
जमशेदपुर : देश में पेगासस जासूसी कांड और लोगों के फोन में तांकझांक का मामला चल रहा है और सत्ता में भूचाल आया हुआ है. लेकिन झारखंड में ऐसी घटना पहले ही घटित हो चुकी है. झारखंड राज्य में जब भाजपा का ही शासन था और रघुवर दास की सरकार थी, तब कई पत्रकारों और नेताओं से लेकर अधिकारियों तक का फोन टेपिंग किया गया था. बकायदा विशेष शाखा के अवैध कार्यालय संचालित हुए थे. तीन डीएसपी एक निजी व्यक्ति के अधीन काम करते थे. इस मसले को एक बार फिर से जमशेदपुर पूर्वी के विधायक और पूर्व मंत्री सरयू राय ने उठाया है और राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर कार्रवाई करने की मांग की है. वे ऐसा पत्र पहले भी लिख चुके है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गयी है. ताजा पत्र में सरयू राय ने कहा है कि राज्य के आरक्षी महानिदेशक को प्रेषित सरयू राय के दो पत्रों में वर्णित सूचनाओं की विस्तृत जांच झारखण्ड पुलिस की अपराध अनुसंधान शाखा और विशेष शाखा द्वारा की गई है और उनकी सूचनाएं सही पायी गयी है. उन्होंने कहा है कि जांच में यह भी सिद्ध हो गया कि अवैध कार्यालय संचालित करने के लिए जिन दो भवनों के आवंटन हेतु विशेष शाखा ने भवन निर्माण विभाग को अनुरोध पत्र भेजा है, उसमें अंकित है कि इन भवनों को आवंटित करने का अनुरोध तत्कालीन मुख्यमंत्री (उस वक्त रघुवर दास मुख्यमंत्री थे) के निर्देश पर किया गया था. उन्होंने अपने पत्र में लिखा है कि यह भी साबित हो गया कि झारखण्ड सरकार के पुलिस विभाग के तीन पुलिस उपाधीक्षक दीपक शर्मा, अनिल कुमार सिंह, केके महतो और एक पुलिस निरीक्षक, प्रभाष कुमार मिश्रा सहित कई आरक्षी इस अवैध कार्यालय के संचालन के लिए प्रतिनियुक्त किये गये थे. सरयू राय ने बताया है कि जांच में यह साबित हो गया कि इस कार्यालय का संचालन बैजनाथ प्रसाद नाम के एक व्यक्ति द्वारा किया जा रहा था, जो सरकारी कर्मी नहीं था. इसके अधीन संचालित अवैध कार्यालय में झारखण्ड पुलिस के वाहन, फोन टेपिंग उपकरण एवं अन्य संसाधन उपलबध कराया गया था. जांच में यह भी पता चला है कि कोयला का कारोबार करने वाले एक शातिर व्यक्ति को कोतवाली थाना में नियुक्त कर उसकी सेवा इस अवैध कार्यालय के लिये ली जानी थी. सरयू राय ने कहा है कि उपर्युक्त विवरण से स्पष्ट है कि यह कार्यालय तत्कालीन मुख्यमंत्री की पूर्ण जानकारी में और उनके निर्देश पर खोला गया था. इसका उद्देश्य गैरकानूनी तरीके से फोन टेपिंग करने एवं अन्य सूचनाएं अवैध तरीके से एकत्र करना था. सरयू राय ने मांग की है कि जब जांच पूरी हो गई है, दोषी चिन्हित हो गए हैं तो इस जघन्य गैरकानूनी कृत्य के लिए उनके विरूद्ध कानूनी कार्रवाई का निर्देश सक्षम स्तर से नहीं होना असमंजस में डालने वाला है. उन्होंने कहा है कि फिलहाल पेसागस के जासूसी उपकरणों के माध्यम से अनेक नामचीन हस्तियों के स्मार्टफोन में घुसकर उनकी जासूसी होने की बात समाचार माध्यमों में एवं देश की राजनीति में चर्चा का विषय बना हुआ है. तत्कालीन झारखंड सरकार ने भी राज्य स्तर पर उपलब्ध सेंधमारी करने वाले उपकरणों से राज्य के विभिन्न व्यक्ति की फोन टेपिंग का, जो अवैध एवं कुत्सित प्रयास किया था, वह भी इसी तरह के एक लघु रूप था. उन्होंने कहा कि आप अपने स्तर से निर्देश देने की कृपा करेंगे कि अनधिकृत फोन टेपिंग के माध्यम से अवैध सूचना संग्रह करने की पूर्ववर्ती सरकार के प्रयास में शामिल दोषी व्यक्तियों को, चाहे वे सरकार हां या गैर-सरकारी हो, विधि-सम्मत तरीके से दंडित किया जाए, ताकि भविष्य में कोई भी सरकार के पुलिस तंत्र के नाम पर काला धब्बा लगाने वाला कार्य करने की हिम्मत नहीं कर सके.





