्यक्रम का उद्घाटन केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने दीप प्रज्वलित कर किया.(नीचे भी पढ़े)

उद्घाटन सत्र में राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के संयुक्त सचिव डॉ. अतिया नंद ने अतिथियों का स्वागत किया, जबकि आयोग की सचिव अलका उपाध्याय ने सम्मेलन के उद्देश्यों और उसकी महत्ता पर प्रकाश डाला. इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने भी सभा को संबोधित किया. सम्मेलन में झारखंड से अल्पसंख्यक कल्याण एवं जल संसाधन मंत्री हफीजुल हसन, झारखंड राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष हिदायतुल्लाह खान तथा उपाध्यक्ष शमशीर आलम शामिल हुए. उन्होंने राज्य एवं देशभर के अल्पसंख्यकों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर प्रभावशाली ढंग से उठाया. झारखंड सरकार के अल्पसंख्यक कल्याण एवं जल संसाधन मंत्री हफीजुल हसन ने अपने संबोधन में कहा कि अल्पसंख्यकों की शैक्षणिक, सामाजिक और आर्थिक प्रगति के लिए केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय अत्यंत आवश्यक है. उन्होंने कहा कि झारखंड सरकार अल्पसंख्यक समुदाय के कल्याण, आधुनिक शिक्षा, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता के लिए गंभीरता से कार्य कर रही है. उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यकों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा राज्य सरकार हर स्तर पर अल्पसंख्यक समुदाय की समस्याओं के समाधान के लिए प्रतिबद्ध है. साथ ही उन्होंने अल्पसंख्यक छात्रों के लिए शिक्षा के अवसर बढ़ाने, उर्दू भाषा के संवर्धन और कल्याणकारी योजनाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाने पर भी जोर दिया. (नीचे भी पढ़े)

इस अवसर पर हिदायतुल्लाह खान ने राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के सचिव को एक विस्तृत ज्ञापन भी सौंपा, जिसमें अल्पसंख्यकों के अधिकारों और समस्याओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण बिंदु शामिल थे. उन्होंने मांग की कि रांची के बिरसा मुंडा एयरपोर्ट से हज उड़ान पुनः शुरू की जाए ताकि झारखंड के हज यात्रियों को सुविधा मिल सके. अल्पसंख्यक विद्यार्थियों को कक्षा 6 से 10 तक उर्दू एवं जनजातीय भाषाओं की शिक्षा वैकल्पिक विषय के रूप में उपलब्ध कराई जाए. प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम (पीएमजेवीके) के अंतर्गत वर्ष 2019 के बाद से बंद पड़े फंड को पुनः जारी किया जाए तथा झारखंड सहित अन्य राज्यों में विकास कार्यों की निगरानी और बजट में वृद्धि की जाए. अल्पसंख्यक संस्थानों को अल्पसंख्यक दर्जा प्रदान करने की प्रक्रिया को सरल बनाया जाए. अल्पसंख्यकों के धार्मिक स्थलों, घरों और दुकानों पर बुलडोजर कार्रवाई जैसे मामलों में सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए. नई 15 सूत्री कार्यक्रम समिति के गठन और उसके प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित किया जाए. राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत मातृभाषा उर्दू सहित अन्य भाषाओं के संरक्षण को सुनिश्चित किया जाए. अपने संबोधन में हिदायतुल्लाह खान ने कहा कि अल्पसंख्यकों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा तथा उनकी शैक्षणिक और सामाजिक उन्नति समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है, जिसके लिए केंद्र और राज्य सरकारों को गंभीर कदम उठाने होंगे. सम्मेलन के तकनीकी सत्रों में मुस्लिम, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों के प्रतिनिधियों ने भी अपने विचार रखे तथा अल्पसंख्यकों के सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक सशक्तिकरण पर बल दिया. अंत में वक्ताओं ने कहा कि देश की प्रगति में अल्पसंख्यकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है और उनके अधिकार, सम्मान एवं विकास को सुनिश्चित करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है.







