मेदिनीनगर (पलामू) : बेरोजगार संघर्ष मोर्चा के जिला कार्यालय में संत गाडगे की 149 वीं जयंती मनाई गयी. कार्यक्रम की अध्यक्षता मोर्चा अध्यक्ष उदय राम ने की. संचालन संजय कुमार ने किया. सर्वप्रथम संत गाडगे के तस्वीर पर फुल माला चढ़ाकर कार्यक्रम की शुरुआत की गयी. मोर्चा अध्यक्ष उदय राम ने कहा कि संत गाडगे दलितों एवं वंचितों के दिशावाहक थे. उन्होने सामाजिक बुराईयों, कुरीतियों एवं अंधविश्वास को दूर करने का रास्ता दिखाया. संत गाडगे का मानना था कि ईश्वर न तो तीर्थ स्थानों में है और न ही मंदिरों, गिरजा घरों में हैं. उन्होंने भूखों को भोजन, नंगे को वस्त्र, प्यासे को पानी, बेकार को काम का संदेश दिया. संत गाडगे ने कई धर्मशालाएं बनवाए ताकि गरीबों को मुफ्त में ठहरने की व्यवस्था मिल सकें. संत गाडगे 1905 से 1917 तक अज्ञात वास में रहे. उन्होंने आगे बढ़ने के लिए शिक्षा पर बल दिया. (नीचे भी पढ़ें)
मोर्चा अध्यक्ष उदय राम ने उपस्थित लोगों से अपील किया कि संतों के आदर्शों पर चलने वाला व्यक्ति ही समाज का सच्चा सिपाही हो सकता है. संतन रजक ने कहा कि संत गाडगे का जन्म 23 फरवरी 1876 ई० को महाराष्ट्र प्रान्त के अमरावती जिला में हुआ था. वे दीन-दुखियों, वंचितों की सेवा को ही ईश्वर मानते थे. डा. अम्बेडकर संत गाडगे की सेवा भवना से प्रभावित थे. संतों की कोई जात नहीं होती. वे तो समाज के मार्ग दर्शक होते हैं. इस अवसर पर अरविन्द कुमार रजक, दिनेश राम, दीपक कुमार, उपेन्द्र रजक, राजू राम, उमेश पासवान, संजीत कुमार, नौनित कुमार, यशवन्त कुमार, अरुण पासवान, विनय राम, अमरनाथ, उपेन्द्र तिवारी, सतीश दुबे संतोष विश्वकर्मा कुमार ने अपने अपने विचार व्यक्त किए। राम नरेश महतो ने धन्यवाद ज्ञापित किया.



