
रांची : झारखंड सरकार ने राज्य के पंचायतों को दोबारा एक्सटेंशन दे दिया है. पंचायत चुनाव होने तक या छह माह तक के लिए इस बार भी एक्सटेंशन दिया गया है. इसको लेकर अधिसूचना निकाली गयी है. इस अधिसूचना के तहत इस बार सभी के पद और शक्तियों को बरकरार रखा गया है जबकि उपमुखिया को भी अधिकार दिया गया है, जो पिछले बार नहीं था. ग्राम प्रधान की अध्यक्षता में गठित समिति पंचायत चुनाव होने तक या छह माह तक कार्य करती रहेगी. विधि विभाग से रायशुमारी करने के बाद यह नयी अधिसूचना निकाली गयी है. ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद को छह माह या चुनाव होने तक सारी शक्ति को बरकार रखते हुए विस्तार दे दिया गया है. अगर चुनाव निर्धारित अवधि तक नहीं होता है तो उचित कारण बताकर रारज्य सरकार आगे भी एक्सटेंशन दे सकती है. 2020 में ही चुनाव होना था, लेकिन कोरोना के संक्रमण के कारण पंचायत चुनाव नहीं हो पा रहा था, जिसके बाद छह माह का एक्सटेंशन दिया गया था. अब एक बार फिर से एक्सटेंशन दे दिया गया है. पहला एक्सटेंशन 7 जुलाई को ही समाप्त हो गयी थी, जिसके बाद एक माह से पंचायतों का कामकाज ठप हो गया था. विकास के काम रुके हुए थे. पिछले बार छह माह के लिए कार्यकारी समिति का गठन किया गया था, जो बार भी बरकरार रखा गया है.
ऐसे काम करेगा यह पंचायत कार्यकारी समिति
ग्राम पंचायत कार्यकारी समिति –
अध्यक्ष सह कार्यकारी प्रधान ग्राम पंचायत विघटन की तिथि को कार्यरत मुखिया
उपाध्यक्ष ग्राम पंचायत विघटन की तिथि को कार्यरत उप मुखिया.
सदस्य विघटित पंचायत के सभी निर्वाचित वार्ड सदस्य
सदस्य प्रखण्ड पंचायत राज पदाधिकारी
सदस्य प्रखण्ड समन्वयक (झारखण्ड पंचायत राज स्वशासन परिषद्)
सदस्य अंचल निरीक्षक
सदस्य प्रखण्ड विकास पदाधिकारी द्वारा नामित ग्राम पंचायत क्षेत्र का निवासी और राज्य / केन्द्र / सेना / रेल / सार्वजनिक उपक्रम से (वर्ग- 111 से अन्यून श्रेणी) सेवानिवृत्त कोई एक व्यक्ति नोट प्रखण्ड विकास पदाधिकारी द्वारा अभिप्रमाणित सेवानिवृत्त व्यक्ति उपलब्ध नही रहने की स्थिति में उनका पद रिक्त रखते हुए समिति का गठन किया जा सकेगा.
अनुसूचित क्षेत्र
अध्यक्ष सह कार्यकारी प्रधान ग्राम पंचायत विघटन की तिथि को कार्यरत मुखिया उपाध्यक्ष ग्राम पंचायत विघटन की तिथि को कार्यरत उप मुखिया
सदस्य विघटित पंचायत के सभी निर्वाचित वार्ड सदस्य
सदस्य प्रखण्ड पंचायत राज पदाधिकारी
सदस्य प्रखण्ड समन्वयक (झारखण्ड पंचायत राज स्वशासन परिषद्)
सदस्य अंचल निरीक्षक
सदस्य ग्राम पंचायत के अन्तर्गत सभी पारम्परिक प्रधान चाहे उन्हें जिस नाम से पंचायत समिति कार्यकारी समिति जाना जाता हो.
अध्यक्ष सह कार्यकारी प्रधान पंचायत समिति विघटन की तिथि को कार्यरत प्रमुख उपाध्यक्ष पंचायत समिति विघटन की तिथि को कार्यरत उप प्रमुख
सदस्य विघटित पंचायत समिति के विघटन की तिथि को झारखण्ड पंचायत राज अधिनियम की धारा 33 के अनुसार सदस्य रहे व्यक्ति, पंचायत समिति कार्यकारी समिति के सदस्य होंगे.
सदस्य जिला पंचायत राज पदाधिकारी सदस्य संबंधित प्रखण्ड क्षेत्र के अनुमण्डल पदाधिकारी सदस्य संबंधित प्रखण्ड क्षेत्र के अंचल पदाधिकारी
जिला परिषद् कार्यकारी समिति अध्यक्ष-सह- कार्यकारी प्रधान जिला परिषद् विघटन की तिथि को कार्यरत अध्यक्ष
उपाध्यक्ष जिला परिषद् विघटन की तिथि को कार्यरत उपाध्यक्ष
सदस्य विघटित जिला परिषद् के विघटन की तिथि को झारखण्ड पंचायत राज अधिनियम की धारा 49 के अनुसार सदस्य रहे व्यक्ति, जिला परिषद् कार्यकारी समिति के सदस्य होंगे.
सदस्य कार्यपालक पदाधिकारी, जिला परिषद् सदस्य निदेशक ग्रामीण विकास अभिकरण (डीआरडीए) सदस्य -परियोजना निदेशक, आई०टी०डी०ए० एवं उनके अभाव में जिला कल्याण पदाधिकारी.
