रांची : झारखंड की राजधानी रांची के धुर्वा स्थित झारखंड राज्य अल्पसंख्यक आयोग के कार्यालय में आयोग की एक महत्वपूर्ण आंतरिक बैठक अध्यक्ष हिदायतुल्लाह खान की अध्यक्षता में हुई. बैठक में अल्पसंख्यक समुदाय से जुड़े शिक्षा, सामाजिक, आर्थिक, कानूनी और प्रशासनिक मामलों सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई. बैठक में कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर सहमति बनी और राज्य सरकार से इन मामलों में गंभीरता से आगे बढ़ने की अपील करने का फैसला लिया गया. बैठक में आयोग के उपाध्यक्ष प्रणेश सोलोमन, शमशेर आलम और ज्योति सिंह मथारू के अलावा सदस्य वारिस कुरैशी, डॉ. एम. तौसीफ, रंजीत कुमार मल्लिक, सविता टुडू और इकरारुल हसन मौजूद थे.(नीचे भी पढ़े)
आयोग के सचिव मुमताज अली ने भी बैठक में हिस्सा लिया. बैठक में सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा चतरा जिले के टंडवा स्थित बड़गांव में मोहम्मद इमरोज की मॉब लिंचिंग कर हत्या का मामला रहा. आयोग के अध्यक्ष हिदायतुल्लाह खान ने सदस्यों को पूरे मामले की जानकारी दी और घटना की कड़ी निंदा की. उन्होंने कहा कि मोहम्मद इमरोज की बेहद बेरहमी से हत्या की गई. यह बेहद दुखद और शर्मनाक है कि घटना के समय घटनास्थल पर पुलिसकर्मी भी मौजूद थे. उन्होंने बताया कि घटनास्थल पर मौजूद दो सब-इंस्पेक्टर समेत अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ आयोग की पहल के बाद चतरा एसपी ने कार्रवाई करते हुए उन्हें निलंबित किया है. आयोग ने एसपी की इस कार्रवाई की सराहना की. हालांकि बैठक में इस बात पर चिंता जताई गई कि संबंधित थाना प्रभारी के खिलाफ अब तक इसी तरह की कार्रवाई नहीं की गई है. (नीचे भी पढ़े)
आयोग के अध्यक्ष ने कहा कि मिली जानकारी के अनुसार थाना प्रभारी के घटनास्थल पर पहुंचने के बाद भी मोहम्मद इमरोज के साथ मारपीट की गई. उन्होंने कहा कि अगर थाना प्रभारी ने समय पर और प्रभावी तरीके से कार्रवाई की होती तो संभव है कि मोहम्मद इमरोज की जान बचाई जा सकती थी. बैठक में फैसला लिया गया कि मोहम्मद इमरोज मामले पर आयोग के अध्यक्ष हिदायतुल्लाह खान और उपाध्यक्ष प्रनीश सुलेमान की ओर से एक संयुक्त और विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी. आयोग ने इस मामले में आगे और कड़ी कार्रवाई करने तथा भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने पर जोर दिया. आयोग के सचिव को निर्देश दिया गया कि वे डीजीपी और मुख्य सचिव को पत्र भेजकर एक सप्ताह के अंदर मोहम्मद इमरोज मामले में अब तक हुई जांच और कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट मांगें. बैठक में सोशल मीडिया के जरिए माहौल खराब करने की कथित कोशिशों पर भी गंभीरता से चर्चा हुई. आयोग ने कहा कि कुछ लोगों और राजनीतिक दलों की ओर से ऐसे संवेदनशील मामलों को सांप्रदायिक रंग देने, किसी एक धर्म को निशाना बनाने और गाली-गलौज के जरिए माहौल खराब करने की कोशिश निंदनीय है. (नीचे भी पढ़े)
इस मामले में भी आयोग के सचिव को डीजीपी और मुख्य सचिव को पत्र लिखकर ऐसे लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग करने का निर्देश दिया गया. बैठक में पिछले तीन वर्षों के दौरान राज्य में हुई मॉब लिंचिंग की घटनाओं तथा कथित तौर पर पुलिस द्वारा अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों के साथ मारपीट या उनकी मौत के मामलों पर भी चिंता जताई गई. आयोग ने ऐसे मामलों में अब तक हुई कार्रवाई की समीक्षा करने और जिन मामलों में कार्रवाई लंबित है, उनमें प्रभावी कदम उठाने की जरूरत पर जोर दिया. बैठक में हजारीबाग में रूपेश पाठक की मॉब लिंचिंग के मामले का भी जिक्र किया गया। इस मामले में मंत्रियों के मौके पर पहुंचने और मुआवजे की घोषणा का हवाला देते हुए बैठक में इस बात पर दुख जताया गया कि अल्पसंख्यक समुदाय से जुड़े मॉब लिंचिंग के मामलों में पीड़ित परिवारों के लिए इसी तरह के मुआवजे की घोषणा नहीं की गई. शिक्षा के क्षेत्र में बैठक के दौरान झारखंड में अरबी-फारसी विश्वविद्यालय की स्थापना को लेकर भी महत्वपूर्ण चर्चा हुई. आयोग ने बिहार में स्थापित मौलाना मजहरुल हक अरबी एवं फारसी विश्वविद्यालय की तर्ज पर झारखंड में भी अरबी और फारसी भाषा एवं शिक्षा के लिए एक विश्वविद्यालय स्थापित करने के प्रस्ताव पर विचार किया. इस संबंध में राज्य सरकार से अपील करने का फैसला लिया गया. इसके साथ ही आलिम और फाजिल की डिग्री की मान्यता तथा उसकी कानूनी और शैक्षणिक स्थिति से जुड़े मामले पर भी गंभीरता से चर्चा की गई. बैठक में झारखंड में अल्पसंख्यक निदेशालय, मदरसा बोर्ड और उर्दू अकादमी के गठन का मुद्दा भी उठाया गया. (नीचे भी पढ़े)
आयोग की ओर से कहा गया कि पिछली कई बैठकों में भी इन संस्थानों की स्थापना की जरूरत पर चर्चा हो चुकी है, लेकिन अब तक इस दिशा में पर्याप्त प्रगति नहीं हुई है. बैठक में इन संस्थानों की स्थापना के लिए औपचारिक प्रस्ताव पारित किया गया और राज्य सरकार से इस दिशा में प्रभावी और तेजी से कार्रवाई करने की अपील करने का फैसला लिया गया. बैठक में अल्पसंख्यक स्कूलों की वर्तमान स्थिति पर भी विस्तार से चर्चा हुई. स्कूलों में शिक्षकों के खाली पदों को भरने तथा विद्यार्थियों को सरकार की ओर से दी जाने वाली बुनियादी सुविधाएं और जरूरी सामान उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया. इसके अलावा विद्यार्थियों के लिए पर्याप्त संख्या में किताबें उपलब्ध कराने, ड्रेस और साइकिल वितरण योजनाओं से जुड़ी समस्याओं पर भी चर्चा की गई. आयोग ने कहा कि सरकारी योजनाओं का लाभ केवल कागजों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसका वास्तविक लाभ जरूरतमंद विद्यार्थियों और अल्पसंख्यक समुदाय तक प्रभावी रूप से पहुंचना चाहिए. बैठक में अल्पसंख्यक विकास वित्त आयोग के गठन का मुद्दा भी सामने आया. आयोग ने कहा कि झारखंड में अब तक इस संस्था का गठन नहीं हुआ है. इसके कारण अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को आर्थिक और कारोबारी मामलों में कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है. बैठक में इस आयोग को जल्द से जल्द बनाने की जरूरत पर जोर दिया गया, ताकि अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को ऋण और दूसरी वित्तीय सुविधाएं हासिल करने में आ रही परेशानियों को दूर किया जा सके. (नीचे भी पढ़े)
खास तौर पर टीसीडीसी के माध्यम से अल्पसंख्यकों को दिए जाने वाले ऋण से जुड़ी समस्याओं को भी आयोग के सामने रखा गया. इन समस्याओं को दूर करने के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाने पर जोर दिया गया. बैठक में इस बात पर सहमति बनी कि अल्पसंख्यक समुदाय की शिक्षा, सामाजिक स्थिति और आर्थिक विकास के लिए बनाई जाने वाली योजनाएं केवल सरकारी फाइलों और कागजी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहनी चाहिए. इन योजनाओं को जमीन पर सही तरीके से लागू किया जाना चाहिए, ताकि उनका वास्तविक लाभ जरूरतमंद लोगों तक पहुंच सके. लंबित मामलों के समाधान के लिए संबंधित सरकारी विभागों के साथ बेहतर तालमेल स्थापित करने और जरूरी कदम उठाने पर भी सहमति बनी. बैठक के अंत में आयोग के सदस्यों ने संकल्प लिया कि अल्पसंख्यक समुदाय के अधिकारों, शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा और आर्थिक विकास से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता के आधार पर संबंधित अधिकारियों के सामने उठाया जाएगा और इनके समाधान के लिए प्रभावी प्रयास लगातार जारी रखे जाएंगे.