तीनों स्तरों के लिए गठित कार्यकारी समिति द्वारा अपने अपने स्तरों पर यथा ग्राम पंचायत पंचायत समिति तथा जिला परिषद के लिए झारखण्ड पंचायत राज अधिनियम, 2001 तथा इसके अधीन गठित नियमावलियों, परिपत्रों, अनुदेशों या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अधीन निहित सभी शक्तियों और कृत्यों का प्रयोग तथा संपादन किया जायेगा. अपने स्तर के कार्यकारी समिति के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष एवं सदस्य उन सभी शक्तियों का प्रयोग करेंगे को अधिनियम के अधीन मुखिया, उप मुखिया, वार्ड सदस्य प्रमुख, उप प्रमुख पंचायत समिति सदस्य, जिला परिषद अध्यक्ष एवं जिला परिषद उपाध्यक्ष तथा जिला परिषद् सदस्यों को प्रदत्त है। कार्यकारी समिति अपने-अपने स्तर पर स्थायी समितियों के उन सभी कर्तव्यों का निर्वहन करेगी जो अधिनियम के अधीन निर्वाचन के पश्चात गठित स्थायी समितियों को प्रदत्त है। 4 पंचायत सचिव प्रखण्ड विकास पदाधिकारी तथा उप विकास आयुक्त सह मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी पूर्ववत अपने कर्तव्यों का निर्वहन करेंगे. झारखण्ड पंचायत राज अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप ग्राम सभा का आयोजन चाहे जिस उद्देश्य से हो, किया जा सकेगा. ग्राम सभा की अध्यक्षता अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप पारम्परिक प्रधान अथवा ग्राम पंचायत के लिए बनी कार्यकारी समिति के प्रधान द्वारा किया जा सकेगा
तीनों स्तरों के लिए गठित कार्यकारी समिति के गैर सरकारी सदस्यों (निर्वाचित तथा नामित) को बैठक में भाग लेने हेतु यात्रा भत्ता नियमानुसार अनुमान्य होगा. अन्य कोई मानदेय एवं सुविधाएँ अनुमान्य नहीं होंगी तथा उन्हें झारखण्ड पंचायत राज अधिनियम अर्न्तगत निर्वाचित जनप्रतिनिधि को प्रश संरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा.
तीनों स्तरों के लिए गठित कार्यकारी समिति में नामित सरकार के प्रतिनिधि समिति की बैठक में उपस्थित रहेंगे परन्तु इन्हें समिति के निर्णय के निमित्त मतदान का अधिकार नहीं रहेगा. समिति के वित्तीय संव्यवहार एवं योजना चयन किया एवं क्रियान्वयन लाभुक के चयन में किसी प्रकार की अनियमितता को रोकना तथा उपायुक्त के संज्ञान में लाना इनकी जबावदेही होगी
कार्यकारी समितियों की बैठकों में संगत विषयों से संबंधित पदाधिकारी / कर्मी उसी प्रकार भाग लेंगे जिस प्रकार त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं की बैठकों में भाग लेना प्रावधानित था
सरकार के विचार में यदि कार्यकारी समिति का कोई अध्यक्ष अथवा उपाध्यक्ष बिना समुचित कारण के तीन लगातार बैठकों में अनुपस्थित रहने या जानबूझकर अपने कृत्यों एवं अपने कर्तव्यों को करने से इन्कार या उपेक्षा करने या उसमें निहित शक्तियों के दुरुपयोग या अपने कर्तव्यों के निर्वहन में दुराचार का दोषी पाये जाने या विधि द्वारा स्थापित प्राधिकार के आदेश की अवज्ञा या अपने कर्तव्यों को निर्वहन करने में शारीरिक या मानसिक तौर पर अक्षम होने का दोषी हो तो सरकार ऐसे अध्यक्ष या उपाध्यक्षको स्पष्टीकरण हेतु समुचित अवसर प्रदान करने के उपरान्त आदेश पारित कर यथास्थिति ऐसे अध्यक्ष या उपाध्यक्ष को उसके पद से हटा अथवा निलंबित कर सकेगी. इस संबंध में पूर्व में निर्गत कार्यालय आदेश द्वारा निर्धारित प्रक्रिया का अनुपालन किया जायेगा.
तीनों स्तरों पर अध्यक्ष के अनुपस्थिति / निलंबन की स्थिति में कार्यकारी समिति के उपाध्यक्ष, समिति के अध्यक्ष के दायित्व का निर्वहन करेंगे. परन्तु इसके लिए विभाग का अनुमोदन अपेक्षित होगा. उपाध्यक्ष के भी उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में कार्यकारी समिति में मतदान की शक्ति प्राप्त सदस्यों में से प्रत्यक्ष मतदान द्वारा उपाध्यक्ष का चुनाव कराया जा सकेगा.
कार्यकारी समिति की व्यवस्था त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं के आम निर्वाचन सम्पन्न हो जाने के पश्चात् स्वतः समाप्त हो जायेगी तीनों स्तरों पर कार्यकारी समिति का गठन संबंधित जिले के उपायुक्त द्वारा किया जायेगा.
कार्यकारी समिति के गठन कार्य प्रक्रिया या किसी भी पहलू में आने वाली किसी कठिनाई को दूर करने के लिए दिशा-निर्देश निर्गत करने में पंचायती राज विभाग सक्षम होगा. विभागीय अधिसूचना संख्या 42 दिनांक 07.01.2021 के आलोक में पूर्व से कियाशील कार्यकारी समितियाँ इस अधिसूचना के आलोक में समितियों के गठन के साथ ही विलोपित समझी जायेगी.





